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Lalitpur News: सीरोंन गांव में संग्रहालय से मूर्तियां ले जाने पर ग्रामीणों का हंगामा
Tue, 22 Sep 2026 12:06 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Updated Tue, 22 Sep 2026 12:06 AM IST
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मड़ावरा। थाना क्षेत्र के ग्राम सीरोंन स्थित संग्रहालय से प्राचीन मूर्तियां ले जाने को लेकर 19 सितंबर 2026 को विवाद हो गया। ग्रामीणों ने इसका जोरदार विरोध किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने मूर्तियों को ले जाने की अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे।
पुलिस को दस्तावेज नहीं दिखाए जा सके। इसके बाद सभी पुरातन अवशेषों को फिलहाल यथास्थान रखवा दिया गया। तब जाकर यह मामला शांत हुआ। 20 सितंबर 2026 को सीरोंन गांव के दर्जनों ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली से मड़ावरा थाने पहुंचे। उन्होंने एक शिकायती पत्र सौंपा। ग्राम प्रधान हरपाल सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में खुदाई के दौरान एक खेत से प्राचीन पाषाण मूर्ति मिली थी। यह मूर्ति जैन धर्म से संबंधित थी और अन्य अवशेष भी प्राप्त हुए थे। संबंधित किसान ने अपनी भूमि मंदिर और धर्मशाला निर्माण के लिए दान की थी। बाद में वहां एक भवन तैयार किया गया। इसे प्राप्त पाषाण अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए संग्रहालय के रूप में उपयोग किया जाने लगा।
इनसेट
ग्रामीणों के आरोप और मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 19 सितंबर को जैन समाज के कुछ लोग पिकअप वाहन से मूर्तियां ले जाने का प्रयास कर रहे थे। उनका कहना है कि मूर्तियों को गांव से बाहर ले जाने की तैयारी पहले से थी, जिसकी जांच 18 सितंबर को मशीनों से भी कराई गई। ग्रामीणों ने प्राचीन मूर्तियों के खुर्द-बुर्द होने की आशंका जताते हुए कार्रवाई की मांग की है। उनके अनुसार, मंदिर निर्माण के लिए दान की गई जमीन पर संग्रहालय और विद्यालय बनाया गया है। ग्रामीण अब गांव में ही मंदिर बनाकर मूर्तियों को स्थापित करने की मांग कर रहे हैं।
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दूसरे पक्ष के लोग भी मामले को लेकर थाने पहुंचे। राजू सौंरया ने बताया कि कुछ मूर्तियों में मामूली कमी थी। उन्हें मरम्मत कराने के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। मरम्मत के बाद सभी मूर्तियों को वापस उसी स्थान पर रख दिया जाता।
थाना प्रभारी निरीक्षक मनोज मिश्रा ने बताया कि विवाद की स्थिति को देखते हुए मूर्तियों को ले जाने से रोक दिया गया है। फिलहाल सभी मूर्तियां यथास्थान रखवा दी गई हैं।
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पुलिस को दस्तावेज नहीं दिखाए जा सके। इसके बाद सभी पुरातन अवशेषों को फिलहाल यथास्थान रखवा दिया गया। तब जाकर यह मामला शांत हुआ। 20 सितंबर 2026 को सीरोंन गांव के दर्जनों ग्रामीण ट्रैक्टर-ट्रॉली से मड़ावरा थाने पहुंचे। उन्होंने एक शिकायती पत्र सौंपा। ग्राम प्रधान हरपाल सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गांव में खुदाई के दौरान एक खेत से प्राचीन पाषाण मूर्ति मिली थी। यह मूर्ति जैन धर्म से संबंधित थी और अन्य अवशेष भी प्राप्त हुए थे। संबंधित किसान ने अपनी भूमि मंदिर और धर्मशाला निर्माण के लिए दान की थी। बाद में वहां एक भवन तैयार किया गया। इसे प्राप्त पाषाण अवशेषों को सुरक्षित रखने के लिए संग्रहालय के रूप में उपयोग किया जाने लगा।
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ग्रामीणों के आरोप और मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 19 सितंबर को जैन समाज के कुछ लोग पिकअप वाहन से मूर्तियां ले जाने का प्रयास कर रहे थे। उनका कहना है कि मूर्तियों को गांव से बाहर ले जाने की तैयारी पहले से थी, जिसकी जांच 18 सितंबर को मशीनों से भी कराई गई। ग्रामीणों ने प्राचीन मूर्तियों के खुर्द-बुर्द होने की आशंका जताते हुए कार्रवाई की मांग की है। उनके अनुसार, मंदिर निर्माण के लिए दान की गई जमीन पर संग्रहालय और विद्यालय बनाया गया है। ग्रामीण अब गांव में ही मंदिर बनाकर मूर्तियों को स्थापित करने की मांग कर रहे हैं।
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दूसरे पक्ष के लोग भी मामले को लेकर थाने पहुंचे। राजू सौंरया ने बताया कि कुछ मूर्तियों में मामूली कमी थी। उन्हें मरम्मत कराने के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था। मरम्मत के बाद सभी मूर्तियों को वापस उसी स्थान पर रख दिया जाता।
थाना प्रभारी निरीक्षक मनोज मिश्रा ने बताया कि विवाद की स्थिति को देखते हुए मूर्तियों को ले जाने से रोक दिया गया है। फिलहाल सभी मूर्तियां यथास्थान रखवा दी गई हैं।