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रात भर ठहर मुसाफिर, तू सवेरा कर ले
ब्यूरो
Updated Sun, 13 Dec 2015 01:13 AM IST
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ललितपुर। ललितपुर महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर 17 वें दिन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। विभिन्न शहरों से आए कवियों व कवियत्रियों के काव्य पाठ को सुनने बड़ी संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहे। कवियों ने अलग- अलग रंगों का काव्य पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
तुवन मंदिर प्रांगण में चल रहे ललितपुर महोत्सव में शनिवार को कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि भूपेंद्र जैन, बुंदेलखंड विकास सेना के हरीश कपूर टीटू, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष हरिबाबू शर्मा, विनीत चतुर्वेदी, अनिल रावत और रवि चुनगी ने दीप जलाकर किया।
इस दौरान मध्य प्रदेश के बालाघाट से आयीं लता शबनम ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘रात भर ठहर मुसाफिर तू सवेरा कर ले दिल की वीरान हवेली में बसेरा कर ले’.. गजल प्रस्तुत की। रतलाम से कमलेश दवे ने वीर रस में डूबे काव्य पाठ से मंच का माहौल जोशीला कर दिया।
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उन्होंने ‘पाकिस्तानी सेना के भेड़िए हिंदुस्तानी सेना के शेरों से डरते हैं’... कविता पढ़ी। दतिया की वीणा उपाध्याय ने ‘शाम की लाली का सिंदूर बनकर आए हो’... गजल प्रस्तुत की।
वर्तमान राजनीति व वोटर की हालत पर कटाक्ष करते सागर ग्वालियरी ने ‘कोई दामन साफ नहीं है, हर दामन पर धब्बा है, सबने मिलकर आज देेश का गोल कर दिया डब्बा है’... रचना पढ़ी तो पंडाल श्रोताओं की तालियों से गूंज उठा।
धौलुपर के बृजेंद्र चकोर ने भारत पाक के रिश्तों पर आधारित कविता ‘पाक से करो ना बात घात पर करे है घात’... पढ़ी। झांसी के डा. दिव्य पारदर्शी ने हास्य रस की कविता ‘जब हमने बहुत कोशिश की तब जाके बुढ़ापे में आशाराम बन पाए’... सुनाई। जिस पर खूब तालियां बजीं। हास्य कवि सुनील समैया बीना ने ‘गुरू का हाथ हो सिर पे बलाएं आ नहीं सकतीं’... प्रस्तुत की।
नागपुर के पुष्पक देशमुख ने ‘मैं शब्दों के अंदर वो चिंगारी लेकर चलता हूं’... गजल सुनाई। रश्मि पटैरिया उज्जैन ने महिलाओं की दशा पर आधारित ‘दुष्ट दरिंदे नारी के बस रंग रुप को देखेंगे’... पेश कर जमकर वाहवाही लूटी। कवि सम्मेलन का कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा।
इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल, अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार, पार्षद अनुराग अन्नू चौबे, पार्षद अशोक गुड्डू तिवारी, अशोक पंथ, शरीफ कुरैशी, जगदीश यादव, इदरीश राइन, अनुराग जैन शैलू, भवानी यादव, महेंद्र कुमार सिंघई, रमेश कुशवाहा, अमरदीप रजक, श्रीराम, अफजुल रहमान, भोलू, रजनीश समैया, गिरधारी यादव आदि उपस्थित रहे। संचालन दिनेश गोस्वामी ने किया।
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तुवन मंदिर प्रांगण में चल रहे ललितपुर महोत्सव में शनिवार को कवि सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि भूपेंद्र जैन, बुंदेलखंड विकास सेना के हरीश कपूर टीटू, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष हरिबाबू शर्मा, विनीत चतुर्वेदी, अनिल रावत और रवि चुनगी ने दीप जलाकर किया।
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इस दौरान मध्य प्रदेश के बालाघाट से आयीं लता शबनम ने सरस्वती वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ‘रात भर ठहर मुसाफिर तू सवेरा कर ले दिल की वीरान हवेली में बसेरा कर ले’.. गजल प्रस्तुत की। रतलाम से कमलेश दवे ने वीर रस में डूबे काव्य पाठ से मंच का माहौल जोशीला कर दिया।
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उन्होंने ‘पाकिस्तानी सेना के भेड़िए हिंदुस्तानी सेना के शेरों से डरते हैं’... कविता पढ़ी। दतिया की वीणा उपाध्याय ने ‘शाम की लाली का सिंदूर बनकर आए हो’... गजल प्रस्तुत की।
वर्तमान राजनीति व वोटर की हालत पर कटाक्ष करते सागर ग्वालियरी ने ‘कोई दामन साफ नहीं है, हर दामन पर धब्बा है, सबने मिलकर आज देेश का गोल कर दिया डब्बा है’... रचना पढ़ी तो पंडाल श्रोताओं की तालियों से गूंज उठा।
धौलुपर के बृजेंद्र चकोर ने भारत पाक के रिश्तों पर आधारित कविता ‘पाक से करो ना बात घात पर करे है घात’... पढ़ी। झांसी के डा. दिव्य पारदर्शी ने हास्य रस की कविता ‘जब हमने बहुत कोशिश की तब जाके बुढ़ापे में आशाराम बन पाए’... सुनाई। जिस पर खूब तालियां बजीं। हास्य कवि सुनील समैया बीना ने ‘गुरू का हाथ हो सिर पे बलाएं आ नहीं सकतीं’... प्रस्तुत की।
नागपुर के पुष्पक देशमुख ने ‘मैं शब्दों के अंदर वो चिंगारी लेकर चलता हूं’... गजल सुनाई। रश्मि पटैरिया उज्जैन ने महिलाओं की दशा पर आधारित ‘दुष्ट दरिंदे नारी के बस रंग रुप को देखेंगे’... पेश कर जमकर वाहवाही लूटी। कवि सम्मेलन का कार्यक्रम देर रात तक चलता रहा।
इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष जायसवाल, अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार, पार्षद अनुराग अन्नू चौबे, पार्षद अशोक गुड्डू तिवारी, अशोक पंथ, शरीफ कुरैशी, जगदीश यादव, इदरीश राइन, अनुराग जैन शैलू, भवानी यादव, महेंद्र कुमार सिंघई, रमेश कुशवाहा, अमरदीप रजक, श्रीराम, अफजुल रहमान, भोलू, रजनीश समैया, गिरधारी यादव आदि उपस्थित रहे। संचालन दिनेश गोस्वामी ने किया।