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जलापूर्ति व्यवस्था ध्वस्त, पेयजल को परेशान हैं लोग

Wed, 04 Oct 2017 12:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूराो
अमर उजाला ब्यूराो Updated Wed, 04 Oct 2017 12:40 AM IST
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water crisis in lalitpur city
water crisis - फोटो : demo pic
शहर में चौबीस घंटे में मात्र एक घंटे ही जलापूर्ति की जा रही है। इसके पीछे जल संस्थान का तर्क है कि आबादी बढ़ने से पानी की खपत बढ़ती ही जा रही है, जिसे वर्तमान मशीन तंत्र पूरा नहीं कर पा रहा है। एक ही पाली में हो रही जलापूर्ति से शहर वासियों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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शहर की जलापूर्ति के लिए तीन पानी की टंकी बनी हुई हैं जिन्हें बने हुए कई दशक बीत चुके हैं। इसके साथ ही गोविंद सागर बांध से मिलने वाले कच्चे पानी को पीने के योग्य बनाने वाला वाटर फिल्ट्रेशन प्लांट भी वर्षों पुराना है। हर रोज बढ़ती जा रही शहर की आबादी के कारण पानी की खपत भी बढ़ती जा रही है, जिसको जल संस्थान का पुराना मशीन तंत्र पूरा नहीं कर पा रहा है। जल संस्थान के अनुसार शहर में हर रोज दो करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति की जा रही है।
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वर्तमान में वाटर फिल्ट्रेशन प्लांट का जो मशीन तंत्र व संसाधन है उससे केवल इतना ही पानी फिल्टर हो पाता है, कि एक ही घंटे तक जलापूर्ति हो पाए। इसके बाद अगले दिन की जलापूर्ति के लिए दोबारा प्रक्रिया शुरू होती है। शहर की बढ़ती आबादी के पीछे जलापूर्ति तंत्र बूढ़ा होता नजर आने लगा है, जिसे जल संस्थान के अधिकारी भी स्वीकारते हैं।
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चार-पांच वर्ष पूर्व पूरे शहर में सुबह व शाम दो घंटे तक जलापूर्ति की जाती थी, लेकिन अब चौबीस घंटे में केवल एक ही घंटे सुबह 06 बजे से 07 बजे तक की जा रही है। इससे शहर वासियों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। यह तो आम बात है कि हर कोई व्यक्ति हर रोज इस निश्चित समय पर पानी नहीं भर पाता होगा।

बूंद-बूंद पानी को परेशान
चौबीस घंटे में पूरे एक घंटे की जलापूर्ति नहीं की जाती है। सुबह का समय होने के कारण हर किसी को पानी की आवश्यकता होती है। इतने कम समय में पानी का इस्तेमाल करें या फिर पानी को अगले चौबीस घंटे तक के लिए भरकर रखें।
-आदित्य कटारे निवासी- मुहल्ला नई बस्ती।

समस्या होना स्वाभाविक  
मेरे मुहल्ले में पाइप लाइन तो है, लेकिन उसमेें पानी नहीं आता है। यह बात सही है कि जलापूर्ति के लिए एक घंटे का समय पर्याप्त नहीं है। यदि कोई व्यक्ति सुबह के समय घर पर नहीं होने के कारण पानी नहीं भर पाता है तो उसको अगले चौबीस घंटे तक नल आने का इंतजार करना पड़ता है। इससे शहरवासियों को समस्या खड़ी होना स्वाभाविक है। पूर्व की भांति सुबह शाम दोनों ही समय जलापूर्ति होनी चाहिए।
-मनीष दुबे निवासी- मुहल्ला चांदमारी।


अमृत योजना से मिलेगी राहत
शहर में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचने के लिए अमृत योजना संचालित की जा रही है। इस अमृत योजना के तहत शत प्रतिशत घरों में सरकार की ओर से नलों के कनेक्शन कराए जा रहे हैं। इसके साथ ही सभी नल कनेक्शन पर मीटर भी लगाए जाने है, इससे पानी की बर्बादी पर काफी हद तक अंकुश लगेगा। वर्तमान में सभी को नल का बिल समान आदा करना पड़ता है, इसलिए पानी की बर्बादी पर कोई विचार नहीं करता है। आने वाले दिनों में उपयोग के अनुुसार बिल भी अदा करना होगा। इससे पानी की बर्बादी कम होगी और बचने वाले पानी से शहर की जलापूर्ति सही तरीके से हो सकेगी। इसके अलावा अमृत योजना के तहत ही नेहरू नगर, जुगपुरा, चांदमारी, सिद्घनपुरा व सदनशाह आदि इलाकों में जलापूर्ति के लिए अलग से फिल्ट्रेशन प्लांट स्थापित किया जाना है। ऐसा होने से वर्तमान में स्थापित फिल्ट्रेशन प्लांट का बोझ हलका हो जाएगा।


इनका कहना है
पहले की तुलना में वर्तमान में पानी की खपत अधिक हो गई है। इसके अनुसार दो समय पानी की जलापूर्ति कर पाना संभव नहीं है। अमृत योजना से आने वाले दिनों में शहर की जलापूर्ति व्यवस्था काफी हद तक ठीक हो सकेगी।
-रघुवेंद्र कुमार अधिशासी अभियंता, जल संस्थान ललितपुर।
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