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Maharajganj News: तीन साल से एईएस और चार साल से जेई के कहर पर लगाम

Wed, 26 Aug 2026 01:45 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2026 01:45 AM IST
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AES has been curbed for three years and JE for four years.
महराजगंज। कभी मासूमों के लिए काल बने जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) का कहर अब महराजगंज में थमता नजर आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। जिले में बीते तीन साल में एईएस से एक भी बच्चे की मौत नहीं हुई जबकि जेई से बीते चार साल से किसी बच्चे की जान नहीं गई है। जांच-इलाज की सुविधाओं के विस्तार, नियमित टीकाकरण और गांव-गांव चलाए गए जागरूकता अभियानों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है।
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जिला स्वास्थ्य समिति के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में जिले में एईएस के 85 मामले सामने आए थे। इनमें चार बच्चों की मौत हुई थी। वर्ष 2023 में भी 85 बच्चे एईएस से संक्रमित मिले, जिनमें दो की मौत हुई। इसके बाद मामलों में लगातार कमी आई। वर्ष 2024 में 38, वर्ष 2025 में 26 और अगस्त 2026 तक एईएस के सात मामले सामने आए। राहत की बात यह है कि वर्ष 2024 से अब तक एईएस से किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है।
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जेई के मामलों में भी काफी कमी आई है। वर्ष 2022 में जिले में जेई के 12 मरीज मिले थे जिनमें एक की मौत हुई थी। वर्ष 2023 में 38, वर्ष 2024 में 22, वर्ष 2025 में एक और अगस्त 2026 तक जेई के दो मामले सामने आए हैं। वर्ष 2023 से अब तक जेई से किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है।
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जांच-इलाज की सुविधा बढ़ी, गांव-गांव पहुंची जागरूकता

जेई-एईएस से होने वाली मौतों और मामलों में कमी के पीछे स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए गए लगातार प्रयास अहम हैं। जेई-एईएस के नोडल प्रभारी डॉ. केपी सिंह ने बताया कि जिले में वर्ष 2005-06 से जेई टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था। शुरुआत में शिविर लगाकर टीकाकरण कराया जाता था। वर्ष 2010 के बाद इसे नियमित टीकाकरण में शामिल कर लिया गया। जेई के टीके की पहली खुराक नौ से 11 माह की उम्र में दी जाती है। इसके लिए इस वर्ष 80,744 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें जुलाई तक 25,786 बच्चों को टीका लगाया जा चुका है। दूसरी खुराक 16 से 24 माह की उम्र में दी जाती है। इसके लिए जिले में 76,219 बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य है, जिसमें अब तक 24,128 बच्चों को टीका लगाया जा चुका है।


जिला अस्पताल में 32 बेड, 11 सीएचसी पर चार-चार बेड

जेई-एईएस के मरीजों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने के लिए जिले के सभी 11 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) पर इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर बनाए गए हैं। यहां तेज बुखार (हाई ग्रेड फीवर) वाले मरीजों को भर्ती कर जेई की जांच और उपचार किया जाता है। जिला अस्पताल में जेई-एईएस के लिए 32 बेड का इंसेफेलाइटिस वार्ड संचालित है। वहीं, सभी 11 सीएचसी पर चार-चार बेड के इंसेफेलाइटिस वार्ड बनाए गए हैं। जिला अस्पताल में वेंटिलेटरयुक्त जेई-एईएस वार्ड की भी सुविधा उपलब्ध है।


आशाओं के जरिए गांव-गांव हो रहा सर्वे

आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से गांव-गांव जाकर हाई ग्रेड फीवर वाले मरीजों का सर्वे कराया जाता है। संदिग्ध मरीजों को तत्काल सीएचसी या जिला अस्पताल भेजकर भर्ती कराया जाता है। पहले जेई-एईएस के मरीज मिलने पर उन्हें इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेजना पड़ता था। अब जिले में ही जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध होने से मरीजों को समय पर इलाज मिल रहा है।




दस्तक अभियान से लोगों को किया जागरूक

स्वास्थ्य विभाग के दस्तक अभियान से भी इंसेफेलाइटिस के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है। अभियान के दौरान गांव-गांव जाकर लोगों को बीमारी के कारण, लक्षण और बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। साफ-सफाई और शुद्ध पेयजल के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया। जलजनित इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण के लिए लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में किए गए प्रयासों का भी असर दिखाई दे रहा है।
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