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Maharajganj News: मिलावटखोर सक्रिय...संभलकर खाएं कुट्टू और सिंघाड़े का आटा
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मिलावट पर लगाम कसने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग भी हो गया है सक्रिय
चंदन, धूपबत्ती, हवन सामग्री आदि सामान में भी मिलावट की आशंका
महराजगंज। चैत्र नवरात्र की शुरुआत होते ही व्रत के दौरान खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ गई है। दुकानदारों ने मांग को देखते हुए दुकानें भी सजा ली हैं। कुट्टू और सिंघाड़े के आटे की मांग ज्यादा है। इसको देखते हुए मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। मिलावट पर लगाम कसने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग भी सक्रिय हो गया है।
नवरात्र में व्रत रहने वाले श्रद्धालु फलाहार में कुट्टू और सिंघाड़े के आटे का इस्तेमाल करते हैं। इसे देख कुछ मिलावटखोर मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावट कर रहे हैं तो कुछ कारोबारी पिछले सीजन के खराब हो चुके आटे को खपाने की कोशिश में लगे हैं।
सूत्रों के अनुसार, मिलावटखोर करीब एक करोड़ का मिलावटी सामान धंधेबाज खपाने की तैयारी कर लिए हैं। चंदन, धूपबत्ती, हवन सामग्री आदि सामान में भी मिलावट की आशंका है। सबसे ज्यादा लोगों की सेहत के लिए खतरा कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से है, क्योंकि खराब आटे के सेवन से व्रत तो टूटेगा ही, साथ ही फूड प्वाइजनिंग हो सकती है।
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आटा खरीदने से पहले आम लोगों के पास गुणवत्ता की पहचान करने का कोई तरीका नहीं है, इसलिए जानकारों की सलाह है कि विश्वसनीय दुकान से ही कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की खरीदारी करें। ज्यादातर कारोबारी गोरखपुर मंडी से थोक सामान मंगा रहे हैं। सबसे अधिक मांग, तिल के तेल, मुंगफली, कुट्टू के आटे, मखाना, लावा, घी की है।
किराना दुकानदार मनोज, पिंटू और रमेश ने बताया कि बाजार में सस्ते के चक्कर में कई खराब गुणवत्ता वाली सामग्री मिल जाएगी। कुट्ट का आटा 100 से लेकर 120 तक अगर मिले तो मान लीजिए मिलावटी है। वहीं बाजार में सांवा का चावल 60 रुपये किलो मिलावट वाला ही मिलेगा। शुद्ध पैकेट बंद सिंघाड़े का आटा 150 रुपये में आधा किलो मिल रहा है और कुट्टू के पैकेट का आटा 120 रुपये का आधा किलो मिल रहा है।
खाद्य विभाग के अनुसार पिछले शारदीय नवरात्र के समय चार कुट्टू के आटे के नमूने लिए गए थे जो जांच में अधोमानक पाए गए थे। विभाग इस मामले की जांच कर रहा है।
रेट सस्ता कर खपा देते हैं मिलावटी सामाग्री
दीप जलाने के लिए तिल का तेल या देसी घी हो सबकी क्वालिटी घटिया है। हवन सामग्री, रोली, कुमकुम, पूजा की हल्दी आदि की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। पूजन सामग्री विक्रेता संजन ने बताया कि बाजार में शुद्ध तिल का तेल 145 से 150 रुपये लीटर है। मिलावट वाले तिल का तेल 100 रुपये प्रति लीटर मिल जाएगा। मिलावट वाला सभी कारोबारी नहीं रखते हैं। उन्होंने बताया कि नकली कलावा सिंथेटिक धागे का होता है। असली कलावा आसानी से टूट जाता है। नकली कलावा तोड़ने में बहुत जोर लगाना पड़ता है।
वर्जन
मिलावटी खाद्य सामग्री से स्वास्थ को खतरा है। इसलिए अबकी बार मैंने शुद्ध फलाहारी की तैयारी की है। इस चैत्र नवरात्र फलाहारी रहूंगी।
-संजना
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मिलावटी सामान खाने से दिक्कत होती है। इस समय अधिकांश खाद्य सामानों में मिलावट के मामले सामने आ रहे हैं। इससे बचने के लिए अबकी बार चैत्र नवरात्र फल पर ही रहूंगी।
-उमा वर्मा
कुट्टू और सिंघाड़े के मिलावटी आटा खाने से डायरिया हो सकता है। पीलिया भी हो सकता है। मिलावटी आटा लीवर को भी डैमेज कर सकता है, ऐसे में घर पर बने फलाहार का ही सेवन करें जिससे बीमारियों से बचा जा सके। साथ ही कलर फूल सामानों के सेवन से बचने का प्रयास करें।
-डॉ. पवन कुमार सिंह, फिजिशियन
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दुकानों पर फाफड़, कुट्टू व सिंघाडा आटा व ड्राई फ्रूट आदि की जांच की जा रही है। साथ ही आम जनमानस को जागरूक किया जा रहा है कि खुले फाफड़ कुट्टू के आटे को न प्रयोग करें। निर्माण तिथि देखकर ही खरीद करें। दुकानदार को भी खुला व्रत का आटा विक्रय न करने के निर्देश दिए गए हैं।
