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जामनी बांध से दिए जा रहे पानी का पैसा मांगा तो तो एमपी पहुंचा सीडब्लूसी
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ललितपुर। जामनी बांध परियोजना पूर्ण होने के साथ ही इस परियोजना के तहत 17 फीसदी आरक्षित रखे गए पेेयजल पर मध्य प्रदेश अपना आधिपत्य जमाते हुए वर्षों से पानी ले रहा है। पेयजल का शुल्क जब यूपी शासन ने मांगा तो एमपी आनाकानी करते हुए सीडब्लूसी में मामला ले गया। जहां पर यह मामला अटका हुआ है।
जनपद के मड़ावरा क्षेत्र में वर्ष 1973 में जामनी बांध का निर्माण हुआ था। वर्ष 1974 में यूपी व एमपी के बीच तय हुआ था कि बांध के भराव का 17 फीसदी पानी मध्य प्रदेश को मिलेगा। एमपी में जो पानी दिया जाएगा उसका शुल्क 12.48 प्रति हजार घन फुट के हिसाब से एमपी सरकार यूपी सरकार को देगी। कुछ वर्षों तक तो सब कुछ ठीक रहा और एमपी शासन भुगतान करता रहा लेकिन इसके बाद एमपी शासन ने यूपी शासन को भुगतान देेना बंद कर दिया। जब यूपी सरकार ने पेयजल धनराशि के लिए दबाव बनाया तो एमपी शासन केंद्रीय जल आयोग (सीडब्लूसी) पहुंच गया। जहां पर अभी भी यह मामला अटका है। जबकि जामनी बांध का यह 17 फीसदी पानी मध्य प्रदेश टीकमगढ़ जनपद की प्यास बुझाता है। तब से लेकर अब तक गर्मी के सीजन में जामनी बांध के गेट खोलकर पानी दिया जा रहा है।
कुछ वर्षों तक तो एमपी शासन ने इस पेयजल का भुगतान और रुपये देने में आना-कानी की। भले ही यह उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजना हो, लेकिन उत्तर प्रदेश वासियों को एक बूंद पेयजल के लिए नहीं मिल रहा है। जबकि मध्य प्रदेश वर्षों से इस बांध का पानी पेयजल के लिए ले रहा है। इस बांध की पेयजल परियोजना का जल मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ भेजा जा रहा है। जबकि इस बांध परियोजना निर्माण में मध्य प्रदेश सरकार का कोई योगदान नहीं रहा है। इस कारण मध्य प्रदेश सरकार पर पानी का ही करोड़ों रुपये का भुगतान सिंचाई विभाग का चल रहा है। वहीं एमपी को जामनी बांध का पानी भेजे जाने के कारण जनपदवासियों को न तो पेयजल के लिए पानी मिल रहा है और न ही यूपी शासन को धन की प्राप्ति हो रही है। हालांकि हर घर नल जल योजना में इस बांध से कुछ हिस्सा पीने का पानी जनपवासियों को मिलने के आसार नजर आने लगे हैं।
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इस प्रकार पहुंचता है एमपी पानी
जामिनी बांध से एमपी के टीकमगढ़ के लिए पानी गेट खोलकर पहुंचाया जाता है। यह पानी कई किलोमीटर का सफर तय करते हुए एमपी की सीमा में प्रवेश करता है। एमपी का टीकमगढ़ प्रशासन अपने साधन से इस पानी को बरीघाट फिल्टर प्लांट तक पहुंचाता है। यहां से टीकमगढ़ शहर को सप्लाई की जाती है।
सिंचाई के लिए जनपद का किसान करता है बांध के पानी का प्रयोग
इस बांध के निर्माण का फायदा जनपद के किसानों को मिल रहा है। इस बांध के पानी को किसानों के लिए सिंचाई के लिए नहरों के जरिये दिया जाता है।
यूपी ने नदियों को रोककर बांध बनाए
एमपी को मिलने वाले पानी के भुगतान का रुपया जब यूपी शासन ने मांगा तो एमपी शासन ने अनोखा क्लेम किया जिसमें कहा गया कि एमपी की सारी नदियों को रोककर यूपी ने बांध बना दिए हैं। अब जब वह जामिनी बांध के पानी को पेयजल के लिए प्रयोग कर रहा है तो यूपी शासन उससे रुपया मांग रहा है।
जब एमपी ने इस बांध से छोड़े गए पानी की रखवाली की थी
वर्ष 2012-13 में जनपद व एमपी के टीकमगढ़ क्षेत्र सूखा पड़ा था जिस कारण नदियां व बांध में पानी का जलस्तर काफी कम हो गया था। टीकमगढ़ में उस समय पानी की भारी किल्लत पैदा हो गई थी। इस स्थिति से निपटने के लिए एमपी शासन ने यूपी शासन से जामिनी बांध से अपने कोटे का पानी मांगा था लेकिन यूपी शासन ने जामनी बांध में पानी कम होने की बात कहकर पानी देने से मना कर दिया था। इस पर यूपी व एमपी शासन के बीच कई दौर की वार्ता हुई थी जिसमें आखिरकार जामिनी बांध के गेट खोलकर टीकमगढ़ को पानी पहुंचाया गया था लेकिन बांध से छोड़े जा रहे पानी की चोरी किसानों के द्वारा की जाने लगी थी। तब टीकमगढ नगर पालिका प्रशासन ने नदी के दोनों ओर हथियार बंद सुरक्षा कर्मी तैनात कर दिए थे। इसके साथ टीकमगढ प्रशासन ने जनपद प्रशासन से अपनी सीमा में सुरक्षा कर्मी तैनात करने की गुजारिश की थी।
