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Maharajganj News: रोपे थे 25 लाख पौधे...रखरखाव के अभाव में अधिकतर सूखे
Thu, 06 Jun 2024 04:29 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 06 Jun 2024 04:29 AM IST
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मैघौली खुर्द गांव स्थित पिजौया पोखरे के तटबंध पर लगे पौधे नहीं दिख रहे।
महराजगंज/निचलौल। धरा को हरा भरा रखने और पर्यावरण संतुलन के उद्देश्य से पौधारोपण कर जिम्मेदारों की ओर से हर वर्ष बरसात के मौसम में जागरूकता तो दिखाई जाती है, लेकिन रखरखाव के अभाव में यह पौधे सूख जाते हैं। पिछले वर्ष जिले में करीब 25 लाख पौधे लगाए गए थे। इनमें से ज्यादातर पौधे जमीन पर दिख ही नहीं रहे है। पड़ताल में जमीन तो दिखाई दी, लेकिन पौधे नहीं मिले। इस वर्ष भी बरसात के मौसम में पौधारोपण करने के लिए जिम्मेदारों की बड़ी तैयारियां चल रही हैं।
वन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस वर्ष वन विभाग की ओर से जिले में करीब 19 लाख पौधे रोपे जाने हैं। इन पौधों को तैयार करने में विभाग के जिम्मेदार तेज गति से कार्य भी कर रहे है, लेकिन सवाल यह उठता है, कि पौधारोपण के बाद इनमें से कितने पौधे अपना अस्तित्व बचा पाएंगे। ऐसी भी आशंका जताई जा रही है कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी पौधरोपण अभियान कहीं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर सिर्फ कागजों में सिमटकर तो नहीं रह जाएगा।
बुधवार को पड़ताल के वक्त मिले मुनेसर गुप्ता, कामेश्वर प्रजापति, निलेश राव आदि ने कहा की पिछले करीब पांच वर्षों में हुए पौधारोपण अभियान की स्थिति तो यही बयां कर रही है कि इसमें शासकीय धन की काफी बर्बादी हुई है। क्योंकि पौधरोपण वाली जमीन तो दिख रही है लेकिन पौधे नहीं दिख रहे हैं। सुरक्षा इंतजामों के बगैर पौधरोपण कार्यक्रम महज औपचारिकता तक ही सीमित रह जाते हैं। देखा जाए तो गत वर्षों में पौधरोपण तो व्यापक स्तर पर हुए, लेकिन पौधों की सुरक्षा के लिए आने वाले बजट का बंदरबांट हो गया। इससे अधिकांश पौधे समुचित देखरेख के अभाव में नष्ट हो गए। हर साल यही प्रक्रिया परंपरागत रूप से सतत चल रही है।
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वन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस वर्ष वन विभाग की ओर से जिले में करीब 19 लाख पौधे रोपे जाने हैं। इन पौधों को तैयार करने में विभाग के जिम्मेदार तेज गति से कार्य भी कर रहे है, लेकिन सवाल यह उठता है, कि पौधारोपण के बाद इनमें से कितने पौधे अपना अस्तित्व बचा पाएंगे। ऐसी भी आशंका जताई जा रही है कि पिछले वर्षों की तरह इस बार भी पौधरोपण अभियान कहीं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर सिर्फ कागजों में सिमटकर तो नहीं रह जाएगा।
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बुधवार को पड़ताल के वक्त मिले मुनेसर गुप्ता, कामेश्वर प्रजापति, निलेश राव आदि ने कहा की पिछले करीब पांच वर्षों में हुए पौधारोपण अभियान की स्थिति तो यही बयां कर रही है कि इसमें शासकीय धन की काफी बर्बादी हुई है। क्योंकि पौधरोपण वाली जमीन तो दिख रही है लेकिन पौधे नहीं दिख रहे हैं। सुरक्षा इंतजामों के बगैर पौधरोपण कार्यक्रम महज औपचारिकता तक ही सीमित रह जाते हैं। देखा जाए तो गत वर्षों में पौधरोपण तो व्यापक स्तर पर हुए, लेकिन पौधों की सुरक्षा के लिए आने वाले बजट का बंदरबांट हो गया। इससे अधिकांश पौधे समुचित देखरेख के अभाव में नष्ट हो गए। हर साल यही प्रक्रिया परंपरागत रूप से सतत चल रही है।
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