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खुले मैदान व प्लाटों में पनप रही बीमारियां
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 18 Sep 2016 01:21 AM IST
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plat, lalitpur news
- फोटो : amar ujala, lalitpur news
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ललितपुर। स्वास्थ्य विभाग, नगर पालिका व जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते शहर वासी संक्रामक बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। शहर के लगभग समस्त मुहल्लों में सैकड़ों की संख्या में खाली मैदान व प्लाट खुले पड़े हुए हैं। अधिकांश खुले मैदान व प्लाटों में गंदगी व जलभराव है, जिसमें भारी संख्या में मच्छर पनप रहे हैं। ऐसी ही स्थिति रही तो इस गंदगी व भरे पानी में पनप रहे मच्छरों से शहर में संक्रामक बीमारियां अपने पैर पसार सकती हैं।
स्वास्थ्य विभाग के पास संक्रामक रोगों से ग्रस्त मरीजों को रिकार्ड नहीं है, लेकिन जिला अस्पताल व निजी नर्सिंग होम व अस्पताल मरीजों से भरी पड़े हैं। संबंधित समस्त विभागीय अधिकारी शहर वासियों के स्वास्थ्य के साथ भारी खिलवाड़ कर रहे हैं। जहां एक ओर स्वास्थ्य विभाग ने शहर के खाली प्लाटों, मैदानों व जल भराव वाले अन्य स्थानों पर अब तक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं कराया है, वहीं दूसरी और नगर पालिका भी इन खाली प्लाट स्वामियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से पीछे हट रही है।
शहर में खुले पड़े खाली प्लाटों को स्थानीय लोगों ने कचरा घर बना लिया है।
बरसात के मौसम में इन्हीं कचरों के ढेरों में जलभराव हो जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए शासन व प्रशासन ने नगर पालिका को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वह उक्त प्लाटों की सफाई कराने व खुले मैदान की चार दीवारी बनाने के संबंध में नोटिस जारी करें। लेकिन इसे विडंबना ही कहेंगे कि शहर में सैकड़ों की संख्या में खुले पड़े खाली प्लाटों के बाद भी नगर पालिका ने अब तक किसी भी प्लाट स्वामियों को प्रथम कार्रवाई के नाम पर नोटिस तक जारी नहीं किए हैं। नोटिस का पालन नहीं करने पर नगर पालिका अधिनियम में विभिन्न धाराओं में कार्रवाई का प्रावधान भी है।
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मालूम हो कि विगत जुलाई माह से शासन द्वारा नगर पालिका व स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को निरंतर निर्देश दिए जा रहे हैं कि संक्रामक रोगों से निपटने के लिए शहर की सफाई व्यवस्था की सुनिश्चत करें और खाली प्लाटों में एकत्रित गंदगी व जलभराव का समस्या का निस्तारण करते हुए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें, लेकिन भौतिक स्तर पर संबंधित अधिकारियों द्वारा शासन के निर्देशों का कोई खास पालन नहीं किया जा रहा है।
आबादी के बीच मछली पालन के लिए बना लिया तालाब
शहर के बीचों-बीच स्थित सुम्मेरा तालाब के बंध पर शनि मंदिर के सामने की ओर खाली पड़े मैदान को स्थानीय एक युवक ने मछली पालन के लिए तालाब बना लिया है। यह मैदान वार्ड नंबर 16 मुहल्ला आजादपुरा तुवन टीला के पीछे स्थित है। यहां घनी आबादी में बीच में करीब ढ़ाई-तीन एकड़ का एक निजी खाली मैदान पड़ा हुआ है। गहराई होने के कारण बरसात के दौरान क्षेत्र का सारा पानी इसी खाली मैदान में एकत्रित हो जाता है। इस पानी की निकासी के लिए नगर पालिका द्वारा विगत वर्ष लाखों रुपए की लागत से पक्के व स्थाई नाला का निर्माण कराया था। लेकिन स्थानीय एक युवक द्वारा इस नाले में मिट्टी भरकर जलनिकासी को बंद कर दिया है, जिससे मैदान में भारी मात्रा में बरसात का पानी एकत्रित हो गया है। उस व्यक्ति द्वारा तालाब में तबदील हो चुके मैदान में मछली पालन किया जा रहा है। महीनों से जमा गंदे पानी के कारण बीमारियां फैलने लगी हैं और इलाके में मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है।
कुछ लोगों के घर भी चारों ओर से इस पानी से घिर गए हैं। आने-जाने का रास्ता तक बंद हो गया है, किसी तरह जुगाड़ बनाकर लोग निकल पाते हैं। स्थानीय लोगों द्वारा अनेकों बार शिकायत की जा चुकी है व ज्ञापन देकर मांग भी की है।
मैदान के पानी की निकासी रोक देने के कारण काफी लंबे समय से पानी भरा हुआ है, इससे मच्छरों व अन्य कीड़ों का प्रकोप बढ़ गया है। गंदगी के कारण बीमारी का भय तो बना ही रहता है, वहीं नगर पालिका द्वारा कभी फॉगिंग भी नहीं की जाती है और कीटनाशक दवा का छिड़काव भी नहीं किया गया है।
