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Maharajganj News: 18 वनटांगिया गांव लिख रहे विकास की गाथा, गढ़ रहे प्रतिमान
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वन ग्राम कंपार्ट 24 में निर्मित पूमावि।
2009 के बाद मिला समुदाय को मालिकाना अधिकार
पिछले चुनाव में मतदान अधिकार ने खोली तरक्की की राह
महराजगंज। जनपद के 18 वनटांगियां गांव विकास का प्रतिमान स्थापित कर रहे हैं। बिजली, पानी, आवास, चिकित्सा व शिक्षा जैसी मूल आवश्यकता के संसाधनों ने वनटांगियां समुदाय के लोगों का जीवन आसान किया है। आज उनके बच्चे न सिर्फ बेहतर शिक्षा प्राप्त कर रहे, बल्कि वनटांगियां परिवार जी रामजी (मनरेगा) से रोजगार भी प्राप्त कर रहे हैं।
जनपद की वन बाहुल्यता ने 18 गांव में बसे वनटांगिया समुदाय को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि लंबे समय तक यह गांव न सिर्फ विकास से महरूम रहे बल्कि बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रहे। हक व अधिकार के लिए इस समुदाय ने लंबा संघर्ष किया तब जाकर इन्हें 2017-18 के बाद भूमि का अधिकार मिला। साथ ही 2021 पंचायत चुनाव के पहले इन्हें आसपास की ग्राम पंचायतों से भी जोड़ा गया।
पंचायत चुनाव में मताधिकार के बाद समाप्त हुए लगभग पांच वर्षों में पहले की अपेक्षा अनेक परिवर्तन व विकास हुए हैं, बावजूद अभी कुछ जरूरतें शेष हैं। वनटांगिया समुदाय के लिए संघर्षरत समिति के अध्यक्ष बताते हैं कि पहले की तुलना में विकास कार्य बहुत हुए जिससे समुदाय के लोग सभी सुविधा और सहूलियत प्राप्त कर रहे, लेकिन पूर्ण विकास तब संभव जब इन्हें अलग पंचायत का दर्जा मिले। इसके लिए वनटांगिया विकास समिति का संघर्ष आज भी चल रहा।
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शिक्षा विभाग से लगभग 10 करोड़ खर्च
जनपद के वनटांगिया गांव में सर्वाधिक खर्च बेसिक शिक्षा विभाग से हुए। सदर, निचलौल, पनियरा व फरेंदा ब्लॉक के वनटांगिया गांव में लगभग 10 करोड़ के सर्च से कुल 29 प्राइमरी व पूर्व माध्यमिक स्कूल स्थापित किए गए। इसमें सात करोड़ से अधिक रकम बीते वित्तीय वर्ष 15 स्कूल भवन निर्माण पर खर्च हुए।
कंपार्ट 24 में मुख्य मार्ग का पेंच
पंचायती राज विभाग की तरफ से वनटांगिया गांव के विकास पर 10 करोड़ से अधिक का खर्च किया गया। इसमें खडंजा, इंटरलॉकिंग, नाली, हैंडपंप, एएनएम सेंटर इत्यादि का निर्माण हुआ है। विधवा, वृद्धा, आवास, शौचालय व राशनकार्ड की सहूलियत दी गई। सिर्फ मिठौरा ब्लाॅक का कंपार्ट 24 ही इकलौता वनटांगिया गांव है जो पक्की सड़क से वंचित होने के चलते मानसून सीजन में चार माह आवागमन की दिक्कत झेलते। ऐसा इसलिए क्योंकि महेशपुर व कवेलवा टोला 15 किमी दूर घने जंगल में है जहां तक सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से एनओसी लेने की प्रक्रिया डीएम व सीडीओ की तत्परता से प्रभावी। कंपार्ट 24 की आबादी 700 है। यहां के 300 को शौचालय, 35 को विधवा व 90 को वृद्धावस्था योजना पेंशन मिल रही। गांव में 1200 मीटर इंटरलॉकिंग, 175 मीटर लंबा खड़ंजा, 350 को पांच वर्ष में प्रधानमंत्री आवास व बिजली के अभाव में रोशनी के लिए प्रत्येक घर को सोलर आच्छादित किया गया है।
वनाधिकार कानून ने मजबूत किया हाथ
