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घरों से बाहर नहीं निकले ग्रामीण
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डोंगरा में सूनी गलियां
- फोटो : LALITPUR
डोंगराखुर्द। प्रधानमंत्री की जनता कर्फ्यू की अपील का असर शहरी क्षेत्र के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी रहा। किसानों और गांव के लोगों ने फसल कटाई के दौरान महत्वपूर्ण समय में जनता कर्फ्यू को महत्व दिया और घरों से बाहर नहीं निकले।
महिलाओं ने सुबह पांच उठकर जरूरी काम काज कर लिए थे। गांव की गलियों, सड़कों, खेत- खलिहानों पर सन्नाटा पसरा रहा। एक-दुक्का लोग ही घर से बाहर निकले। वर्तमान समय में किसानों का खेती का कार्य चल रहा है। फसलों की कटाई और थ्रेसिंग जोर शोर चल रही है। इस समय किसान दिन- रात खेतों पर डेरा डाले हुए हैं, जबकि आए दिन मौसम खराब हो रहा है। बेमौसम बरसात जैसी आपदाओं की भी किसानों ने परवाह नहीं की और प्रधानमंत्री की अपील को स्वीकारा। लोग अपने परिवार के साथ घरों के अंदर ही दिन भर रहे। मोबाइल, टेलीविजन के माध्यम से टाइम पास किया। गावों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा।गांव के बुजुर्गों ने बताया कि ऐसा समय पहली बार देखने को मिला कि कोई व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकला। दिन भर यातायात सुनसान रहा सड़कों पर वाहन नहीं निकले।
खेतों पर पसरा रहा सन्नाटा
किसानों की खेतों में फसलें पककर तैयार खड़ी हैं और ज्यादातर फसलों की कटाई चल रही है। आवारा गायें भी घूम कर फसलों को बरबाद कर रही हैं। इसके बाद भी किसानों ने खेतों की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दिया और कोरोना वायरस को मात देने के लिए प्रधानमंत्री के आह्वान पर सहयोग किया।
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भय का माहौल रहा
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर लोग अनपढ़ होने के कारण तमाम तरह की अफवाहें फैलने से लोग डरे रहे।
व्यापारियों ने दुकानें बंद रखीं
नाराहट कस्बा में व्यापारियों ने दुकानें बंद रखकर प्रधानमंत्री की अपील को स्वीकार किया। इस समय देश में फैले कोरोना वायरस को लेकर सभी चिंतित हैं। बीमारी की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी सतर्कता बरत रहे हैं। धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर सांस्कृतिक एवं वैवाहिक कार्यक्रम को भी फिलहाल स्थगित कर आगे बढ़ा दिया गया है।
प्रधानमंत्री के आह्वान पर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने कोरोना वायरस को मात देने के लिए साथ दिया है। इससे देश में फैली महामारी से निजात मिलेगी।
- भूप्रताप सिंह, समाजसेवी
ऐसा पहली बार देखने को मिला कि गांव की गलियों व सड़कों पर दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। लोगों ने सारे कामकाज छोड़ दिए और घरों में रहे। - हरीराम दुबे
जान बची सो लाखों पाए, बीमारी फैलने का हल्ला मचा था। बीमारी फैलने का डर सता रहा था, इसलिए अपने घर से बाहर नहीं निकले। - डोंगराबारी
दिनभर घर के भीतर रहे। सबेरे से काम पर निकल जाते थे, लेकिन बीमारी के डर के कारण घर से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। इस कारण दिन पहाड़ सा बीता। - मजली बहू
खेती का काम छोड़कर पूरा परिवार घरों के अंदर रहा। जबकि, आवारा गोवंश घूमकर फसल का नुकसान करते रहे। फसलें कटी खेतों में रखी हुई हैं, लेकिन बीमारी की चिंता के कारण घरों से बाहर नहीं निकल पाए। - घसीटे कुशवाहा
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महिलाओं ने सुबह पांच उठकर जरूरी काम काज कर लिए थे। गांव की गलियों, सड़कों, खेत- खलिहानों पर सन्नाटा पसरा रहा। एक-दुक्का लोग ही घर से बाहर निकले। वर्तमान समय में किसानों का खेती का कार्य चल रहा है। फसलों की कटाई और थ्रेसिंग जोर शोर चल रही है। इस समय किसान दिन- रात खेतों पर डेरा डाले हुए हैं, जबकि आए दिन मौसम खराब हो रहा है। बेमौसम बरसात जैसी आपदाओं की भी किसानों ने परवाह नहीं की और प्रधानमंत्री की अपील को स्वीकारा। लोग अपने परिवार के साथ घरों के अंदर ही दिन भर रहे। मोबाइल, टेलीविजन के माध्यम से टाइम पास किया। गावों में दिनभर सन्नाटा पसरा रहा।गांव के बुजुर्गों ने बताया कि ऐसा समय पहली बार देखने को मिला कि कोई व्यक्ति घर से बाहर नहीं निकला। दिन भर यातायात सुनसान रहा सड़कों पर वाहन नहीं निकले।
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खेतों पर पसरा रहा सन्नाटा
किसानों की खेतों में फसलें पककर तैयार खड़ी हैं और ज्यादातर फसलों की कटाई चल रही है। आवारा गायें भी घूम कर फसलों को बरबाद कर रही हैं। इसके बाद भी किसानों ने खेतों की तरफ बिल्कुल ध्यान नहीं दिया और कोरोना वायरस को मात देने के लिए प्रधानमंत्री के आह्वान पर सहयोग किया।
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भय का माहौल रहा
ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादातर लोग अनपढ़ होने के कारण तमाम तरह की अफवाहें फैलने से लोग डरे रहे।
व्यापारियों ने दुकानें बंद रखीं
नाराहट कस्बा में व्यापारियों ने दुकानें बंद रखकर प्रधानमंत्री की अपील को स्वीकार किया। इस समय देश में फैले कोरोना वायरस को लेकर सभी चिंतित हैं। बीमारी की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी सतर्कता बरत रहे हैं। धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर सांस्कृतिक एवं वैवाहिक कार्यक्रम को भी फिलहाल स्थगित कर आगे बढ़ा दिया गया है।
प्रधानमंत्री के आह्वान पर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों ने कोरोना वायरस को मात देने के लिए साथ दिया है। इससे देश में फैली महामारी से निजात मिलेगी।
- भूप्रताप सिंह, समाजसेवी
ऐसा पहली बार देखने को मिला कि गांव की गलियों व सड़कों पर दिन भर सन्नाटा पसरा रहा। लोगों ने सारे कामकाज छोड़ दिए और घरों में रहे। - हरीराम दुबे
जान बची सो लाखों पाए, बीमारी फैलने का हल्ला मचा था। बीमारी फैलने का डर सता रहा था, इसलिए अपने घर से बाहर नहीं निकले। - डोंगराबारी
दिनभर घर के भीतर रहे। सबेरे से काम पर निकल जाते थे, लेकिन बीमारी के डर के कारण घर से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। इस कारण दिन पहाड़ सा बीता। - मजली बहू
खेती का काम छोड़कर पूरा परिवार घरों के अंदर रहा। जबकि, आवारा गोवंश घूमकर फसल का नुकसान करते रहे। फसलें कटी खेतों में रखी हुई हैं, लेकिन बीमारी की चिंता के कारण घरों से बाहर नहीं निकल पाए। - घसीटे कुशवाहा