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धर्मस्थल पर लाउडस्पीकर के लिए 713 ने मांगी अनुमति
महराजगंज (ब्यूूूराो)
Updated Wed, 17 Jan 2018 06:15 PM IST
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महराजगंज। धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर बजाने के लिए जिले के 713 लोगों ने प्रशासन से अनुमति लेने के लिए आवेदन किया है। अनुमति लेने के लिए आखिरी दिन 22 जनवरी है। इसके बाद किसी धार्मिक स्थल पर बिना अनुमति लाउडस्पीकर बजाने पर कार्रवाई होगी।
हाइकोर्ट के आदेश के बाद धार्मिक स्थलों पर नियमित बजने वाले लाउडस्पीकर को लेकर प्रशासन गंभीर हो गया है। निर्धारित तिथि के बाद धार्मिक स्थलों को चिन्हित किया जाएगा। अगर बगैर अनुमति के लाउडस्पीकर बजते मिलेंगे तो कार्रवाई होगी। रात के 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर बैन किया गया है। मंगलवार को अनुमति लेने के लिए सदर एसडीएम कार्यालय पर लोगों की भीड़ लगी रही। जिले के चारों तहसीलों में अनुमति लेने के लिए कुल 713 आवेदन आ चुके हैं। फरेंदा में 150, निचलौल में 175, नौतनवां में 80 और सबसे ज्यादा सदर तहासील में 308 आवेदन आ चुके हैं। सबसे कम आवेदन नौतनवां तहसील में आए हैं। एडीएम आरपी कश्यप ने बताया कि आवेदन के लिए आखिरी तिथि 22 जनवरी है। इसके बाद जांच की जाएगी। अगर कोई बगैर आदेश लाउडस्पीकर बजाएगा तो कार्रवाई होना तय है।
एडीएम आरपी कश्यप ने बताया कि शासन ने साफ निर्देश दिया है कि जहां लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्र लगाने की अनुमति ली जाए, वहां भी ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के अंतर्गत क्षेत्र और समय के मुताबिक निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन किया जाए। नियम न मानने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। शादी, समारोह और जुलूस के दौरान भी इसका पालन कराया जाए। बिना अनुमति लाउडस्पीकर बजाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। पर्यावरण संरक्षण 1986 अधिनियम की धारा 15 के तहत यह दंडनीय अपराध है। इसका उल्लंघन करने पर पांच साल की सजा या एक लाख रुपये अर्थदंड या दोनों एक साथ हो सकता है। इसके तहत हर दिन उल्लंघन करने पर 5 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना अलग से है।
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ध्वनि प्रदूषण नियमन एवं नियंत्रण नियम 2000 में यह प्रावधान है कि ऑडिटोरियम, कांफ्रेंस रूम, कम्युनिटी हाल जैसे बंद स्थानों को छोड़कर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया जाएगा। हालांकि राज्य सरकार को यह छूट है कि एक साल में अधिकतम 15 दिन के लिए सांस्कृतिक या धार्मिक कार्य के लिए रात्रि 10 बजे से 12 बजे तक शर्तों के आधार पर छूट दे सकती है।
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हाइकोर्ट के आदेश के बाद धार्मिक स्थलों पर नियमित बजने वाले लाउडस्पीकर को लेकर प्रशासन गंभीर हो गया है। निर्धारित तिथि के बाद धार्मिक स्थलों को चिन्हित किया जाएगा। अगर बगैर अनुमति के लाउडस्पीकर बजते मिलेंगे तो कार्रवाई होगी। रात के 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर बैन किया गया है। मंगलवार को अनुमति लेने के लिए सदर एसडीएम कार्यालय पर लोगों की भीड़ लगी रही। जिले के चारों तहसीलों में अनुमति लेने के लिए कुल 713 आवेदन आ चुके हैं। फरेंदा में 150, निचलौल में 175, नौतनवां में 80 और सबसे ज्यादा सदर तहासील में 308 आवेदन आ चुके हैं। सबसे कम आवेदन नौतनवां तहसील में आए हैं। एडीएम आरपी कश्यप ने बताया कि आवेदन के लिए आखिरी तिथि 22 जनवरी है। इसके बाद जांच की जाएगी। अगर कोई बगैर आदेश लाउडस्पीकर बजाएगा तो कार्रवाई होना तय है।
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एडीएम आरपी कश्यप ने बताया कि शासन ने साफ निर्देश दिया है कि जहां लाउडस्पीकर या अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्र लगाने की अनुमति ली जाए, वहां भी ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 के अंतर्गत क्षेत्र और समय के मुताबिक निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन किया जाए। नियम न मानने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। शादी, समारोह और जुलूस के दौरान भी इसका पालन कराया जाए। बिना अनुमति लाउडस्पीकर बजाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। पर्यावरण संरक्षण 1986 अधिनियम की धारा 15 के तहत यह दंडनीय अपराध है। इसका उल्लंघन करने पर पांच साल की सजा या एक लाख रुपये अर्थदंड या दोनों एक साथ हो सकता है। इसके तहत हर दिन उल्लंघन करने पर 5 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना अलग से है।
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ध्वनि प्रदूषण नियमन एवं नियंत्रण नियम 2000 में यह प्रावधान है कि ऑडिटोरियम, कांफ्रेंस रूम, कम्युनिटी हाल जैसे बंद स्थानों को छोड़कर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर का प्रयोग नहीं किया जाएगा। हालांकि राज्य सरकार को यह छूट है कि एक साल में अधिकतम 15 दिन के लिए सांस्कृतिक या धार्मिक कार्य के लिए रात्रि 10 बजे से 12 बजे तक शर्तों के आधार पर छूट दे सकती है।