वनटांगिया विकास समिति के अध्यक्ष जगराम प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2018 में वनटांगिया गांव को राजस्व ग्राम का दर्जा देकर बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा गया। 18 वनटांगिया गांव के निवासियों को वनाधिकार कानून के तहत अधिकार पत्र मिला। जनपद में भारीवैसी, खुर्रमपुर, अचलगढ़, बेलौहा दर्रा, उसरहवा, चेतरा, बेलासपुर, बरहवा, कंपार्ट 27, कंपार्ट 28, दौलतपुर, बीट, कानपुर दर्रा, तिकोनिया, बलुअहिया, हथियहवा व कंपार्ट 24 को निकटत ग्राम पंचायत में समायोजित किया गया। लेकिन वास्तविक विकास अलग ग्राम पंचायत बनाने के बाद ही हो सकता क्योंकि तब हमारी जरूरत के मुताबिक योजना बनाकर उसपर काम होगा। क्योंकि समाज की मुख्य धारा में शामिल ग्राम पंचायत व वनटांगिया गांव की जरूरत अलग- अलग क्योंकि हम लगभग 7 दशक तक मुख्य धारा में शामिल होने से वंचित थे।
2018 में वनों की कटाई व जंगल लगाने के लिए आए वनटांगिया
जवाहर लाल नेहरू स्मारक पीजी काॅलेज के प्राचार्य व समाजशास्त्री प्रोफेसर अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि 1918 में अंग्रेजों ने जिले में साखू का जंगल विकसित करने के लिए भूमिहीनों को बाहर से लाकर बसाया था। यह वर्मा देश की पौध लगाने की पद्धति टांगिया विधि के जानकर थे जिसके कारण इन्हें वनटांगिया नाम मिला। जनपद में यह 18 स्थान पर बसे वहीं गोरखपुर, गोंडा व बलरामपुर में 5-5 गांव इनके हैं। अधिकार मिलने के बाद इनका जीवनस्तर बे तर हुआ।
वर्जन
शासन की सभी योजनाओं का लाभ वनटांगिया समुदाय के लोगों को मिल रहा। पहले की अपेक्षा वनटांगिया के 18 गांव में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर जीरो पावर्टी व अन्य योजना से उपर उठाया गया। शिक्षा, स्वास्थ्य व पेयजल के इंतजाम बेहतर कराए गये हैं।
-श्रेया मिश्रा, डीपीआरओ, महराजगंज
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वनटांगिया समुदाय शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल हैं। वनटांगिया गांव में बीते 5 वर्षों में काफी कुछ बदला है। आगे इनके लिए बेहतर सुविधा सहूलियत की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास जारी रहेंगे।
-महेंद्र कुमार सिंह, सीडीओ, महराजगंज
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पिछले चुनाव में मतदान अधिकार ने खोली तरक्की की राह
महराजगंज। जनपद के 18 वनटांगियां गांव विकास का प्रतिमान स्थापित कर रहे हैं। बिजली, पानी, आवास, चिकित्सा व शिक्षा जैसी मूल आवश्यकता के संसाधनों ने वनटांगियां समुदाय के लोगों का जीवन आसान किया है। आज उनके बच्चे न सिर्फ बेहतर शिक्षा प्राप्त कर रहे, बल्कि वनटांगियां परिवार जी रामजी (मनरेगा) से रोजगार भी प्राप्त कर रहे हैं।
जनपद की वन बाहुल्यता ने 18 गांव में बसे वनटांगिया समुदाय को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि लंबे समय तक यह गांव न सिर्फ विकास से महरूम रहे बल्कि बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रहे। हक व अधिकार के लिए इस समुदाय ने लंबा संघर्ष किया तब जाकर इन्हें 2017-18 के बाद भूमि का अधिकार मिला। साथ ही 2021 पंचायत चुनाव के पहले इन्हें आसपास की ग्राम पंचायतों से भी जोड़ा गया।
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पंचायत चुनाव में मताधिकार के बाद समाप्त हुए लगभग पांच वर्षों में पहले की अपेक्षा अनेक परिवर्तन व विकास हुए हैं, बावजूद अभी कुछ जरूरतें शेष हैं। वनटांगिया समुदाय के लिए संघर्षरत समिति के अध्यक्ष बताते हैं कि पहले की तुलना में विकास कार्य बहुत हुए जिससे समुदाय के लोग सभी सुविधा और सहूलियत प्राप्त कर रहे, लेकिन पूर्ण विकास तब संभव जब इन्हें अलग पंचायत का दर्जा मिले। इसके लिए वनटांगिया विकास समिति का संघर्ष आज भी चल रहा।
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शिक्षा विभाग से लगभग 10 करोड़ खर्च
