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गर्मी शुरू, लाखों पौधों के सूखने का खतरा बढ़ा
Updated Thu, 29 Mar 2018 11:46 PM IST
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महराजगंज। जिले में जंगल को हरा भरा करने के लिए रोपे गए लाखों पौधे की सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है। विभाग ने केवल कुछ पौधे के सिंचाई की व्यवस्था कर इतिश्री कर ली है। वहीं जंगलों में लगे लाखों पौधे को यूं ही भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। इन हालात में रोपित कोमल पौधे पूरे सीजन भर जद्दोजहद करते नजर आएंगे।
महराजगंज जिला वन संपदा के मामले में काफी समृद्ध है। वन क्षेत्र को ध्यान में रखकर शासन की ओर से इसके खाली क्षेत्र में हर साल विभिन्न योजना से पौधारोपण कराया है। सड़क के किनारे तो पौधे लगवाए ही गए हैं। वही हरित पट्टी भी विकसित की जा रही है। बीते साल विभिन्न स्थानों पर कुल 48 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधे रोपे गए। 282 हेक्टेयर भूमी पर सामान्य पौधरोपण में करीब तीन लाख पौधे लगाए गए हैं। अब गर्मी का मौसम शुरू हो गया है तो पौधों की सिंचाई की समस्या खड़ी होने लगी है। विभागीय अफसरों ने सुविधा के आधार पर टैंकर से सिंचाई शुरू कर दी है। वहीं हरित पट्टी के सिंचाई का इंतजाम है। लेकिन सामान्य पौधरोपण के सिंचाई पर विभाग की ओर से कुछ खास इंतजाम नहीं किया गया है। यही हाल बना रहा तो रोपित हुए लाखों पौधों को बचाना मुश्किल हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि छोटे पौधों की यदि समय से सिंचाई नहीं की जाए तो न केवल उनका विकास रूक जाता है। बल्कि पौधे मरने की संभावना है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि सामान्य पौधरोपण में सिंचाई के लिए आस पास के लोगों से बोरिंग के माध्यम से सिंचाई के लिए कहा गया है। वहीं सड़क व हरी पत्तियों के पौधे के सिंचाई के लिए टैंकर की व्यवस्था की गई है, जिससे इन पौधों की सिंचाई होती है। जरूरत पडे़गी तो और टैंकर मंगाए जाएंगे।
महराजगंज जिला वन संपदा के मामले में काफी समृद्ध है। वन क्षेत्र को ध्यान में रखकर शासन की ओर से इसके खाली क्षेत्र में हर साल विभिन्न योजना से पौधारोपण कराया है। सड़क के किनारे तो पौधे लगवाए ही गए हैं। वही हरित पट्टी भी विकसित की जा रही है। बीते साल विभिन्न स्थानों पर कुल 48 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधे रोपे गए। 282 हेक्टेयर भूमी पर सामान्य पौधरोपण में करीब तीन लाख पौधे लगाए गए हैं। अब गर्मी का मौसम शुरू हो गया है तो पौधों की सिंचाई की समस्या खड़ी होने लगी है। विभागीय अफसरों ने सुविधा के आधार पर टैंकर से सिंचाई शुरू कर दी है। वहीं हरित पट्टी के सिंचाई का इंतजाम है। लेकिन सामान्य पौधरोपण के सिंचाई पर विभाग की ओर से कुछ खास इंतजाम नहीं किया गया है। यही हाल बना रहा तो रोपित हुए लाखों पौधों को बचाना मुश्किल हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि छोटे पौधों की यदि समय से सिंचाई नहीं की जाए तो न केवल उनका विकास रूक जाता है। बल्कि पौधे मरने की संभावना है। डीएफओ मनीष सिंह ने बताया कि सामान्य पौधरोपण में सिंचाई के लिए आस पास के लोगों से बोरिंग के माध्यम से सिंचाई के लिए कहा गया है। वहीं सड़क व हरी पत्तियों के पौधे के सिंचाई के लिए टैंकर की व्यवस्था की गई है, जिससे इन पौधों की सिंचाई होती है। जरूरत पडे़गी तो और टैंकर मंगाए जाएंगे।
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