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Lalitpur News: कर्नाटक में बंधक बनाए गए मजदूरों छुड़ाने पहुंची प्रशासनिक टीम का ग्रामीणों ने कर लिया था घेराव

Sat, 10 Jan 2026 12:38 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 10 Jan 2026 12:38 AM IST
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Villagers surrounded the administrative team that arrived to rescue the workers held hostage in Karnataka.
‘चार लाख में खरीद लिया’ कहकर मजदूरों को रोकने की कोशिश
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पुलिस बल बुलाने के बाद भी तीन घंटे तक करनी पड़ी मशक्त
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कर्नाटक के बागलकोट जिले में बंधक बनाए गए ललितपुर के मजदूरों को छुड़ाने के दौरान हालात उस वक्त तनावपूर्ण हो गए, जब ठेकेदार और स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासनिक टीम का घेराव कर लिया। मजदूरों को चार लाख रुपये में खरीद लेने का दावा करते हुए उन्हें ले जाने से रोकने की कोशिश की गई। हालात बिगड़ते देख कर्नाटक प्रशासन को पुलिस बल बुलाना पड़ा, जिसके बाद करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद सभी मजदूरों को मुक्त कराया जा सका।
तहसील मड़ावरा के ग्राम पापड़ा और सौल्दा के 17 मजदूरों को उनके परिवारों के साथ कर्नाटक ले जाकर तीन महीने तक बंधक बनाकर काम कराया गया। मजदूरों के साथ उनके 20 बच्चे भी वहीं रखे गए थे। परिजनों की शिकायत पर जिलाधिकारी ने बागलकोट जिला प्रशासन से पत्राचार कर मजदूरों की रिहाई का अनुरोध किया। इसके बाद जनसाहस एनजीओ की दो सदस्यीय टीम भी कर्नाटक पहुंची और प्रशासन के साथ बताए गए स्थान पर दबिश दी।
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जब प्रशासनिक अधिकारियों ने मजदूरों को मुक्त कराकर वापस ले जाने की प्रक्रिया शुरू की, तभी ठेकेदार और उसके साथ मौजूद ग्रामीणों ने टीम को घेर लिया। कुछ समय के लिए संघर्ष की स्थिति बन गई। स्थिति को संभालते हुए बागलकोट प्रशासन ने तत्काल पुलिस बल बुलाया। पुलिस के पहुंचते ही ग्रामीण पीछे हट गए, जबकि ठेकेदार मौके से फरार हो गया। पुलिस ने ठेकेदार के एक सहयोगी को हिरासत में लेकर बदामी थाने पहुंचाया। मजदूरों को औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराने के बाद सुरक्षित जाने दिया गया, जबकि पकड़े गए व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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तीन महीने बाद चैन की सांंस
कर्नाटक से मुक्त होकर जनपद लौटे मजदूरों ने सेल्टर होम में अपने परिवार और बच्चों के साथ तीन महीने बाद भरपेट भोजन किया। रात में सुकून की नींद सोए मजदूरों के चेहरे पर राहत साफ नजर आई। सुबह धूप निकलते ही मजदूर परिवार सहित सेल्टर होम के बाहर बैठे दिखे, जबकि बच्चे खिलौनों से खेलते नजर आए।---------

आकांक्षी ब्लॉक, फिर भी पलायन की मजबूरी
मड़ावरा ब्लॉक को आकांक्षी ब्लॉक घोषित किया गया है, बावजूद इसके ग्राम पापड़ा, सौल्दा समेत कई गांवों के लोग रोजगार के लिए पलायन को मजबूर हैं। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर बाहरी राज्यों के ठेकेदार मजदूरों का शोषण कर रहे हैं। जिले में यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी बंधक मजदूरी के मामले सामने आ चुके हैं।
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आकांक्षी ब्लॉक में ये हैं सरकारी दावे
मड़ावरा आकांक्षी ब्लॉक में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, कृषि और बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए जनवरी 2023 से विशेष कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इसके तहत पोषणयुक्त भोजन, बेहतर आंगनबाड़ी सेवाएं, कौशल विकास, वित्तीय समावेशन, डिजिटल कनेक्टिविटी और निगरानी तंत्र मजबूत करने का दावा किया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी पलायन और शोषण की तस्वीर पेश कर रही है।
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