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Maharajganj News: करवाचौथ पर व्रत रख महिलाओं ने की अखंड सौभाग्य की कामना
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महराजगंज। पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना को लेकर बृहस्पतिवार को महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत रखा। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद रात में चंद्र दर्शन कर महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया।
करवा चौथ की तैयारी महिलाएं करीब एक सप्ताह से कर रही थीं। बृहस्पतिवार सुबह स्नान के बाद महिलाओं ने पारंपरिक लाल वस्त्र धारण किए और सोलह शृंगार कर पूजा की तैयारी में जुट गईं। हाथों में मेहंदी और पारंपरिक आभूषणों से सजी महिलाओं ने दिनभर व्रत रखा। शहर के विभिन्न मोहल्लों और कॉलोनियों में महिलाओं ने समूह में बैठकर करवा चौथ की कथा सुनी। इस दौरान पारंपरिक गीत गाए गए और करवे की पूजा की गई।
रात करीब 8:05 बजे चंद्र दर्शन होने के बाद महिलाओं ने छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखा। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला। कुछ स्थानों पर बादलों के कारण चंद्र दर्शन में देरी हुई। ऐसे में महिलाओं ने दूसरे शहरों से मोबाइल पर चांद की तस्वीरें मंगाकर व्रत पूरा किया। देर रात तक पूजन का सिलसिला चलता रहा।
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फरेंदा निवासी ज्योतिषाचार्य विंध्यवासिनी पांडेय ने बताया कि विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। मान्यता के अनुसार, इस व्रत का संबंध चंद्रमा, शुक्र और बृहस्पति ग्रह से भी माना जाता है।
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करवा चौथ की तैयारी महिलाएं करीब एक सप्ताह से कर रही थीं। बृहस्पतिवार सुबह स्नान के बाद महिलाओं ने पारंपरिक लाल वस्त्र धारण किए और सोलह शृंगार कर पूजा की तैयारी में जुट गईं। हाथों में मेहंदी और पारंपरिक आभूषणों से सजी महिलाओं ने दिनभर व्रत रखा। शहर के विभिन्न मोहल्लों और कॉलोनियों में महिलाओं ने समूह में बैठकर करवा चौथ की कथा सुनी। इस दौरान पारंपरिक गीत गाए गए और करवे की पूजा की गई।
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रात करीब 8:05 बजे चंद्र दर्शन होने के बाद महिलाओं ने छलनी से पहले चंद्रमा और फिर पति का चेहरा देखा। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोला। कुछ स्थानों पर बादलों के कारण चंद्र दर्शन में देरी हुई। ऐसे में महिलाओं ने दूसरे शहरों से मोबाइल पर चांद की तस्वीरें मंगाकर व्रत पूरा किया। देर रात तक पूजन का सिलसिला चलता रहा।
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फरेंदा निवासी ज्योतिषाचार्य विंध्यवासिनी पांडेय ने बताया कि विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं। मान्यता के अनुसार, इस व्रत का संबंध चंद्रमा, शुक्र और बृहस्पति ग्रह से भी माना जाता है।