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Maharajganj News: 11.39 लाख रुपये खर्च, आधी बनी इंटरलॉकिंग सड़क

Mon, 24 Jun 2024 04:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Mon, 24 Jun 2024 04:34 AM IST
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13 hamlets of Tedhi village are deprived of paved road connectivity.
बढ़ैपुरवा गांव के उत्तर सिवान में बनी अधूरी सड़क।
निचलौल। ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत बढ़ैपुरवा गांव में जिम्मेदारों ने 11.39 लाख रुपये खर्च कर दिए हैं, जबकि अभी भी इंटरलॉकिंग सड़क आधी ही बनी है। इसका खुलासा जिम्मेदारों की ओर से निर्माणाधीन सड़क के पास लगे मनरेगा योजना बोर्ड से हुआ है। अधिकारी मामले की जांच करवाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
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बढ़ैपुरवा गांव के सिवान में बनी इंटरलॉकिंग सड़क के पास लगी मनरेगा योजना के बोर्ड के मुताबिक केशव के खेत से उत्तर कब्रिस्तान तक इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण कार्य कराया गया है। उक्त सड़क पर जिम्मेदारों ने 11.39 लाख रुपये का बजट भी खर्च कर दिया है। चार फरवरी 2024 को इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जिसका निर्माण कार्य एक माह बाद चार मार्च को पूर्ण भी हो गया है।
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सड़क निर्माण में लगी सामाग्री पर 10.75 लाख तो दैनिक मजदूरी के हिसाब से मजदूरी पर 0.64 लाख रुपये खर्च हुए हैं, जबकि सड़क का निर्माण कार्य अभी भी आधा ही हुआ है। रविवार को सड़क से होकर गुजर रहे गुडडू, विवेक सहानी, नंदू ने बताया की बोर्ड पर अंकित खर्च हुई रकम और जमीन पर दिख रही इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण जिम्मेदारों के करतूतों की पोल खोल रही है। जिम्मेदारों ने पूरी रकम खर्च कर आधी सड़क का निर्माण कार्य कराया है। जिम्मेदारों ने सरकारी धन का बंदरबांट करने के लिए इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण गांव के बाहर उत्तर सिवान में कराया है।
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अधूरी बनी सड़क एक छोर से टूटने भी लगी है। लोगों ने नाराजगी जताते हुए कहा की विभाग के अधिकारी हर बार जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की बात करते हुए पल्ला झाड़ लेते हैं। क्योंकि सरकारी धन के बंदरबांट में उनका भी सहयोग रहता है। खंड विकास अधिकारी शमा सिंह ने कहा की मामले की जानकारी उन्हें मिली है। अगर ऐसा है, तो जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


चालाकी से होता है इंटरलॉकिंग सड़क में भ्रष्टाचार
विकास विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में बनने वाली इंटरलॉकिंग सड़कों में भ्रष्टाचार जिम्मेदार बड़े ही चालाकी से करते हैं। क्योंकि इसे ऊपर से देखने पर नजर ही नहीं आता। तह में जाने पर भ्रष्टाचार की परत खुलती है तो पता चलता है गिट्टी, सीमेंटेड ईंट की गुणवत्ता में काफी गोलमाल है। पंचायती राज विभाग के ग्रामीण क्षेत्रों में खड़ंजा सड़क निर्माण में धांधली पर पाबंदी लगा दी है। उसके बाद से ही इंटरलॉकिंग सड़कों का निर्माण हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार इंटरलॉकिंग सड़कों के निर्माण में भी इसका विकल्प ढूंढ़ मोटी रकम हजम कर जा रहे हैं।
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