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घटतौली का शिकार हो रहे ग्रामीण
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- फोटो : shops.jpg
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अर्जुन खिरिया(ललितपुर) ग्रामीणों क्षेत्रों में दुकानदार खुले आम लूट मचाए हैं, पुराने और घिसे पिटे बाटों का कई वर्षों से उपयोग कर रहे हैं, साथ में पेट्रोल एवं डीजल भी धड़ल्ले से बेच रहे हैं और शिकायत करने पर लड़ने को आमादा रहते हैं।
बाट माप विभाग के अनुसार प्रतिवर्ष एक किलो बाट में 20 ग्राम घिसने के कारण कम हो जाता है। एक अनुमान के अनुसार कम से कम बाट में 20 ग्राम का वजन साल में कम होता है लेकिन दाम पूरा एक किलो का पैसा लिया जाता है। इसी खामी को दूर करने के लिए बाटों के सत्यापन की व्यवस्था है। बाट माप विभाग के नियमानुसार घटतौली रोकने के लिए पुराने बाटों में रांगा भरकर उन्हें मानक के अनुरूप बनाया जाता है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। विभागीय कर्मचारियों की उदासीनता के कारण विभाग अभियान चलाकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
कई बार राशन वितरण एवं कोटेदारों द्वारा भी खाद्य सुरक्षा योजना के अनाज को कम मात्रा में देने की शिकायत मिलती है। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। कुछ जगहों पर डीलर बाटों की जगह पर ईंट पत्थर का प्रयोग करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विभाग की लापरवाही के कारण ही दुकानदार भी घटतौली करते हैं। इन क्षेत्रों में बाट विभाग के द्वारा कभी भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है, जिससे कि इस घटतौली पर विराम लगता नजर नहीं आ रहा है।
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मैंने कई बार दुकान से तौलकर सामान खरीदा घर आकर तौलने पर वजन में करीब 150 ग्राम तक का अंतर आया। उलाहना देने पर कई प्रकार की बातें सुनने को मिली।
- राम किशन साहू
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ग्रामीणों क्षेत्र में घटतौली की आम शिकायतें हैं । कई बार गाड़ी में पेट्रोल डलवाया, जो हमेशा घिसे और टूटे लीटर से डाला गया। खुलेआम घटतौली की जा रही है।- ओम प्रकाश पस्तोर
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जब भी दुकान से सामान लेकर आया हमेशा वजन में कम ही निकला लेकिन किसी अधिकारी से कहने के बाद भी सुनवाई नहीं की जाती है। - रानू दुबे
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बाट माप विभाग के अनुसार प्रतिवर्ष एक किलो बाट में 20 ग्राम घिसने के कारण कम हो जाता है। एक अनुमान के अनुसार कम से कम बाट में 20 ग्राम का वजन साल में कम होता है लेकिन दाम पूरा एक किलो का पैसा लिया जाता है। इसी खामी को दूर करने के लिए बाटों के सत्यापन की व्यवस्था है। बाट माप विभाग के नियमानुसार घटतौली रोकने के लिए पुराने बाटों में रांगा भरकर उन्हें मानक के अनुरूप बनाया जाता है लेकिन हकीकत कुछ और ही है। विभागीय कर्मचारियों की उदासीनता के कारण विभाग अभियान चलाकर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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कई बार राशन वितरण एवं कोटेदारों द्वारा भी खाद्य सुरक्षा योजना के अनाज को कम मात्रा में देने की शिकायत मिलती है। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। कुछ जगहों पर डीलर बाटों की जगह पर ईंट पत्थर का प्रयोग करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विभाग की लापरवाही के कारण ही दुकानदार भी घटतौली करते हैं। इन क्षेत्रों में बाट विभाग के द्वारा कभी भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है, जिससे कि इस घटतौली पर विराम लगता नजर नहीं आ रहा है।
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मैंने कई बार दुकान से तौलकर सामान खरीदा घर आकर तौलने पर वजन में करीब 150 ग्राम तक का अंतर आया। उलाहना देने पर कई प्रकार की बातें सुनने को मिली।
- राम किशन साहू
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ग्रामीणों क्षेत्र में घटतौली की आम शिकायतें हैं । कई बार गाड़ी में पेट्रोल डलवाया, जो हमेशा घिसे और टूटे लीटर से डाला गया। खुलेआम घटतौली की जा रही है।- ओम प्रकाश पस्तोर
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जब भी दुकान से सामान लेकर आया हमेशा वजन में कम ही निकला लेकिन किसी अधिकारी से कहने के बाद भी सुनवाई नहीं की जाती है। - रानू दुबे