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गांव को कुपोषण से मुक्त करेंगे छह विभागों के अधिकारी
Updated Thu, 09 Nov 2017 05:46 PM IST
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महराजगंज। गांवों को कुपोषण से मुक्त करने की तैयारी है। शासन से मिले निर्देश के क्रम में छह विभागों के अधिकारी मिलकर गांवों को कुपोषण से मुक्त करने की तैयारी कर रहे हैं। गांवों को कुपोषण मुक्त करने के लिए 12 मानक तय किए गए हैं। प्रत्येक कार्य के लिए अंक भी निर्धारित है। अधिकारियों द्वारा गोद लिए गांवों को छह माह के अंदर कुपोषण मुक्त करने को कहा गया है। सौ में से 75 अंक पाने पर ही गांव को कुपोषण मुक्त माना जाएगा।
गांवों को कुपोषण मुक्त करने के लिए शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य, बाल विकास, शिक्षा, पंचायती राज, ग्राम्य विकास एवं खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई हैै। इन विभागों के संबंधित गांवों के प्रधानों से भी इस कार्य में सहयोग लिया जाएगा। ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों के साथ ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जब अधिकारी गांव में भ्रमण करेंगे तो अनिवार्य रूप से ग्राम प्रधान भी मौजूद रहेंगे। राज्य पोषण मिशन की वेबसाइट पर गोद लिए गांवों का डाटा अपलोड किया जाना है। निर्धारित प्रारूप के मुताबिक प्रतिमाह की रिपोर्ट वेबसाइट पर संबंधित विभागों के अधिकारियों को अपलोड कराना होगा। शासन की ओर से छह माह का वक्त संबधित विभागों को दिया गया है। इस अवधि के बीच गोद लिए गांवों को अप्रैल 2018 तक कुपोषण मुक्त करना है। कुपोषण मुक्त बनाने के लिए अनिवार्य रूप से दो मानक बनाए गए हैं। इसके तहत 75 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को आयरन व फोलिक एसिड की निर्धारित मात्रा में सेवन कराने की प्रक्रिया पूरी करानी है। गांव में कोई भी बच्चा जिसकी उम्र छह माह से पांच वर्ष तक है, विश्व स्वास्थ्य संगठन के ग्रोथ चार्ट के अनुसार लाल श्रेणी में न हो। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी अजात शत्रु शाही का कहना है कि इस योजना को छह विभागों के अधिकारी गोद लिए गांवों में अंजाम देंगे। जिससे गांव को कुपोषण मुक्त किया जा सके। छह माह में कार्य पूरा करना है। कम से कम 75 प्रतिशत अंक पाने पर ही गांव को कुपोषण मुक्त माना जाएगा। पूरी रिपोर्ट राज्य पोषण मिशन की वेबसाइट पर दर्ज होगी।
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गांवों को कुपोषण मुक्त करने के लिए शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य, बाल विकास, शिक्षा, पंचायती राज, ग्राम्य विकास एवं खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई हैै। इन विभागों के संबंधित गांवों के प्रधानों से भी इस कार्य में सहयोग लिया जाएगा। ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों के साथ ग्राम प्रधानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जब अधिकारी गांव में भ्रमण करेंगे तो अनिवार्य रूप से ग्राम प्रधान भी मौजूद रहेंगे। राज्य पोषण मिशन की वेबसाइट पर गोद लिए गांवों का डाटा अपलोड किया जाना है। निर्धारित प्रारूप के मुताबिक प्रतिमाह की रिपोर्ट वेबसाइट पर संबंधित विभागों के अधिकारियों को अपलोड कराना होगा। शासन की ओर से छह माह का वक्त संबधित विभागों को दिया गया है। इस अवधि के बीच गोद लिए गांवों को अप्रैल 2018 तक कुपोषण मुक्त करना है। कुपोषण मुक्त बनाने के लिए अनिवार्य रूप से दो मानक बनाए गए हैं। इसके तहत 75 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं को आयरन व फोलिक एसिड की निर्धारित मात्रा में सेवन कराने की प्रक्रिया पूरी करानी है। गांव में कोई भी बच्चा जिसकी उम्र छह माह से पांच वर्ष तक है, विश्व स्वास्थ्य संगठन के ग्रोथ चार्ट के अनुसार लाल श्रेणी में न हो। प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी अजात शत्रु शाही का कहना है कि इस योजना को छह विभागों के अधिकारी गोद लिए गांवों में अंजाम देंगे। जिससे गांव को कुपोषण मुक्त किया जा सके। छह माह में कार्य पूरा करना है। कम से कम 75 प्रतिशत अंक पाने पर ही गांव को कुपोषण मुक्त माना जाएगा। पूरी रिपोर्ट राज्य पोषण मिशन की वेबसाइट पर दर्ज होगी।
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