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वायदा निभाएं सीएम साहब!
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Sun, 20 Sep 2015 12:59 AM IST
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ललितपुर। नगर में एक साल पहले आए मुख्यमंत्री ने जिमन तीन (वर्ग तीन) की जमीन को भूमिधर घोषित करने की मांग हुई थी, अब जनपद के लोग उनके आगमन पर वायदा निभाने की बात कर रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि सीएम साहब 35 हजार एकड़ को भूमिधर घोषित कर देंगे, जिससे हजारों किसानों का भला हो सकेगा।
जनपद में लाखों किसान परिवार हैं। इनमें से 32,166 ऐसे हैं, जो वर्ग तीन (जिमन तीन) की जमीन पर आजादी के बाद से ही खेती करते चले आ रहे हैं। लेकिन वे दशकों बाद भी जमीन के मालिक नहीं बन पाए हैं। मिर्जापुर जनपद के बाद ललितपुर ऐसा जनपद है जहां पर सर्वाधिक जिमन तीन की जमीन मौजूद हैं। हालांकि बांदा, महोबा चित्रकूट व झांसी में भी वर्ग तीन की जमीन है, लेकिन यह कम है। प्रदेश में अन्य जनपदों में वर्ग तीन की जमीन भूमिधर होती चली गई, लेकिन जनपद में रोक लगी हुई है।
जनपद में 12,666 खातों में 13,174.521 हेक्टेयर जो जमींदारी अधिनियम वर्ष 1360 फसली के समय की है। आजादी के बाद से ही यह भूमिधर नहीं हो सकी है। 1130 खातों में 1,497.468 हेक्टेयर सीएलआरडी है। कुल 14,671.989 हेक्टेयर अर्थात कुल 35 हजार एकड़ भूमि भूमिधर नहीं हो सकी है। इससे दो लाख से अधिक किसान परिवार प्रभावित हैं। जिमन तीन की जमीन पर सत्ताधारी सरकारों ने अब तक जमकर राजनीति की। कई बार तो इस जमीन को ग्रामसभा में करने की चालें भी चली गईं, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। करीब एक साल पहले आए सीएम अखिलेश यादव ने जिमन तीन को भूमिधर घोषित करने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक यह अधूरी है। जनपद के किसानों अब उनसे उम्मीदें हैं।
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तहसीलों में इस प्रकार है जमीन
ललितपुर तहसील में 9,904.219 हेक्टेयर, जिसमें 25,926 काश्तकार शामिल हैं। महरौनी तहसील में 206.169 हेक्टेयर, जिसमें 201 काश्तकार और तालबेहट तहसील में 4,202.386 हेक्टेयर में 6,039 काश्तकार शामिल हैं। हैरानी की बात तो यह है कि आजादी के बाद से ही जिला स्तरीय व हाइकोर्ट में 443 जमीन संबंधी वाद विचाराधीन हैं, लेकिन सरकारों ने अब तक इस बड़े क्षेत्रफल को भूमिधर घोषित नहीं किया है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने उठाया बीड़ा
जनपद के करीब दो लाख किसान परिवारों की लड़ाई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओमप्रकाश श्रीवास्तव 16 साल से लड़ रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1999 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाद दायर किया और वर्ष 2013 में किसानों के हक में जनहित याचिका दाखिल की। तब से लेकर अब तक उन्होंने जिला न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि सत्ताधारी सरकारों व नेताओं ने उनको कई बार प्रभावित करने का काम किया। लेकिन राजघाट के एक किसान के आंसू देखकर उन्होंने लड़ाई अभी तक जारी रखी। उनका मानना है कि राजस्व अधिकारी वर्ग तीन (जिमन तीन) के रिकार्ड देख लें और उनके द्वारा होती आई गलतियों को सुधार लें तो हजारों किसानों का भला हो सकता है।
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जनपद में लाखों किसान परिवार हैं। इनमें से 32,166 ऐसे हैं, जो वर्ग तीन (जिमन तीन) की जमीन पर आजादी के बाद से ही खेती करते चले आ रहे हैं। लेकिन वे दशकों बाद भी जमीन के मालिक नहीं बन पाए हैं। मिर्जापुर जनपद के बाद ललितपुर ऐसा जनपद है जहां पर सर्वाधिक जिमन तीन की जमीन मौजूद हैं। हालांकि बांदा, महोबा चित्रकूट व झांसी में भी वर्ग तीन की जमीन है, लेकिन यह कम है। प्रदेश में अन्य जनपदों में वर्ग तीन की जमीन भूमिधर होती चली गई, लेकिन जनपद में रोक लगी हुई है।
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जनपद में 12,666 खातों में 13,174.521 हेक्टेयर जो जमींदारी अधिनियम वर्ष 1360 फसली के समय की है। आजादी के बाद से ही यह भूमिधर नहीं हो सकी है। 1130 खातों में 1,497.468 हेक्टेयर सीएलआरडी है। कुल 14,671.989 हेक्टेयर अर्थात कुल 35 हजार एकड़ भूमि भूमिधर नहीं हो सकी है। इससे दो लाख से अधिक किसान परिवार प्रभावित हैं। जिमन तीन की जमीन पर सत्ताधारी सरकारों ने अब तक जमकर राजनीति की। कई बार तो इस जमीन को ग्रामसभा में करने की चालें भी चली गईं, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। करीब एक साल पहले आए सीएम अखिलेश यादव ने जिमन तीन को भूमिधर घोषित करने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक यह अधूरी है। जनपद के किसानों अब उनसे उम्मीदें हैं।
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तहसीलों में इस प्रकार है जमीन
ललितपुर तहसील में 9,904.219 हेक्टेयर, जिसमें 25,926 काश्तकार शामिल हैं। महरौनी तहसील में 206.169 हेक्टेयर, जिसमें 201 काश्तकार और तालबेहट तहसील में 4,202.386 हेक्टेयर में 6,039 काश्तकार शामिल हैं। हैरानी की बात तो यह है कि आजादी के बाद से ही जिला स्तरीय व हाइकोर्ट में 443 जमीन संबंधी वाद विचाराधीन हैं, लेकिन सरकारों ने अब तक इस बड़े क्षेत्रफल को भूमिधर घोषित नहीं किया है।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने उठाया बीड़ा
जनपद के करीब दो लाख किसान परिवारों की लड़ाई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ओमप्रकाश श्रीवास्तव 16 साल से लड़ रहे हैं। उन्होंने वर्ष 1999 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाद दायर किया और वर्ष 2013 में किसानों के हक में जनहित याचिका दाखिल की। तब से लेकर अब तक उन्होंने जिला न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हालांकि सत्ताधारी सरकारों व नेताओं ने उनको कई बार प्रभावित करने का काम किया। लेकिन राजघाट के एक किसान के आंसू देखकर उन्होंने लड़ाई अभी तक जारी रखी। उनका मानना है कि राजस्व अधिकारी वर्ग तीन (जिमन तीन) के रिकार्ड देख लें और उनके द्वारा होती आई गलतियों को सुधार लें तो हजारों किसानों का भला हो सकता है।