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Maharajganj News: बौद्ध अध्ययन और शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा देने के लिए हुआ करार

Fri, 12 Jun 2026 02:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Fri, 12 Jun 2026 02:02 AM IST
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Agreement signed to give a new direction to Buddhist studies and academic collaboration.
कपिलवस्तु/सिद्धार्थनगर। भारत और नेपाल के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से जुड़े सिद्धार्थनगर-कपिलवस्तु-लुंबिनी क्षेत्र को नई शैक्षणिक पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया गया है।
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सिक्किम अल्पाइन विश्वविद्यालय, नामची (सिक्किम) और नेपाल के लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय के बीच शैक्षणिक सहयोग, अनुसंधान और बौद्ध अध्ययन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
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यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब कपिलवस्तु (नेपाल), लुंबिनी और उत्तर प्रदेश का सिद्धार्थनगर क्षेत्र भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े वैश्विक बौद्ध सर्किट का प्रमुख हिस्सा माना जाता है। इस एमओयू को अब केवल संस्थागत सहयोग नहीं बल्कि भारत-नेपाल सीमा पर बौद्ध ज्ञान कॉरिडोर को मजबूत करने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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समझौते के तहत दोनों विश्वविद्यालय संयुक्त रूप से शैक्षणिक और अनुसंधान गतिविधियों का संचालन करेंगे। इसमें संकाय और छात्र विनिमय कार्यक्रम, संयुक्त शोध परियोजनाएं, संगोष्ठियां, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, कार्यशालाएं, संयुक्त प्रकाशन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम शामिल हैं। इसका मुख्य फोकस बौद्ध अध्ययन, बौद्ध दर्शन, शांति अध्ययन, हिमालयी संस्कृति और विरासत संरक्षण पर रहेगा।
इस सहयोग के जरिये विद्यार्थियों और शोधार्थियों को न केवल अकादमिक अवसर मिलेंगे बल्कि भारत और नेपाल की साझा बौद्ध विरासत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध और अनुभव का भी मंच मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह पहल सीमावर्ती क्षेत्रों, विशेषकर सिद्धार्थनगर और कपिलवस्तु में अकादमिक गतिविधियों और बौद्ध अध्ययन आधारित शोध को नई गति दे सकती है।
इस अवसर पर सिक्किम अल्पाइन विश्वविद्यालय के कुलसचिव सत्याम दीक्षित ने कहा कि यह एमओयू विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय सहयोग नीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि लुंबिनी बौद्ध विश्वविद्यालय के साथ यह साझेदारी बौद्ध अध्ययन, शोध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन करेगी और भारत-नेपाल के शैक्षणिक संबंधों को और मजबूत बनाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय नेपाल के विद्यार्थियों के लिए विशेष छात्रवृत्ति और निशुल्क शिक्षा योजनाओं पर भी कार्य कर रहा है ताकि उच्च शिक्षा तक अधिक से अधिक पहुंच सुनिश्चित की जा सके। उनका कहना था कि शिक्षा ही दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
यह सहयोग भारत-नेपाल के उस साझा ऐतिहासिक भूगोल को भी पुनर्स्थापित करता है, जहां लुंबिनी (जन्मस्थली), कपिलवस्तु (राज्य और ऐतिहासिक केंद्र) और सिद्धार्थनगर (सीमा क्षेत्र) एक ही बौद्ध सभ्यता के महत्वपूर्ण हिस्से रहे हैं। इस दृष्टि से इस एमओयू को सीमापार बौद्ध अकादमिक नेटवर्क की शुरुआत के रूप में भी देखा जा रहा है।

दोनों विश्वविद्यालयों ने यह स्पष्ट किया है कि यह साझेदारी केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि यह सांस्कृतिक समझ, शोध सहयोग और क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा देगी।
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