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Lalitpur News: मनरेगा योजना में मजदूरों को नहीं दिया बेरोजगारी भत्ता, 8716 मजदूरों को मांगने के बाद नहीं मिला काम
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ललितपुर। मनरेगा के तहत जिले में आठ हजार मजदूरों को मांगने के बाद न तो काम मिला और न ही विभाग ने बेरोजगारी भत्ता दिया। इसके चलते मजदूरों का मनरेगा से मोहभंग हो रहा है।
मनरेगा के तहत जिले में 201864 जॉबकार्ड धारक हैं। जिसमें सक्रिय जॉबकार्ड धारकों की संख्या 149742 है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 134861 मजदूरों ने काम की मांग की। जिसमें 126145 मजदूरों को ही रोजगार दिया गया। जबकि 8716 मजदूर काम के लिए भटकते रहे।
नियम के मुताबिक मनरेगा में काम मांगने के 15 दिनों तक अगर रोजगार नहीं दिया जाता तो मजदूर को कुल मजदूरी की एक चौथाई धनराशि का हिस्सा दिया जाना चाहिए। लेकिन जनपद में अभी तक किसी को बेरोजगारी भत्ता नहीं दिया गया है। इतना ही नहीं लंबित मस्टरोल के लिए भी कुल मजदूरी का 0.05 फीसदी मजदूरों को अतिरिक्त भुगतान किया जाता है। जिले में बड़ी संख्या में मस्टरोल लंबित हैं। लेकिन मजदूरों का इसका भुगतान नहीं किया। इसमें अफसर खेल कर रहे हैं। जबकि मजदूर काम न मिलने से मनरेगा का साथ छोड़ रहे हैं।
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इस स्तर पर लंबित हैं मस्टरोल
- 1486 एमबी तकनीकि सहायक के द्वारा देरी से की गई। जबकि इसको पांच दिन के अंदर ही तैयार करना होता है।
- 103 मस्टरोल रोजगार सेवक के द्वारा ब्लॉक स्तर पर नहीं भेजे गए। जोकि छह दिन के अंदर भेजना होता है।
- 29 मस्टरोल पर एकाउंटेंट द्वारा डोंगल नहीं लगाया गया। इस कारण से यह लंबित हैं।
- 11 मस्टरोल खंड विकास अधिकारी के स्तर पर लंबित हैं।
मजदूरों की अशिक्षा का उठाया जा रहा फायदा
पंद्रह दिन तक अगर किसी मजदूर को मांग के बाद मजदूरी नहीं दी जाती है। तो वह बेरोजगारी भत्ता लेने का हकदार हो जाता है। अशिक्षा के चलते जनपद में मजदूर लिखित रूप से रोजगार की मांग नहीं करते। इस कारण से रोजगार मांगने का लिखित प्रमाण न होने से बेरोजगारी भत्ता देने से विभाग बच निकलता है।
जनपद में ऐसा एक भी मजदूर नहीं है। जिसने रोजगार मांगा हो और मस्टरोल तैयार न किया गया हो। लंबित मस्टरोलों के अतिरिक्त भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र लाई जाएगी।
- रवींद्रवीर यादव, डीसी मनरेगा, ललितपुर
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मनरेगा के तहत जिले में 201864 जॉबकार्ड धारक हैं। जिसमें सक्रिय जॉबकार्ड धारकों की संख्या 149742 है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में 134861 मजदूरों ने काम की मांग की। जिसमें 126145 मजदूरों को ही रोजगार दिया गया। जबकि 8716 मजदूर काम के लिए भटकते रहे।
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नियम के मुताबिक मनरेगा में काम मांगने के 15 दिनों तक अगर रोजगार नहीं दिया जाता तो मजदूर को कुल मजदूरी की एक चौथाई धनराशि का हिस्सा दिया जाना चाहिए। लेकिन जनपद में अभी तक किसी को बेरोजगारी भत्ता नहीं दिया गया है। इतना ही नहीं लंबित मस्टरोल के लिए भी कुल मजदूरी का 0.05 फीसदी मजदूरों को अतिरिक्त भुगतान किया जाता है। जिले में बड़ी संख्या में मस्टरोल लंबित हैं। लेकिन मजदूरों का इसका भुगतान नहीं किया। इसमें अफसर खेल कर रहे हैं। जबकि मजदूर काम न मिलने से मनरेगा का साथ छोड़ रहे हैं।
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इस स्तर पर लंबित हैं मस्टरोल
- 1486 एमबी तकनीकि सहायक के द्वारा देरी से की गई। जबकि इसको पांच दिन के अंदर ही तैयार करना होता है।
- 103 मस्टरोल रोजगार सेवक के द्वारा ब्लॉक स्तर पर नहीं भेजे गए। जोकि छह दिन के अंदर भेजना होता है।
- 29 मस्टरोल पर एकाउंटेंट द्वारा डोंगल नहीं लगाया गया। इस कारण से यह लंबित हैं।
- 11 मस्टरोल खंड विकास अधिकारी के स्तर पर लंबित हैं।
मजदूरों की अशिक्षा का उठाया जा रहा फायदा
पंद्रह दिन तक अगर किसी मजदूर को मांग के बाद मजदूरी नहीं दी जाती है। तो वह बेरोजगारी भत्ता लेने का हकदार हो जाता है। अशिक्षा के चलते जनपद में मजदूर लिखित रूप से रोजगार की मांग नहीं करते। इस कारण से रोजगार मांगने का लिखित प्रमाण न होने से बेरोजगारी भत्ता देने से विभाग बच निकलता है।
जनपद में ऐसा एक भी मजदूर नहीं है। जिसने रोजगार मांगा हो और मस्टरोल तैयार न किया गया हो। लंबित मस्टरोलों के अतिरिक्त भुगतान की प्रक्रिया शीघ्र लाई जाएगी।
- रवींद्रवीर यादव, डीसी मनरेगा, ललितपुर