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सवालों के घेरे में आई जिले की गेहूं खरीद
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ललितपुर। जिले में गेहूं क्रय केंद्र एक के बाद एक बंद होने से पूरी खरीद प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। शुरुआत में 128 केंद्र खोले गए थे, लेकिन मई के अंतिम सप्ताह में क्रय केंद्रों की संख्या घटकर 59 ही रह गई है। इस तरह अभी तक 69 गेहूं क्रय केंद्र बंद हो चुके हैं।
लॉकडाउन की वजह से जनपद में इस बार पंद्रह अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हुई है। इस दौरान कई मल्टीस्टेट कंपनी, फार्मर प्रोडयूसर आर्गेनाइजेशन, नेफेड, कल्याण निगम, विपणन शाखा, यूपी पीसीयू, एसएफसी और एफसीआई ने अपने-अपने गेहूं खरीद खोले। कुछ ही दिनों में गेहूं खरीद में तमाम गड़बड़ियां उजागर होने लगी। जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल ने ऐसी संस्थाओं को चिह्नित करना आरंभ कर दिया। उन्होंने सबसे पहले मल्टीस्टेट कंपनी के 17 केंद्रों पर गेहूूं खरीद रोक दी। इसके बाद अन्य कंपनियों के केंद्रों के संचालन पर रोक लगा दी, जिससे जिले में क्रय केंद्रों की संख्या घटकर 59 रह गई।
वर्तमान में पीसीएफ के 55, विपणन शाखा के 03, एफसीआई का 01 केंद्र ही संचालित रह गए हैं। जिन केंद्रों पर खरीद रोकी गई है, उनमें से कइयों ने किसानों का भुगतान नहीं किया है। इस समय किसानों का करीब दस करोड़ रुपये का बकाया बना हुआ है। नियम यह है कि मल्टीस्टेट कंपनी किसानों को सीधा भुगतान नहीं करती हैं, उन्हें विभागीय संस्थाओं को भुगतान करना होता है। इसके बाद किसानों का भुगतान उनके बैंक खातों में किया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि करीब एक माह के अंदर आधे से ज्यादा केंद्र बंद हो गए हैं। ऐसे में गेहूं खरीद सवालों के घेरे में आ गई है।
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मल्टी स्टेट कंपनियों द्वारा संचालित गेहूं खरीद केंद्रों पर विभिन्न प्रकार की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं, जिस कारण जिलाधिकारी के आदेश पर उन्हें बंद किया गया है।
- राकेश कुमार त्रिपाठी
जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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लॉकडाउन की वजह से जनपद में इस बार पंद्रह अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हुई है। इस दौरान कई मल्टीस्टेट कंपनी, फार्मर प्रोडयूसर आर्गेनाइजेशन, नेफेड, कल्याण निगम, विपणन शाखा, यूपी पीसीयू, एसएफसी और एफसीआई ने अपने-अपने गेहूं खरीद खोले। कुछ ही दिनों में गेहूं खरीद में तमाम गड़बड़ियां उजागर होने लगी। जिलाधिकारी योगेश कुमार शुक्ल ने ऐसी संस्थाओं को चिह्नित करना आरंभ कर दिया। उन्होंने सबसे पहले मल्टीस्टेट कंपनी के 17 केंद्रों पर गेहूूं खरीद रोक दी। इसके बाद अन्य कंपनियों के केंद्रों के संचालन पर रोक लगा दी, जिससे जिले में क्रय केंद्रों की संख्या घटकर 59 रह गई।
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वर्तमान में पीसीएफ के 55, विपणन शाखा के 03, एफसीआई का 01 केंद्र ही संचालित रह गए हैं। जिन केंद्रों पर खरीद रोकी गई है, उनमें से कइयों ने किसानों का भुगतान नहीं किया है। इस समय किसानों का करीब दस करोड़ रुपये का बकाया बना हुआ है। नियम यह है कि मल्टीस्टेट कंपनी किसानों को सीधा भुगतान नहीं करती हैं, उन्हें विभागीय संस्थाओं को भुगतान करना होता है। इसके बाद किसानों का भुगतान उनके बैंक खातों में किया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि करीब एक माह के अंदर आधे से ज्यादा केंद्र बंद हो गए हैं। ऐसे में गेहूं खरीद सवालों के घेरे में आ गई है।
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मल्टी स्टेट कंपनियों द्वारा संचालित गेहूं खरीद केंद्रों पर विभिन्न प्रकार की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं, जिस कारण जिलाधिकारी के आदेश पर उन्हें बंद किया गया है।
- राकेश कुमार त्रिपाठी
जिला खाद्य विपणन अधिकारी