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पत्नी बोली-तीन बेटियों के कातिल को यही सजा मिलनी चाहिए थी, अदालत ने किया इंसाफ
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ललितपुर/बानपुर। तीन बेटियों की हत्या में इकलौते बेटे को दी गई फांसी की सजा सुनते ही घर में छिदामी की 85 वर्षीय मां की आंखों से गम के आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि बेटे की जान बच जाती तो अच्छा रहता। वहीं, छिदामी की पत्नी 32 वर्षीय राजवती ने कहा कि तीन बेटियों के कातिल को यही सजा मिलनी चाहिए थी, अदालत ने इंसाफ किया है।
इस मामले में शुक्रवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) निर्भय प्रकाश ने फैसला सुनाते समय कहा कि तीन बेटियों की अमानवीय तरीके से हत्या की गई, खुद की तीन मासूम बेटियों का मर्डर किया है ये क्षमा योग्य नहीं है। उधर, छिदामी मौत की सजा सुनते ही शांत हो गया। इधर, उसके घर पर सजा की खबर पहुंचते ही बूढ़ी मां फूलबाई की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि बेटियों की हत्या की सजा तो उसे मिलनी थी लेकिन इकलौते बेटे की जान बच जाती तो अच्छा रहता। उन्होंने कहा कि तीन साल में वह केवल एक बार ही बेटे से मिलने जेल गई थीं लेकिन अब तो वह चलने में भी लाचार हो गईं।
शराब ने मेरी दुनिया उजाड़ दी : राजवती
पत्नी राजवती ने कहा कि शराब ने उसकी दुनिया उजाड़ दी। छिदामी के उत्पीड़न और पिटाई से परेशान होकर वह उस वक्त अपनी एक वर्षीय बेटी कविता को लेकर मायके बिल्हारी (दतिया) चली गई थी। 7 वर्षीय बेटी शिवानी को उसकी मौसी डबरई ले गई थी। घर पर तीन बेटियां अंजनी (11), रद्दो (07) एवं पुत्तो (04) को छोड़ गई थी जिसे पति छिदामी ने मार डाला। राजवती ने कहा कि बेटियों के हत्यारे को मौत की सजा मिलनी ही चाहिए थी।
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कमरे में लटका रहता है ताला, खोलती ही बेटियों की याद आ जाती है
तीन साल पहले जिस कमरे में मासूम बेटियों को हथौड़े से कुचलकर मारा गया था उस कमरे में आज भी ताला लटका मिला। पूछने पर राजवती ने कहा कि कमरा अक्सर बंद ही रहता है। वह जब भी इसे खोलती है, बेटियों की यादें ताजा हो जाती है।
पिता को फांसी की सजा होने का बेटियाें पर नहीं दिखा असर
पिता को मौत की सजा दिए जाने के फैसले का उसकी बेटियों पर भी कोई असर नहीं दिखा। बड़ी बेटी शिवानी (10) चौके में चूल्हे पर रोटी बना रही थी। वहीं छोटी बेटी कविता (04) आंगन में खेल रही थी। राजवती ने बताया कि शिवानी गांव के स्कूल में कक्षा चार में पढ़ रही है।
सात एकड़ खेती से चला रही काम
बानपुर। राजवती ने बताया कि घर के गुजारे के लिए सात एकड़ खेती है। उसी की फसल से परिवार का भरण पोषण हो रहा है। उन्होंने बताया कि आय का कोई अन्य स्रोत नहीं होने पर वह खुद मेहनत मजदूरी करती है। अब दो बेटियों और बूढ़ी सास की देखभाल करना ही उसकी प्रमुख जिम्मेदारी है।
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद चिकित्सक की निगरानी में रखा गया
ललितपुर। छिदामी घटना के बाद से ही जेल में बंद चल रहा है। सजा सुनाए जाने का दिन नजदीक आने पर वह कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान चलने लगा था, लेकिन जब शुक्रवार को न्यायालय में उसे फांसी की सजा सुनाई तो वह कुछ देर शांत सा रहा। जब उसे न्यायालय से जेल ले जाया गया, तो जेल प्रशासन ने उसकी स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों की निगरानी में अलग रखा। इसके बाद उसकी चिकित्सकीय जांच भी की गई। जेल अधीक्षक वीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया अपराधी छिदामी को मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद उसे चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। फिलहाल उसकी स्थिति ठीक है।
विशेष सुरक्षा में हत्यारे को न्यायालय में किया पेश
