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Maharajganj News: फरेंदा क्षेत्र में मिल की 781 एकड़ जमीन, कब्जेदारों में खलबली

Mon, 17 Feb 2025 01:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Mon, 17 Feb 2025 01:17 AM IST
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781 acres of mill land in Farenda area, panic among the occupiers
महराजगंज। लंबे समय से बंद पड़ी गणेश शुगर मिल आनंदनगर की बेशकीमती जमीनों पर कब्जा है। फरेंदा क्षेत्र में मिल की 781 एकड़ जमीन है। शासन की ओर से जारी पत्र के जानकारी होने के बाद खलबली मच गई है।
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मिल की खाली जमीनों पर कितना कब्जा है, इसके बारे में जांच के बाद ही पता चलेगा। मिल की कुछ जमीन पर करीब 20 से 25 से अधिक लोग मकान बनवा लिए है। कुछ लोग वर्षों से रह रहे हैं। विशेष सचिव की ओर से जारी पत्र में महराजगंज जिले का जिक्र है। उसमें कानपुर शुगर फैक्टरी की जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए निर्देश दिए गए हैं।
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रविवार को मिल के आस पास के लोगों से बातचीत करने पर कुछ सटीक जानकारी नहीं मिली, लेकिन कुछ लोगों ने बताया कि ऐसा सुनने में आया है कि आने वाले दिनों में कब्जा हटाया जाएगा। आस पास के तमाम लोगों ने खाली जमीनों पर कब्जा कर रखा है। ऐसे में जांच पड़ताल के बाद मुश्किल खड़ी हो जाएगी। कस्बे के अंकुर मिश्रा, विनीत मणि, सतीश बृजेश, बृजेंद्र, दिनेश आदि ने बताया कि मिल की जमीन से अवैध कब्जा हटवा कर फिर से नई उद्योग का निर्माण कराया जाय। इससे क्षेत्र का विकास हो सके।
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आठ साल पहले हटाया गया था कब्जा : 31 दिसंबर 2017 को मिल परिसर से अवैध कब्जे को कानपुर के अधिकारियों ने हटवाया था। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश पर गणेश शुगर मिल आनंदनगर का मेन गेट सील कर दिया गया। इलाहाबाद से आए लिक्विडेटर टीम ने दो दिन की कार्रवाई में मिल के आवास के साथ महत्वपूर्ण कमरों को भी सील कर दिया। फरेंदा गणेश शुगर मिल की संपत्ति हाईकोर्ट इलाहाबाद के अधीन है। शासकीय समापक के आदेश पर लिक्विडेटर टीम के देवेंद्र श्रीवास्तव, राजन सोनकर व सुरेंद्र कन्नौजिया की टीम चीनी मिल परिसर में बने आवास पर अवैध कब्जा हटाने व कमरों में सील किया था।
1988 तक यह मिल उद्योगपति के निजी स्वामित्व में रही : फरेंदा में स्थित मिल परिसर 33 एकड़, चेहरी में 624 एकड़, बागापार में 105 एकड़ भूमि, सिधवारी फरेंदा में डेढ़ एकड़ भूमि कम्हरिया खुर्द में 16 एकड़ भूमि व मथुरानगर में डेढ़ एकड़ आफिसियल लिक्विडेटर की देख रेख में हैं।

दिसंबर 1917 से हाईकोर्ट के निर्देशन में राष्ट्रीय वस्त्र निगम के नाम से दर्ज सभी संपत्तियों की निगरानी शासकीय समापक (आफिसियल लिक्विडेटर) द्वारा की जा रही है। 1988 तक यह मिल उद्योगपति के निजी स्वामित्व में रही। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कंपनी का 98 प्रतिशत भारत सरकार के उपक्रम एनटीसी के अधीन हो जाने के बाद मिल सरकारी कंपनी के रूप में स्थापित हो गई। फरवरी 1994 में बैंक गारंटी न देने के कारण उत्पादन बंद हो गई।
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