मुन्नी देवी
जब पानी बरसत सो घर में तक पानी भर जात है और मछरा के काटवे से नाती व नातिन बीमार हो गए, बड़ी अस्पताल में दवाई चल रई है। घर में बड़े-बड़े बाबा(सांप) आ जात हैं। रात के अंधियारे में बच्चन को डर बने रत है, कोई सुनवे वालो नई है। अधिकारियन से कव कैए कछु सुन लेवें।
शीलाबाई
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स्वास्थ्य विभाग के पास संक्रामक रोगों से ग्रस्त मरीजों को रिकार्ड नहीं है, लेकिन जिला अस्पताल व निजी नर्सिंग होम व अस्पताल मरीजों से भरी पड़े हैं। संबंधित समस्त विभागीय अधिकारी शहर वासियों के स्वास्थ्य के साथ भारी खिलवाड़ कर रहे हैं। जहां एक ओर स्वास्थ्य विभाग ने शहर के खाली प्लाटों, मैदानों व जल भराव वाले अन्य स्थानों पर अब तक कीटनाशक दवाओं का छिड़काव नहीं कराया है, वहीं दूसरी और नगर पालिका भी इन खाली प्लाट स्वामियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से पीछे हट रही है।
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शहर में खुले पड़े खाली प्लाटों को स्थानीय लोगों ने कचरा घर बना लिया है।
बरसात के मौसम में इन्हीं कचरों के ढेरों में जलभराव हो जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए शासन व प्रशासन ने नगर पालिका को यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वह उक्त प्लाटों की सफाई कराने व खुले मैदान की चार दीवारी बनाने के संबंध में नोटिस जारी करें। लेकिन इसे विडंबना ही कहेंगे कि शहर में सैकड़ों की संख्या में खुले पड़े खाली प्लाटों के बाद भी नगर पालिका ने अब तक किसी भी प्लाट स्वामियों को प्रथम कार्रवाई के नाम पर नोटिस तक जारी नहीं किए हैं। नोटिस का पालन नहीं करने पर नगर पालिका अधिनियम में विभिन्न धाराओं में कार्रवाई का प्रावधान भी है।
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मालूम हो कि विगत जुलाई माह से शासन द्वारा नगर पालिका व स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को निरंतर निर्देश दिए जा रहे हैं कि संक्रामक रोगों से निपटने के लिए शहर की सफाई व्यवस्था की सुनिश्चत करें और खाली प्लाटों में एकत्रित गंदगी व जलभराव का समस्या का निस्तारण करते हुए कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करें, लेकिन भौतिक स्तर पर संबंधित अधिकारियों द्वारा शासन के निर्देशों का कोई खास पालन नहीं किया जा रहा है।
आबादी के बीच मछली पालन के लिए बना लिया तालाब
शहर के बीचों-बीच स्थित सुम्मेरा तालाब के बंध पर शनि मंदिर के सामने की ओर खाली पड़े मैदान को स्थानीय एक युवक ने मछली पालन के लिए तालाब बना लिया है। यह मैदान वार्ड नंबर 16 मुहल्ला आजादपुरा तुवन टीला के पीछे स्थित है। यहां घनी आबादी में बीच में करीब ढ़ाई-तीन एकड़ का एक निजी खाली मैदान पड़ा हुआ है। गहराई होने के कारण बरसात के दौरान क्षेत्र का सारा पानी इसी खाली मैदान में एकत्रित हो जाता है। इस पानी की निकासी के लिए नगर पालिका द्वारा विगत वर्ष लाखों रुपए की लागत से पक्के व स्थाई नाला का निर्माण कराया था। लेकिन स्थानीय एक युवक द्वारा इस नाले में मिट्टी भरकर जलनिकासी को बंद कर दिया है, जिससे मैदान में भारी मात्रा में बरसात का पानी एकत्रित हो गया है। उस व्यक्ति द्वारा तालाब में तबदील हो चुके मैदान में मछली पालन किया जा रहा है। महीनों से जमा गंदे पानी के कारण बीमारियां फैलने लगी हैं और इलाके में मच्छरों का प्रकोप काफी बढ़ गया है।
कुछ लोगों के घर भी चारों ओर से इस पानी से घिर गए हैं। आने-जाने का रास्ता तक बंद हो गया है, किसी तरह जुगाड़ बनाकर लोग निकल पाते हैं। स्थानीय लोगों द्वारा अनेकों बार शिकायत की जा चुकी है व ज्ञापन देकर मांग भी की है।
मैदान के पानी की निकासी रोक देने के कारण काफी लंबे समय से पानी भरा हुआ है, इससे मच्छरों व अन्य कीड़ों का प्रकोप बढ़ गया है। गंदगी के कारण बीमारी का भय तो बना ही रहता है, वहीं नगर पालिका द्वारा कभी फॉगिंग भी नहीं की जाती है और कीटनाशक दवा का छिड़काव भी नहीं किया गया है।
मुन्नी देवी
जब पानी बरसत सो घर में तक पानी भर जात है और मछरा के काटवे से नाती व नातिन बीमार हो गए, बड़ी अस्पताल में दवाई चल रई है। घर में बड़े-बड़े बाबा(सांप) आ जात हैं। रात के अंधियारे में बच्चन को डर बने रत है, कोई सुनवे वालो नई है। अधिकारियन से कव कैए कछु सुन लेवें।
शीलाबाई