{"_id":"59a315534f1c1b1c0b8b49f5","slug":"191503860051-maharajganj-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मैंरूंड गांव ननकुजोत में बेहद मुश्किल से मिल रहा दो वक्त का निवाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मैंरूंड गांव ननकुजोत में बेहद मुश्किल से मिल रहा दो वक्त का निवाला
Updated Mon, 28 Aug 2017 12:24 AM IST
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महराजगंज। जिले में बाढ़ ने तबाही की ऐसी इबारत लिखी है कि लोग भूल नहीं पा रहे हैं। अब भी 47 गांव जलमग्न बताए जा रहे हैं। इनमें धानी ब्लॉक का ननकुजोत भी है। धानी ब्लाक से आठ किमी दुर्गम रास्तों से चलकर यहां पहुंचना पड़ता है। वनदेइया बांध टूटने से इस इलाके में बाढ़ का तांडव शुरू हुआ था। बाढ़ में सबकुछ गवां चुके यहां के लोगों को दो वक्त का निवाला भी मुश्किल से मिल रहा है। मवेशियों के लिए चारे की समस्या है। शौच के लिए भी नांव से जाना पड़ रहा है।
पकडियहवां रोड के पास पानी थोड़ा कम था। नाव में सवार बच्चों समेत करीब 10 लोग आते दिखे। ये सभी पानी से घिरे सौरहां गांव से आ रहे थे। जरूरत का सामान गांव तक नहीं पहुंच पा रहा है। लोग धानी कस्बे में जरूरत का सामने ला रहे है। नाव को श्रीराम और मंते किनारे लगाते हुए बोले इस बार तो तबाही कुछ ज्यादा है। चमेली अपने बेटे कन्हई और खुशबू के साथ नाव से उतरते हुए बोली कि घर में राशन नहीं है। बाजार से राशन खरीदने जा रही हूं। किरन अपने बेटे मोहन और बेटी रिंकी को साथ लेकर धानी जा रही थी। इन्हें भी कुछ जरूरी सामान खरीदना था। नाव से उतरने के बाद मोहन, गंगारराम और रंजित ने समस्याओं का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासनिक मदद के दावे फेल हैं। राहत सामग्री नहीं मिल रही है। स्वयं जुगाड़ करना पड़ रहा है। यहां से रोड पर लगे करीब दो फीट पानी से होते हुए ढोढ़घाट पहुंचने पर पीएसी के जवान मिले। यहां जवान क्षेत्र में बचाव राहत कार्य में जुटे हैं। उन्हें भी दिक्कत है, मगर लोगों की दुश्वारियों को देख वह सभी अपनी दिक्कतों को भूल गए हैं। हर रोज चुनौतियों का सामना करते हुए लोगों की मदद करना जवानों की दिनचर्या है।
प्लाटून कमांडर अमित कुमार के सहयोगी जवान विनोद, सर्वेश, जसवीर, ओमप्रकाश, देवेंद्र जिंदल समेत अन्य ग्रूप में अलग-अलग क्षेत्र में पहुंचकर सेवा देते हैं। पीएसी जवानों से बातचीत में ननकुजोत से रामबचन ने मदद के लिए फोन किया तो तुरंत प्लाटून कमांडर अमित कुमार के साथ जवान ननकुजोत के लिए चल पडे़। गांव में सबसे पहले पानी से घिरा शिवमूरत का घर दिखा। पास में बलिराम, रामकेवल, रामकेश और प्रेम चंद के घर में पानी लगा था। स्टीमर को गांव के रामबचन किनारे लगाते हुए बोले, साहब! श्रीराम के मवेशी के लिए चारा खत्म हो गया है। उसके लिए चारे की व्यवस्था करनी है। प्लाटून कमांडर अमित कुमार ने तुरंत हामी भरी और बोले कि साथ चलिए चारा लेकर आइए। श्रीराम के घर के पास नल पानी डूबा रहा। इनके घर से आगे बढ़ने पर गली से होकर कीचड़ से होते हुए जाने पर अनिल का घर