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जनपद के मड़ावरा क्षेत्र में वर्ष 1973 में जामनी बांध का निर्माण हुआ था। वर्ष 1974 में यूपी व एमपी के बीच तय हुआ था कि बांध के भराव का 17 फीसदी पानी मध्य प्रदेश को मिलेगा। एमपी में जो पानी दिया जाएगा उसका शुल्क 12.48 प्रति हजार घन फुट के हिसाब से एमपी सरकार यूपी सरकार को देगी। कुछ वर्षों तक तो सब कुछ ठीक रहा और एमपी शासन भुगतान करता रहा लेकिन इसके बाद एमपी शासन ने यूपी शासन को भुगतान देेना बंद कर दिया। जब यूपी सरकार ने पेयजल धनराशि के लिए दबाव बनाया तो एमपी शासन केंद्रीय जल आयोग (सीडब्लूसी) पहुंच गया। जहां पर अभी भी यह मामला अटका है। जबकि जामनी बांध का यह 17 फीसदी पानी मध्य प्रदेश टीकमगढ़ जनपद की प्यास बुझाता है। तब से लेकर अब तक गर्मी के सीजन में जामनी बांध के गेट खोलकर पानी दिया जा रहा है।
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कुछ वर्षों तक तो एमपी शासन ने इस पेयजल का भुगतान और रुपये देने में आना-कानी की। भले ही यह उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण परियोजना हो, लेकिन उत्तर प्रदेश वासियों को एक बूंद पेयजल के लिए नहीं मिल रहा है। जबकि मध्य प्रदेश वर्षों से इस बांध का पानी पेयजल के लिए ले रहा है। इस बांध की पेयजल परियोजना का जल मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ भेजा जा रहा है। जबकि इस बांध परियोजना निर्माण में मध्य प्रदेश सरकार का कोई योगदान नहीं रहा है। इस कारण मध्य प्रदेश सरकार पर पानी का ही करोड़ों रुपये का भुगतान सिंचाई विभाग का चल रहा है। वहीं एमपी को जामनी बांध का पानी भेजे जाने के कारण जनपदवासियों को न तो पेयजल के लिए पानी मिल रहा है और न ही यूपी शासन को धन की प्राप्ति हो रही है। हालांकि हर घर नल जल योजना में इस बांध से कुछ हिस्सा पीने का पानी जनपवासियों को मिलने के आसार नजर आने लगे हैं।
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इस प्रकार पहुंचता है एमपी पानी
जामिनी बांध से एमपी के टीकमगढ़ के लिए पानी गेट खोलकर पहुंचाया जाता है। यह पानी कई किलोमीटर का सफर तय करते हुए एमपी की सीमा में प्रवेश करता है। एमपी का टीकमगढ़ प्रशासन अपने साधन से इस पानी को बरीघाट फिल्टर प्लांट तक पहुंचाता है। यहां से टीकमगढ़ शहर को सप्लाई की जाती है।
सिंचाई के लिए जनपद का किसान करता है बांध के पानी का प्रयोग
इस बांध के निर्माण का फायदा जनपद के किसानों को मिल रहा है। इस बांध के पानी को किसानों के लिए सिंचाई के लिए नहरों के जरिये दिया जाता है।
यूपी ने नदियों को रोककर बांध बनाए
एमपी को मिलने वाले पानी के भुगतान का रुपया जब यूपी शासन ने मांगा तो एमपी शासन ने अनोखा क्लेम किया जिसमें कहा गया कि एमपी की सारी नदियों को रोककर यूपी ने बांध बना दिए हैं। अब जब वह जामिनी बांध के पानी को पेयजल के लिए प्रयोग कर रहा है तो यूपी शासन उससे रुपया मांग रहा है।
जब एमपी ने इस बांध से छोड़े गए पानी की रखवाली की थी
वर्ष 2012-13 में जनपद व एमपी के टीकमगढ़ क्षेत्र सूखा पड़ा था जिस कारण नदियां व बांध में पानी का जलस्तर काफी कम हो गया था। टीकमगढ़ में उस समय पानी की भारी किल्लत पैदा हो गई थी। इस स्थिति से निपटने के लिए एमपी शासन ने यूपी शासन से जामिनी बांध से अपने कोटे का पानी मांगा था लेकिन यूपी शासन ने जामनी बांध में पानी कम होने की बात कहकर पानी देने से मना कर दिया था। इस पर यूपी व एमपी शासन के बीच कई दौर की वार्ता हुई थी जिसमें आखिरकार जामिनी बांध के गेट खोलकर टीकमगढ़ को पानी पहुंचाया गया था लेकिन बांध से छोड़े जा रहे पानी की चोरी किसानों के द्वारा की जाने लगी थी। तब टीकमगढ नगर पालिका प्रशासन ने नदी के दोनों ओर हथियार बंद सुरक्षा कर्मी तैनात कर दिए थे। इसके साथ टीकमगढ प्रशासन ने जनपद प्रशासन से अपनी सीमा में सुरक्षा कर्मी तैनात करने की गुजारिश की थी।