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‘पहले वरिष्ठ उसके बाद हटाएं कनिष्ठ’
lalitpur
Updated Wed, 12 Jul 2017 12:22 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
सहायक वन कर्मचारी संघ ने बुंदेलखंड जोन झांसी के वन संरक्षक को ज्ञापन भेजकर नियम विरुद्ध स्थानांतरण आदेश निरस्त करने की मांग की है। इसमें कहा गया कि पहले वरिष्ठ कर्मियों का स्थानांतरण किया जाए। उन्होंने उच्च अधिकारियों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया है।
वन विभाग में लंबे समय से डटे डिप्टी रेंजर और दरोगाओं का स्थानांतरण गैर जनपद हुआ है। इसको लेकर सहायक वन कर्मचारी संघ ने डीएफओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अध्यक्ष नरेश कुमार विदुआ ने बुंदेलखंड जोन झांसी के वन संरक्षक को भेजे ज्ञापन में आरोप लगाया है कि तबादला के लिए भेजी गई सूचना में तैनाती के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई है। इसकी वजह से वरिष्ठों की जगह कनिष्ठों के स्थानांतरण हो गए हैं। दरोगा मुवीउद्दीन से वरिष्ठ करीब 20 कर्मचारी हैं। इसी तरह कमलापत व श्रीराम निरंजन व खुद से कई वरिष्ठ कर्मचारी हैं जो उनसे पहले के तैनात हैं। इससे स्पष्ट है कि स्थानांतरण द्वेष भावना से ग्रसित होकर किए गए हैं।
नहीं हुए रिलीव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानांतरण नीति बनाते समय किसी प्रकार की कोई सिफारिश काम नहीं आने की बात कही थी। इसके बाद भी वन विभाग के स्थानांतरित कर्मियों ने आश नहीं तोड़ी है। शायद यही वजह है कि स्थानांतरित कर्मी अभी तक कार्यमुक्त नहीं हुए हैं। इस मामले में विभागीय अफसर स्थानांतरित कर्मियों के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। जिससे स्थानांतरण नीति का पालन नहीं हो पा रहा है।
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वन विभाग में लंबे समय से डटे डिप्टी रेंजर और दरोगाओं का स्थानांतरण गैर जनपद हुआ है। इसको लेकर सहायक वन कर्मचारी संघ ने डीएफओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अध्यक्ष नरेश कुमार विदुआ ने बुंदेलखंड जोन झांसी के वन संरक्षक को भेजे ज्ञापन में आरोप लगाया है कि तबादला के लिए भेजी गई सूचना में तैनाती के बारे में सही जानकारी नहीं दी गई है। इसकी वजह से वरिष्ठों की जगह कनिष्ठों के स्थानांतरण हो गए हैं। दरोगा मुवीउद्दीन से वरिष्ठ करीब 20 कर्मचारी हैं। इसी तरह कमलापत व श्रीराम निरंजन व खुद से कई वरिष्ठ कर्मचारी हैं जो उनसे पहले के तैनात हैं। इससे स्पष्ट है कि स्थानांतरण द्वेष भावना से ग्रसित होकर किए गए हैं।
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नहीं हुए रिलीव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्थानांतरण नीति बनाते समय किसी प्रकार की कोई सिफारिश काम नहीं आने की बात कही थी। इसके बाद भी वन विभाग के स्थानांतरित कर्मियों ने आश नहीं तोड़ी है। शायद यही वजह है कि स्थानांतरित कर्मी अभी तक कार्यमुक्त नहीं हुए हैं। इस मामले में विभागीय अफसर स्थानांतरित कर्मियों के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। जिससे स्थानांतरण नीति का पालन नहीं हो पा रहा है।
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