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पानी के लिए हो रहा रतजगा
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Thu, 18 Feb 2016 12:53 AM IST
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सिलावन (ललितपुर)। विकासखंड महरौनी के अंतर्गत ग्राम भदौरा में सूखे का असर दिखाई देने लगा है। गांव का जलस्तर काफी तेजी से नीचे खिसक रहा है, जिससे एक के बाद एक हैंडपंप पानी का साथ छोड़ते जा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण पानी के लिए परेशान हैं। पानी के लिए ग्रामीणों को रात दो बजे से नंबर लगाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है।
ग्राम भदौरा में पानी की मारामारी मची हुई है। सूखे की वजह से जलस्तर नीचे खिसक जाने के कारण गांव में तीन हैंडपंपों को छोड़ बाकी सूख गए हैं। गांव की 3,500 की आबादी इन्हीं तीन हैंडपंपों पर निर्भर है। पीने के पानी के लिए ग्रामीण महिलाओं और बच्चों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। ग्राम में दलीपा के खेत के पास लगे हैंडपंप पर आधी रात के बाद से ही नंबर लग जाते हैं। कई बार पहले मैं-पहले मैं, के चक्कर में झगड़े की नौबत भी आ जाती है। गांव की महिलाओं को पानी के लिए काफी दूर तक जाना पड़ रहा है। गांव की प्रेमबाई बताती हैं कि पानी भरने के लिए रात को दो बजे जागकर हैंडपंप पर लाइन लगानी पड़ रही है। यह स्थिति केवल उसकी नहीं, बल्कि गांव की ज्यादातर महिलाओं की है। सारा दिन पानी के जुगाड़ में ही निकल जाता है। पशुओं के लिए भी पीने के पानी की समस्या है। गांव के दिनेश का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में गांव के बाहर से पानी लाना पड़ेगा।
तहसील महरौनी क्षेत्रांतर्गत ग्राम भदौरा तो बानगी मात्र है, यहां के कई गांवों में सूखे का असर दिखाई देने लगा है। गांवों के हैंडपंप या तो सूख चुके हैं या फिर सूखने की कगार पर आ गए हैं। अभी यह स्थिति है तो अप्रैल-मई में स्थिति और भी भयावह होना तय है। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है।
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ग्राम भदौरा में पानी की मारामारी मची हुई है। सूखे की वजह से जलस्तर नीचे खिसक जाने के कारण गांव में तीन हैंडपंपों को छोड़ बाकी सूख गए हैं। गांव की 3,500 की आबादी इन्हीं तीन हैंडपंपों पर निर्भर है। पीने के पानी के लिए ग्रामीण महिलाओं और बच्चों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। ग्राम में दलीपा के खेत के पास लगे हैंडपंप पर आधी रात के बाद से ही नंबर लग जाते हैं। कई बार पहले मैं-पहले मैं, के चक्कर में झगड़े की नौबत भी आ जाती है। गांव की महिलाओं को पानी के लिए काफी दूर तक जाना पड़ रहा है। गांव की प्रेमबाई बताती हैं कि पानी भरने के लिए रात को दो बजे जागकर हैंडपंप पर लाइन लगानी पड़ रही है। यह स्थिति केवल उसकी नहीं, बल्कि गांव की ज्यादातर महिलाओं की है। सारा दिन पानी के जुगाड़ में ही निकल जाता है। पशुओं के लिए भी पीने के पानी की समस्या है। गांव के दिनेश का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में गांव के बाहर से पानी लाना पड़ेगा।
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तहसील महरौनी क्षेत्रांतर्गत ग्राम भदौरा तो बानगी मात्र है, यहां के कई गांवों में सूखे का असर दिखाई देने लगा है। गांवों के हैंडपंप या तो सूख चुके हैं या फिर सूखने की कगार पर आ गए हैं। अभी यह स्थिति है तो अप्रैल-मई में स्थिति और भी भयावह होना तय है। ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया है।
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