{"_id":"59651f984f1c1beb058b46eb","slug":"191499799448-maharajganj-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एईएस की चपेट में आने से चार मासूम जिला अस्पताल में भर्ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एईएस की चपेट में आने से चार मासूम जिला अस्पताल में भर्ती
Updated Wed, 12 Jul 2017 12:27 AM IST
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महराजगंज। बरसात के मौसम में संक्रामक रोगों ने दस्तक दे दी है। इसी के साथ एईएस के मरीज बढ़ने लगे हैं। एईएस की चपेट में आए चार मासूमों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एईएस के मरीज बढ़ने से जिला अस्पताल प्रशासन सतर्क हो चुका है। एईएस पीड़ित बच्चों के गांवों में साफ-सफाई के अभाव के साथ ही पीने के स्वच्छ पानी का संकट है।
मंगलवार को जिला अस्पताल के जेई-एईएस वार्ड में चार मासूम भर्ती मिले। डॉक्टरों ने बताया कि चार मासूम एईएस से प्रभावित हैं। उनका इलाज चल रहा है। इसके इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम वार्ड में तैनात की गई है। सिसवा सीएचसी से रेफर होकर आए अमित उम्र 8 साल, पनियरा क्षेत्र के लक्ष्मीपुर देउरवा गांव से यशवंत उम्र 10 वर्ष, बरातगाडा गांव से शशिकला (12) और मिठौरा गांव से तीन वर्षीय अरूण भर्ती हुए हैं। इन सभी का इलाज चल रहा है। ये सभी बच्चे एईएस से प्रभावित हैं। जेई-एईएस वार्ड में भर्ती मरीजों की देखभाल के लिए खास इंतजाम किया गया है। शिफ्टवार कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा डॉक्टरों की टीम वार्ड की निगरानी कर रही है।
डॉ. राकेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शुद्ध जल का सेवन करे। अगर बुखार हो तो तुरंत पट्टी करें। इसके बाद डॉक्टर के पास ले जाएं। खानपान पर विशेष ध्यान दें। बासी भोजन का प्रयोग न करें। साथ ही खुले खाद्य पदार्थ बच्चों को न दें। इससे संक्रमण का खतरा रहता है।
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अस्पताल में एईएस प्रभावित बच्चों के इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम लगाई गई है। इलाज के दौरान लापरवाही हुई तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगा। जो संसाधन उपलब्ध है, उसमें बेहतर स्वस्थ सुविधा देने का प्रयास जारी है।
डा. आर.बी.राम सीएमएस, जिला अस्पताल, महराजगंज
एईएस प्रभावित गांव में नहीं है साफ सफाई
महराजगंज। जिला अस्पताल में भर्ती एईएस प्रभावित चारों बच्चों के गांवों में साफ सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। हैंडपंप भी ठीक हालत में नहीं हैं। पनियरा क्षेत्र के लक्ष्मीपुर देउरवा, बरातगाडा और मिठौरा गांवों में जहां-तहां कूड़े कचरे लगे हैं। जाम नाली के कारण रोड पर पानी है। पेयजल की भी परेशानी है। गांव के तमाम हैंडपंप पीने लायक पानी नहीं दे रहे हैं। एईएस के संक्रमण को देखते हुए संबधित गांव के लोग परेशान हैं
सीएसओ डॉ. आरके तिवारी ने कहा कि एईएस प्रभावित गांवों में फॉगिंग और छिड़काव करा दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मियों की टीम संबंधित गांव में भेजी जाएगी।
संक्रमण के खतरे से बेखबर
मंगलवार को जिला अस्पताल के ईसीजी कक्ष में एक कर्मी सोता नजर आया। जेई-एईएस वार्ड के पास गली में एक तीमारदार भी सो रहे थे। उनके पास एक बच्चा भी सोया था। थोड़ी दूरी पर जेई-एईएस वार्ड के गेट के पास एक महिला बैठी रही। पास में एक मासूम फर्श पर सोया रहा। संक्रमण के खतरे से बेखबर मां ने मासूम को फर्श पर ही आराम से लिटा दिया।
इंसेफेलाइटिस से बालिका की मौत
मिठौरा। सदर कोतवाली थानाक्षेत्र के ग्राम सभा परसा चक गोबरही में चार वर्षीय बालिका की मंगलवार को इंसेफेलाइटिस से मौत हो गई। परसा चक गोबरही में शाह तबरेज की चार वर्षीया पुत्री रोशनी जो जून महीने में झटके और तेज बुखार आने के कारण परिजनों ने जिला संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया था।पहली में बार पांच दिन इलाज कराने के बाद घर वापस आयी थी दुबारा झटके आने पर सात दिन भर्ती थी। उसके बाद तबीयत बिगड़ने पर गोरखपुर में प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल था। तीन दिन पहले रोशनी को लेकर घर आ गए थे। मंगलवार की सुबह उसकी मौत हो गई। पांच वर्ष पहले भी शाह तबरेज की पहली संतान की भी इंसेफेलाइटिस से मौत हो गई थी।