जनपद के वनटांगिया गांव में सर्वाधिक खर्च बेसिक शिक्षा विभाग से हुए। सदर, निचलौल, पनियरा व फरेंदा ब्लॉक के वनटांगिया गांव में लगभग 10 करोड़ के सर्च से कुल 29 प्राइमरी व पूर्व माध्यमिक स्कूल स्थापित किए गए। इसमें सात करोड़ से अधिक रकम बीते वित्तीय वर्ष 15 स्कूल भवन निर्माण पर खर्च हुए।
कंपार्ट 24 में मुख्य मार्ग का पेंच
पंचायती राज विभाग की तरफ से वनटांगिया गांव के विकास पर 10 करोड़ से अधिक का खर्च किया गया। इसमें खडंजा, इंटरलॉकिंग, नाली, हैंडपंप, एएनएम सेंटर इत्यादि का निर्माण हुआ है। विधवा, वृद्धा, आवास, शौचालय व राशनकार्ड की सहूलियत दी गई। सिर्फ मिठौरा ब्लाॅक का कंपार्ट 24 ही इकलौता वनटांगिया गांव है जो पक्की सड़क से वंचित होने के चलते मानसून सीजन में चार माह आवागमन की दिक्कत झेलते। ऐसा इसलिए क्योंकि महेशपुर व कवेलवा टोला 15 किमी दूर घने जंगल में है जहां तक सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से एनओसी लेने की प्रक्रिया डीएम व सीडीओ की तत्परता से प्रभावी। कंपार्ट 24 की आबादी 700 है। यहां के 300 को शौचालय, 35 को विधवा व 90 को वृद्धावस्था योजना पेंशन मिल रही। गांव में 1200 मीटर इंटरलॉकिंग, 175 मीटर लंबा खड़ंजा, 350 को पांच वर्ष में प्रधानमंत्री आवास व बिजली के अभाव में रोशनी के लिए प्रत्येक घर को सोलर आच्छादित किया गया है।
वनाधिकार कानून ने मजबूत किया हाथ
वनटांगिया विकास समिति के अध्यक्ष जगराम प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2018 में वनटांगिया गांव को राजस्व ग्राम का दर्जा देकर बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा गया। 18 वनटांगिया गांव के निवासियों को वनाधिकार कानून के तहत अधिकार पत्र मिला। जनपद में भारीवैसी, खुर्रमपुर, अचलगढ़, बेलौहा दर्रा, उसरहवा, चेतरा, बेलासपुर, बरहवा, कंपार्ट 27, कंपार्ट 28, दौलतपुर, बीट, कानपुर दर्रा, तिकोनिया, बलुअहिया, हथियहवा व कंपार्ट 24 को निकटत ग्राम पंचायत में समायोजित किया गया। लेकिन वास्तविक विकास अलग ग्राम पंचायत बनाने के बाद ही हो सकता क्योंकि तब हमारी जरूरत के मुताबिक योजना बनाकर उसपर काम होगा। क्योंकि समाज की मुख्य धारा में शामिल ग्राम पंचायत व वनटांगिया गांव की जरूरत अलग- अलग क्योंकि हम लगभग 7 दशक तक मुख्य धारा में शामिल होने से वंचित थे।
2018 में वनों की कटाई व जंगल लगाने के लिए आए वनटांगिया
जवाहर लाल नेहरू स्मारक पीजी काॅलेज के प्राचार्य व समाजशास्त्री प्रोफेसर अजय कुमार मिश्रा ने बताया कि 1918 में अंग्रेजों ने जिले में साखू का जंगल विकसित करने के लिए भूमिहीनों को बाहर से लाकर बसाया था। यह वर्मा देश की पौध लगाने की पद्धति टांगिया विधि के जानकर थे जिसके कारण इन्हें वनटांगिया नाम मिला। जनपद में यह 18 स्थान पर बसे वहीं गोरखपुर, गोंडा व बलरामपुर में 5-5 गांव इनके हैं। अधिकार मिलने के बाद इनका जीवनस्तर बे तर हुआ।
वर्जन
शासन की सभी योजनाओं का लाभ वनटांगिया समुदाय के लोगों को मिल रहा। पहले की अपेक्षा वनटांगिया के 18 गांव में रहने वाले लोगों का जीवन स्तर जीरो पावर्टी व अन्य योजना से उपर उठाया गया। शिक्षा, स्वास्थ्य व पेयजल के इंतजाम बेहतर कराए गये हैं।
-श्रेया मिश्रा, डीपीआरओ, महराजगंज
वनटांगिया समुदाय शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल हैं। वनटांगिया गांव में बीते 5 वर्षों में काफी कुछ बदला है। आगे इनके लिए बेहतर सुविधा सहूलियत की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास जारी रहेंगे।
-महेंद्र कुमार सिंह, सीडीओ, महराजगंज