मिला। इनकी पत्नी माया बोली की दो दिन पति की तबीयत खराब रही। धानी में डाक्टर से दिखाकर बुखार की दवा ली तो कुछ आराम मिला है। पास में बैठी कौशिल्या बोली कि गांव में एक बार स्वास्थ्य टीम आई थी लेकिन उस दवा से कुछ फायदा होने वाला नहीं है। यहां से आगे बढने पर विश्वनाथ का घर पानी से घिरा मिला। यह गांव में दूसरे के घर में रहते हैं। बोले कि किसी तरह जुगाड़ से लकड़ी का इंतजाम किया गया है तो दो वक्त की रोटी मिल रही है। स्वयं ही सामान खरीद कर लाना पड़ता है। यहां से आगे बढ़ने पर अर्जुन अपने घर के पास दिखे। इनका भूसा बाढ़ में बह गया है। बृजमनगंज ससुराल से भूसा नाव से लाया। तब जाकर मवेशी जिंदा हैं।
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ज्ञानमती व सोमना देवी ने कहा कि परेशानी है लेकिन किसी तरह जीवन गुजारना ही पडे़गा। जो मदद मिल रही है, वह पर्याप्त नहीं है। स्वयं व्यवस्था कर घर गृहस्थी चल रही है। तारकेश्वर बोले कि गांव में शौच की दिक्कत है। शौचालय पानी में डूबा है। ढोढ़घाट तक शौच के लिए नाव से जाना पड़ता है। परेशानी बहुत है मगर क्या किया जाए। बाढ़ का प्रभाव घटने का इंतजार किया जा रहा है। तारकेश्वर ने कहा कि मवेशियों को एक शुभचिंतक के वहां करमहां भेज दिया हूं। गांव के उत्तर तरफ बुजुर्ग महिला प्रेमा की झोपड़ी दिखी किनारे तक पानी रहा। इनकी नतिनी सुधा वहां मिली। झोपड़ी का कुछ हिस्सा गिर चुका है। थोड़ी दूरी पर श्रीमती मिली। वह बर्तन धो रही थीं बोलीं-प्रशासन की ओर से मदद का सिर्फ दिखावा किया जा रहा है। जरूरत की राहत सामग्री नहीं मिली। गुजर-बसर मुश्किल हो गया है। यह बात कर ही रही थी कि पीएसी के प्लाटून कमांडर अमित कुमार ने चलने का इशारा किया। उन्हें किसी और गांव में लोगों की मदद के लिए जाना था। स्टीमर को किनारे पर लाकर रामबचन बोले राम-राम साहब, जरूरत पड़ी तो फिर याद करूंगा। इतने में अमित कुमार मुस्कुराए और स्टीमर में सभी के साथ बैठकर चल दिए।
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पकडियहवां रोड के पास पानी थोड़ा कम था। नाव में सवार बच्चों समेत करीब 10 लोग आते दिखे। ये सभी पानी से घिरे सौरहां गांव से आ रहे थे। जरूरत का सामान गांव तक नहीं पहुंच पा रहा है। लोग धानी कस्बे में जरूरत का सामने ला रहे है। नाव को श्रीराम और मंते किनारे लगाते हुए बोले इस बार तो तबाही कुछ ज्यादा है। चमेली अपने बेटे कन्हई और खुशबू के साथ नाव से उतरते हुए बोली कि घर में राशन नहीं है। बाजार से राशन खरीदने जा रही हूं। किरन अपने बेटे मोहन और बेटी रिंकी को साथ लेकर धानी जा रही थी। इन्हें भी कुछ जरूरी सामान खरीदना था। नाव से उतरने के बाद मोहन, गंगारराम और रंजित ने समस्याओं का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासनिक मदद के दावे फेल हैं। राहत सामग्री नहीं मिल रही है। स्वयं जुगाड़ करना पड़ रहा है। यहां से रोड पर लगे करीब दो फीट पानी से होते हुए ढोढ़घाट पहुंचने पर पीएसी के जवान मिले। यहां जवान क्षेत्र में बचाव राहत कार्य में जुटे हैं। उन्हें भी दिक्कत है, मगर लोगों की दुश्वारियों को देख वह सभी अपनी दिक्कतों को भूल गए हैं। हर रोज चुनौतियों का सामना करते हुए लोगों की मदद करना जवानों की दिनचर्या है।