पांच सौ पचास की जनसंख्या वाले परसा चक गोबरही में सात इंडिया मार्र्क हैंडपंप हैं, लेकिन किसी का पानी पीने लायक नहीं है। एक हैंडपंप खराब है, बाकी हैंडपंप से दूषित पानी निकलता है। ग्रामसभा में नालियों की स्थिति ठीक है। ग्राम सभा की नालियां ढकी गई हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। गांव वाले बताते हैं कि गांव में तैनात सफाई कर्मी सफाई को लेकर गंभीर नहीं रहता है।
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मंगलवार को जिला अस्पताल के जेई-एईएस वार्ड में चार मासूम भर्ती मिले। डॉक्टरों ने बताया कि चार मासूम एईएस से प्रभावित हैं। उनका इलाज चल रहा है। इसके इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम वार्ड में तैनात की गई है। सिसवा सीएचसी से रेफर होकर आए अमित उम्र 8 साल, पनियरा क्षेत्र के लक्ष्मीपुर देउरवा गांव से यशवंत उम्र 10 वर्ष, बरातगाडा गांव से शशिकला (12) और मिठौरा गांव से तीन वर्षीय अरूण भर्ती हुए हैं। इन सभी का इलाज चल रहा है। ये सभी बच्चे एईएस से प्रभावित हैं। जेई-एईएस वार्ड में भर्ती मरीजों की देखभाल के लिए खास इंतजाम किया गया है। शिफ्टवार कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके अलावा डॉक्टरों की टीम वार्ड की निगरानी कर रही है।
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डॉ. राकेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शुद्ध जल का सेवन करे। अगर बुखार हो तो तुरंत पट्टी करें। इसके बाद डॉक्टर के पास ले जाएं। खानपान पर विशेष ध्यान दें। बासी भोजन का प्रयोग न करें। साथ ही खुले खाद्य पदार्थ बच्चों को न दें। इससे संक्रमण का खतरा रहता है।
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अस्पताल में एईएस प्रभावित बच्चों के इलाज के लिए डॉक्टरों की टीम लगाई गई है। इलाज के दौरान लापरवाही हुई तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगा। जो संसाधन उपलब्ध है, उसमें बेहतर स्वस्थ सुविधा देने का प्रयास जारी है।
डा. आर.बी.राम सीएमएस, जिला अस्पताल, महराजगंज
एईएस प्रभावित गांव में नहीं है साफ सफाई
महराजगंज। जिला अस्पताल में भर्ती एईएस प्रभावित चारों बच्चों के गांवों में साफ सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। हैंडपंप भी ठीक हालत में नहीं हैं। पनियरा क्षेत्र के लक्ष्मीपुर देउरवा, बरातगाडा और मिठौरा गांवों में जहां-तहां कूड़े कचरे लगे हैं। जाम नाली के कारण रोड पर पानी है। पेयजल की भी परेशानी है। गांव के तमाम हैंडपंप पीने लायक पानी नहीं दे रहे हैं। एईएस के संक्रमण को देखते हुए संबधित गांव के लोग परेशान हैं
सीएसओ डॉ. आरके तिवारी ने कहा कि एईएस प्रभावित गांवों में फॉगिंग और छिड़काव करा दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से कर्मियों की टीम संबंधित गांव में भेजी जाएगी।
संक्रमण के खतरे से बेखबर
मंगलवार को जिला अस्पताल के ईसीजी कक्ष में एक कर्मी सोता नजर आया। जेई-एईएस वार्ड के पास गली में एक तीमारदार भी सो रहे थे। उनके पास एक बच्चा भी सोया था। थोड़ी दूरी पर जेई-एईएस वार्ड के गेट के पास एक महिला बैठी रही। पास में एक मासूम फर्श पर सोया रहा। संक्रमण के खतरे से बेखबर मां ने मासूम को फर्श पर ही आराम से लिटा दिया।
इंसेफेलाइटिस से बालिका की मौत
मिठौरा। सदर कोतवाली थानाक्षेत्र के ग्राम सभा परसा चक गोबरही में चार वर्षीय बालिका की मंगलवार को इंसेफेलाइटिस से मौत हो गई। परसा चक गोबरही में शाह तबरेज की चार वर्षीया पुत्री रोशनी जो जून महीने में झटके और तेज बुखार आने के कारण परिजनों ने जिला संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया था।पहली में बार पांच दिन इलाज कराने के बाद घर वापस आयी थी दुबारा झटके आने पर सात दिन भर्ती थी। उसके बाद तबीयत बिगड़ने पर गोरखपुर में प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल था। तीन दिन पहले रोशनी को लेकर घर आ गए थे। मंगलवार की सुबह उसकी मौत हो गई। पांच वर्ष पहले भी शाह तबरेज की पहली संतान की भी इंसेफेलाइटिस से मौत हो गई थी।
पांच सौ पचास की जनसंख्या वाले परसा चक गोबरही में सात इंडिया मार्र्क हैंडपंप हैं, लेकिन किसी का पानी पीने लायक नहीं है। एक हैंडपंप खराब है, बाकी हैंडपंप से दूषित पानी निकलता है। ग्रामसभा में नालियों की स्थिति ठीक है। ग्राम सभा की नालियां ढकी गई हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। गांव वाले बताते हैं कि गांव में तैनात सफाई कर्मी सफाई को लेकर गंभीर नहीं रहता है।