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद हत्यारे छिदामी को जेल प्रशासन द्वारा उसे विशेष सुरक्षा में अलग वाहन से ले जाकर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे उसी वाहन से वापस जेल ले जाया गया।
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इस मामले में शुक्रवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) निर्भय प्रकाश ने फैसला सुनाते समय कहा कि तीन बेटियों की अमानवीय तरीके से हत्या की गई, खुद की तीन मासूम बेटियों का मर्डर किया है ये क्षमा योग्य नहीं है। उधर, छिदामी मौत की सजा सुनते ही शांत हो गया। इधर, उसके घर पर सजा की खबर पहुंचते ही बूढ़ी मां फूलबाई की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि बेटियों की हत्या की सजा तो उसे मिलनी थी लेकिन इकलौते बेटे की जान बच जाती तो अच्छा रहता। उन्होंने कहा कि तीन साल में वह केवल एक बार ही बेटे से मिलने जेल गई थीं लेकिन अब तो वह चलने में भी लाचार हो गईं।
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शराब ने मेरी दुनिया उजाड़ दी : राजवती
पत्नी राजवती ने कहा कि शराब ने उसकी दुनिया उजाड़ दी। छिदामी के उत्पीड़न और पिटाई से परेशान होकर वह उस वक्त अपनी एक वर्षीय बेटी कविता को लेकर मायके बिल्हारी (दतिया) चली गई थी। 7 वर्षीय बेटी शिवानी को उसकी मौसी डबरई ले गई थी। घर पर तीन बेटियां अंजनी (11), रद्दो (07) एवं पुत्तो (04) को छोड़ गई थी जिसे पति छिदामी ने मार डाला। राजवती ने कहा कि बेटियों के हत्यारे को मौत की सजा मिलनी ही चाहिए थी।
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कमरे में लटका रहता है ताला, खोलती ही बेटियों की याद आ जाती है
तीन साल पहले जिस कमरे में मासूम बेटियों को हथौड़े से कुचलकर मारा गया था उस कमरे में आज भी ताला लटका मिला। पूछने पर राजवती ने कहा कि कमरा अक्सर बंद ही रहता है। वह जब भी इसे खोलती है, बेटियों की यादें ताजा हो जाती है।
पिता को फांसी की सजा होने का बेटियाें पर नहीं दिखा असर
पिता को मौत की सजा दिए जाने के फैसले का उसकी बेटियों पर भी कोई असर नहीं दिखा। बड़ी बेटी शिवानी (10) चौके में चूल्हे पर रोटी बना रही थी। वहीं छोटी बेटी कविता (04) आंगन में खेल रही थी। राजवती ने बताया कि शिवानी गांव के स्कूल में कक्षा चार में पढ़ रही है।
सात एकड़ खेती से चला रही काम
बानपुर। राजवती ने बताया कि घर के गुजारे के लिए सात एकड़ खेती है। उसी की फसल से परिवार का भरण पोषण हो रहा है। उन्होंने बताया कि आय का कोई अन्य स्रोत नहीं होने पर वह खुद मेहनत मजदूरी करती है। अब दो बेटियों और बूढ़ी सास की देखभाल करना ही उसकी प्रमुख जिम्मेदारी है।
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद चिकित्सक की निगरानी में रखा गया
ललितपुर। छिदामी घटना के बाद से ही जेल में बंद चल रहा है। सजा सुनाए जाने का दिन नजदीक आने पर वह कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान चलने लगा था, लेकिन जब शुक्रवार को न्यायालय में उसे फांसी की सजा सुनाई तो वह कुछ देर शांत सा रहा। जब उसे न्यायालय से जेल ले जाया गया, तो जेल प्रशासन ने उसकी स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों की निगरानी में अलग रखा। इसके बाद उसकी चिकित्सकीय जांच भी की गई। जेल अधीक्षक वीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया अपराधी छिदामी को मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद उसे चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। फिलहाल उसकी स्थिति ठीक है।
विशेष सुरक्षा में हत्यारे को न्यायालय में किया पेश
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद हत्यारे छिदामी को जेल प्रशासन द्वारा उसे विशेष सुरक्षा में अलग वाहन से ले जाकर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे उसी वाहन से वापस जेल ले जाया गया।