-केके उपाध्याय, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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चंदन, धूपबत्ती, हवन सामग्री आदि सामान में भी मिलावट की आशंका
महराजगंज। चैत्र नवरात्र की शुरुआत होते ही व्रत के दौरान खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ गई है। दुकानदारों ने मांग को देखते हुए दुकानें भी सजा ली हैं। कुट्टू और सिंघाड़े के आटे की मांग ज्यादा है। इसको देखते हुए मिलावटखोर भी सक्रिय हो गए हैं। मिलावट पर लगाम कसने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग भी सक्रिय हो गया है।
नवरात्र में व्रत रहने वाले श्रद्धालु फलाहार में कुट्टू और सिंघाड़े के आटे का इस्तेमाल करते हैं। इसे देख कुछ मिलावटखोर मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में मिलावट कर रहे हैं तो कुछ कारोबारी पिछले सीजन के खराब हो चुके आटे को खपाने की कोशिश में लगे हैं।
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सूत्रों के अनुसार, मिलावटखोर करीब एक करोड़ का मिलावटी सामान धंधेबाज खपाने की तैयारी कर लिए हैं। चंदन, धूपबत्ती, हवन सामग्री आदि सामान में भी मिलावट की आशंका है। सबसे ज्यादा लोगों की सेहत के लिए खतरा कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से है, क्योंकि खराब आटे के सेवन से व्रत तो टूटेगा ही, साथ ही फूड प्वाइजनिंग हो सकती है।
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आटा खरीदने से पहले आम लोगों के पास गुणवत्ता की पहचान करने का कोई तरीका नहीं है, इसलिए जानकारों की सलाह है कि विश्वसनीय दुकान से ही कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की खरीदारी करें। ज्यादातर कारोबारी गोरखपुर मंडी से थोक सामान मंगा रहे हैं। सबसे अधिक मांग, तिल के तेल, मुंगफली, कुट्टू के आटे, मखाना, लावा, घी की है।
किराना दुकानदार मनोज, पिंटू और रमेश ने बताया कि बाजार में सस्ते के चक्कर में कई खराब गुणवत्ता वाली सामग्री मिल जाएगी। कुट्ट का आटा 100 से लेकर 120 तक अगर मिले तो मान लीजिए मिलावटी है। वहीं बाजार में सांवा का चावल 60 रुपये किलो मिलावट वाला ही मिलेगा। शुद्ध पैकेट बंद सिंघाड़े का आटा 150 रुपये में आधा किलो मिल रहा है और कुट्टू के पैकेट का आटा 120 रुपये का आधा किलो मिल रहा है।
खाद्य विभाग के अनुसार पिछले शारदीय नवरात्र के समय चार कुट्टू के आटे के नमूने लिए गए थे जो जांच में अधोमानक पाए गए थे। विभाग इस मामले की जांच कर रहा है।
रेट सस्ता कर खपा देते हैं मिलावटी सामाग्री
दीप जलाने के लिए तिल का तेल या देसी घी हो सबकी क्वालिटी घटिया है। हवन सामग्री, रोली, कुमकुम, पूजा की हल्दी आदि की शुद्धता की कोई गारंटी नहीं है। पूजन सामग्री विक्रेता संजन ने बताया कि बाजार में शुद्ध तिल का तेल 145 से 150 रुपये लीटर है। मिलावट वाले तिल का तेल 100 रुपये प्रति लीटर मिल जाएगा। मिलावट वाला सभी कारोबारी नहीं रखते हैं। उन्होंने बताया कि नकली कलावा सिंथेटिक धागे का होता है। असली कलावा आसानी से टूट जाता है। नकली कलावा तोड़ने में बहुत जोर लगाना पड़ता है।
वर्जन
मिलावटी खाद्य सामग्री से स्वास्थ को खतरा है। इसलिए अबकी बार मैंने शुद्ध फलाहारी की तैयारी की है। इस चैत्र नवरात्र फलाहारी रहूंगी।
-संजना
मिलावटी सामान खाने से दिक्कत होती है। इस समय अधिकांश खाद्य सामानों में मिलावट के मामले सामने आ रहे हैं। इससे बचने के लिए अबकी बार चैत्र नवरात्र फल पर ही रहूंगी।
-उमा वर्मा
कुट्टू और सिंघाड़े के मिलावटी आटा खाने से डायरिया हो सकता है। पीलिया भी हो सकता है। मिलावटी आटा लीवर को भी डैमेज कर सकता है, ऐसे में घर पर बने फलाहार का ही सेवन करें जिससे बीमारियों से बचा जा सके। साथ ही कलर फूल सामानों के सेवन से बचने का प्रयास करें।
-डॉ. पवन कुमार सिंह, फिजिशियन
दुकानों पर फाफड़, कुट्टू व सिंघाडा आटा व ड्राई फ्रूट आदि की जांच की जा रही है। साथ ही आम जनमानस को जागरूक किया जा रहा है कि खुले फाफड़ कुट्टू के आटे को न प्रयोग करें। निर्माण तिथि देखकर ही खरीद करें। दुकानदार को भी खुला व्रत का आटा विक्रय न करने के निर्देश दिए गए हैं।
-केके उपाध्याय, खाद्य सुरक्षा अधिकारी