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प्लाटून कमांडर अमित कुमार के सहयोगी जवान विनोद, सर्वेश, जसवीर, ओमप्रकाश, देवेंद्र जिंदल समेत अन्य ग्रूप में अलग-अलग क्षेत्र में पहुंचकर सेवा देते हैं। पीएसी जवानों से बातचीत में ननकुजोत से रामबचन ने मदद के लिए फोन किया तो तुरंत प्लाटून कमांडर अमित कुमार के साथ जवान ननकुजोत के लिए चल पडे़। गांव में सबसे पहले पानी से घिरा शिवमूरत का घर दिखा। पास में बलिराम, रामकेवल, रामकेश और प्रेम चंद के घर में पानी लगा था। स्टीमर को गांव के रामबचन किनारे लगाते हुए बोले, साहब! श्रीराम के मवेशी के लिए चारा खत्म हो गया है। उसके लिए चारे की व्यवस्था करनी है। प्लाटून कमांडर अमित कुमार ने तुरंत हामी भरी और बोले कि साथ चलिए चारा लेकर आइए। श्रीराम के घर के पास नल पानी डूबा रहा। इनके घर से आगे बढ़ने पर गली से होकर कीचड़ से होते हुए जाने पर अनिल का घर मिला। इनकी पत्नी माया बोली की दो दिन पति की तबीयत खराब रही। धानी में डाक्टर से दिखाकर बुखार की दवा ली तो कुछ आराम मिला है। पास में बैठी कौशिल्या बोली कि गांव में एक बार स्वास्थ्य टीम आई थी लेकिन उस दवा से कुछ फायदा होने वाला नहीं है। यहां से आगे बढने पर विश्वनाथ का घर पानी से घिरा मिला। यह गांव में दूसरे के घर में रहते हैं। बोले कि किसी तरह जुगाड़ से लकड़ी का इंतजाम किया गया है तो दो वक्त की रोटी मिल रही है। स्वयं ही सामान खरीद कर लाना पड़ता है। यहां से आगे बढ़ने पर अर्जुन अपने घर के पास दिखे। इनका भूसा बाढ़ में बह गया है। बृजमनगंज ससुराल से भूसा नाव से लाया। तब जाकर मवेशी जिंदा हैं।
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ज्ञानमती व सोमना देवी ने कहा कि परेशानी है लेकिन किसी तरह जीवन गुजारना ही पडे़गा। जो मदद मिल रही है, वह पर्याप्त नहीं है। स्वयं व्यवस्था कर घर गृहस्थी चल रही है। तारकेश्वर बोले कि गांव में शौच की दिक्कत है। शौचालय पानी में डूबा है। ढोढ़घाट तक शौच के लिए नाव से जाना पड़ता है। परेशानी बहुत है मगर क्या किया जाए। बाढ़ का प्रभाव घटने का इंतजार किया जा रहा है। तारकेश्वर ने कहा कि मवेशियों को एक शुभचिंतक के वहां करमहां भेज दिया हूं। गांव के उत्तर तरफ बुजुर्ग महिला प्रेमा की झोपड़ी दिखी किनारे तक पानी रहा। इनकी नतिनी सुधा वहां मिली। झोपड़ी का कुछ हिस्सा गिर चुका है। थोड़ी दूरी पर श्रीमती मिली। वह बर्तन धो रही थीं बोलीं-प्रशासन की ओर से मदद का सिर्फ दिखावा किया जा रहा है। जरूरत की राहत सामग्री नहीं मिली। गुजर-बसर मुश्किल हो गया है। यह बात कर ही रही थी कि पीएसी के प्लाटून कमांडर अमित कुमार ने चलने का इशारा किया। उन्हें किसी और गांव में लोगों की मदद के लिए जाना था। स्टीमर को किनारे पर लाकर रामबचन बोले राम-राम साहब, जरूरत पड़ी तो फिर याद करूंगा। इतने में अमित कुमार मुस्कुराए और स्टीमर में सभी के साथ बैठकर चल दिए।