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Maharajganj News: एक साल में ब्लैक स्पॉट में गई 60 जान
Sat, 09 Dec 2023 01:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 09 Dec 2023 01:00 AM IST
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भैंसापुल के पास नही बना संकेताक,यही होता हैं दुर्घटना।
महराजगंज। जिले में चिह्नित 28 ब्लैक स्पॉट पर एक साल में करीब 60 मौतें हो चुकी हैं। बावजूद इसके ज्यादातर जगहों पर न तो संकेतक लगे हैं और न ही सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। अवैध कटों पर भी हादसे हो रहे हैं। अब ठंड शुरू हो गई है। कोहरे का असर भी होगा। ऐसे में ब्लैक स्पाट पर खतरा बढ़ा जाएगा। वर्ष 2023 में अब तक 265 मौतें दुर्घटना में हो चुकी हैं।
जानकारी के अनुसार, इस मौसम में कोहरा छाए रहने से सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर हादसे चिह्नित ब्लैक स्पॉट, गड्ढे या फिर तीव्र मोड़ों पर अधिक होते हैं। जिलों में कई ब्लैक स्पॉट पर संकेतक तो लगे हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर लगे संकेतक झाड़ियों में दब गए हैं। महराजगंज जिले में पिछले तीन साल में 668 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। सबसे ज्यादा खतरनाक जिला मुख्यालय मोड़ व धनेवा मोड़ है। इसके अलावा सिंदुरिया, सेमरा चंद्रौली के निकट टी प्वाइंट खतरनाक है। वर्ष 2022 फरेंदा में हुई सड़क दुर्घटना में तीन लोगों की जान चली गई थी।
शुक्रवार को पड़ताल में पता चला की सिंदुरिया थानाक्षेत्र के परसामीर जाने वाली सड़क के मोड़ पर आए दिन दुर्घटना हाेती है, लेकिन यहां कोई संकेतक नहीं लगा है। परसामीर गांव के रामफल ने बताया कि सुरक्षा की बात सिर्फ गोष्ठी रैली तक सिमट कर रह गई है। शासन प्रशासन के साथ-साथ स्वयं भी जागरूक रहने की जरूरत है। अपने प्राणों की रक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए। गोरखपुर रोड भैसा पुल के पास संस्थानों को बोर्ड दिखा लेकिन संकेतक लगा बोर्ड नजर नहीं आया।
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पुल से गुजर रहे एक निजी कंपनी के सेल्समैन धीरेंद्र राजपूत मिले। उन्होंने बताया कि इस रूट से अक्सर जाता हूं। बीते सप्ताह एक व्यक्ति बाइक लेकर गिरा हुआ था, दर्द से करार रहा था, कुछ देर रूका लोगों की मदद से उसे अस्पताल भिजवाया गया। पुल से गुजरने के दौरान अक्सर घायल मिल जाते हैं। भिटौली पुल के पास भी दुर्घटना होती रहती है, लेकिन यहां भी कोई संकेतक नजर नहीं आया। पुलिस बैरिंकेडिंग लगा हुआ था। यही हाल घुघली-सिसवा मार्ग स्थित बंदी ढाला चौकी पर रहा। पास से गुजर रहे बंदी ढाला के राधेश्याम ने बताया कि संकेत यहां कभी लगा हुआ दिखा ही नहीं। दुर्घटना तो इस क्षेत्र में अक्सर होती रहती है। सरकारी दावे और हकीकत में बहुत फासला है।
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जानकारी के अनुसार, इस मौसम में कोहरा छाए रहने से सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादातर हादसे चिह्नित ब्लैक स्पॉट, गड्ढे या फिर तीव्र मोड़ों पर अधिक होते हैं। जिलों में कई ब्लैक स्पॉट पर संकेतक तो लगे हैं, लेकिन कुछ स्थानों पर लगे संकेतक झाड़ियों में दब गए हैं। महराजगंज जिले में पिछले तीन साल में 668 लोग अपनी जान गवां चुके हैं। सबसे ज्यादा खतरनाक जिला मुख्यालय मोड़ व धनेवा मोड़ है। इसके अलावा सिंदुरिया, सेमरा चंद्रौली के निकट टी प्वाइंट खतरनाक है। वर्ष 2022 फरेंदा में हुई सड़क दुर्घटना में तीन लोगों की जान चली गई थी।
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शुक्रवार को पड़ताल में पता चला की सिंदुरिया थानाक्षेत्र के परसामीर जाने वाली सड़क के मोड़ पर आए दिन दुर्घटना हाेती है, लेकिन यहां कोई संकेतक नहीं लगा है। परसामीर गांव के रामफल ने बताया कि सुरक्षा की बात सिर्फ गोष्ठी रैली तक सिमट कर रह गई है। शासन प्रशासन के साथ-साथ स्वयं भी जागरूक रहने की जरूरत है। अपने प्राणों की रक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए। गोरखपुर रोड भैसा पुल के पास संस्थानों को बोर्ड दिखा लेकिन संकेतक लगा बोर्ड नजर नहीं आया।
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पुल से गुजर रहे एक निजी कंपनी के सेल्समैन धीरेंद्र राजपूत मिले। उन्होंने बताया कि इस रूट से अक्सर जाता हूं। बीते सप्ताह एक व्यक्ति बाइक लेकर गिरा हुआ था, दर्द से करार रहा था, कुछ देर रूका लोगों की मदद से उसे अस्पताल भिजवाया गया। पुल से गुजरने के दौरान अक्सर घायल मिल जाते हैं। भिटौली पुल के पास भी दुर्घटना होती रहती है, लेकिन यहां भी कोई संकेतक नजर नहीं आया। पुलिस बैरिंकेडिंग लगा हुआ था। यही हाल घुघली-सिसवा मार्ग स्थित बंदी ढाला चौकी पर रहा। पास से गुजर रहे बंदी ढाला के राधेश्याम ने बताया कि संकेत यहां कभी लगा हुआ दिखा ही नहीं। दुर्घटना तो इस क्षेत्र में अक्सर होती रहती है। सरकारी दावे और हकीकत में बहुत फासला है।