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Lalitpur News: कक्षाओं में टपकता है पानी, दीवारों में आई दरार
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संवाद न्यूज एजेंसी
जाखलौन/ललितपुर। प्राथमिक विद्यालय कपासी की कक्षाएं जर्जर हो चुकी हैं। बरसात के दिनों में कक्षाओं की छतों से पानी टपक रहा है। दीवारों में दरारें आ गई हैं। ऐसी स्थिति में कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को खतरा बना रहता है।
ब्लॉक बिरधा के ग्राम कपासी में करीब 20-25 वर्ष पूर्व पुराने प्राथमिक विद्यालय की इमारत के स्थान पर नया स्कूल निर्मित हुआ था। वर्तमान में विद्यालय में 49 छात्र पंजीकृत हैं, जिसमें 29 बालक व 20 बालिकाएं पंजीकृत हैं। बच्चों के शिक्षण कार्य के लिए दो शिक्षक व दो शिक्षामित्र यहां तैनात हैं। करीब दो दशक पुराने इस विद्यालय की कक्षाएं जर्जर हाल में हैं। बारिश में कक्षाओं में छतों से पानी टपकता है, जिससे कक्षा में पानी भर जाता है। हालत यह है कि बच्चे कक्षा में बैठ नहीं पाते। वहीं विद्यालयों में कक्षाओं की दीवारों में दरारें आ गई हैं। इस कारण से विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों सहित यहां कार्यरत शिक्षकों को अनहोनी होने की आशंका बनी रहती है।
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कायाकल्प के बाद भी नहीं हुई मरम्मत
शासन सरकारी स्कूलों को निजी विद्यालयों की तर्ज पर बनाने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 19 पैरामीटर पर काम करा रहा है। लेकिन, इस विद्यालय की छत से टपक रहे पानी को बंद करने और कक्षाओं की दरार ठीक नहीं हो सकी।
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206 विद्यालय जर्जर : कुछ दिन पूर्व शासन ने जिले में जर्जर विद्यालयों की जानकारी मांगी थी। जर्जर विद्यालयों को चिह्नित किया गया, जिसमें 1357 परिषदीय व कंपोजिट विद्यालयों में से विभिन्न ब्लॉक अंतर्गत करीब 206 विद्यालय जर्जर पाए गए थे। इन जर्जर विद्यालयों की सूची शासन स्तर को प्रेषित की जा चुकी है।
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जाखलौन/ललितपुर। प्राथमिक विद्यालय कपासी की कक्षाएं जर्जर हो चुकी हैं। बरसात के दिनों में कक्षाओं की छतों से पानी टपक रहा है। दीवारों में दरारें आ गई हैं। ऐसी स्थिति में कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों को खतरा बना रहता है।
ब्लॉक बिरधा के ग्राम कपासी में करीब 20-25 वर्ष पूर्व पुराने प्राथमिक विद्यालय की इमारत के स्थान पर नया स्कूल निर्मित हुआ था। वर्तमान में विद्यालय में 49 छात्र पंजीकृत हैं, जिसमें 29 बालक व 20 बालिकाएं पंजीकृत हैं। बच्चों के शिक्षण कार्य के लिए दो शिक्षक व दो शिक्षामित्र यहां तैनात हैं। करीब दो दशक पुराने इस विद्यालय की कक्षाएं जर्जर हाल में हैं। बारिश में कक्षाओं में छतों से पानी टपकता है, जिससे कक्षा में पानी भर जाता है। हालत यह है कि बच्चे कक्षा में बैठ नहीं पाते। वहीं विद्यालयों में कक्षाओं की दीवारों में दरारें आ गई हैं। इस कारण से विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों सहित यहां कार्यरत शिक्षकों को अनहोनी होने की आशंका बनी रहती है।
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कायाकल्प के बाद भी नहीं हुई मरम्मत
शासन सरकारी स्कूलों को निजी विद्यालयों की तर्ज पर बनाने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 19 पैरामीटर पर काम करा रहा है। लेकिन, इस विद्यालय की छत से टपक रहे पानी को बंद करने और कक्षाओं की दरार ठीक नहीं हो सकी।
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206 विद्यालय जर्जर : कुछ दिन पूर्व शासन ने जिले में जर्जर विद्यालयों की जानकारी मांगी थी। जर्जर विद्यालयों को चिह्नित किया गया, जिसमें 1357 परिषदीय व कंपोजिट विद्यालयों में से विभिन्न ब्लॉक अंतर्गत करीब 206 विद्यालय जर्जर पाए गए थे। इन जर्जर विद्यालयों की सूची शासन स्तर को प्रेषित की जा चुकी है।