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133 साल की परंपरा टूटेगी, नहीं होगा रावण का दहन और न ही रामलीला होगी

Wed, 21 Oct 2020 01:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 21 Oct 2020 01:30 AM IST
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tradition breaked, no ravan stutue ignition and ramleela
गोविंद नगर रामलीला मैदान में खड़े रावण के पुतले(फाइल फोटो) - फोटो : LALITPUR
ललितपुर। दशहरा और विजय महोत्सव के आयोजन की 133 साल पुरानी परंपरा इस बार कोविड-19 के चलते टूट जाएगी। इस बार समितियाें द्वारा शहर में न तो रावण के पुतले का दहन कराया जाएगा और न ही रामलीला का कोई आयोजन किया जाएगा। समितियों ने गाइड लाइन के तहत आयोजन में मात्र 200 लोगों की ही मौजूदगी की शर्त होने से आयोजन नहीं कराने का निर्णय लिया है।
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नदीपुरा में गोविंदनगर स्थित रामलीला मैदान में बीते 133 वर्षों से दशहरा के दिन रावण के पुतले का दहन कर विजय महोत्सव मनाया जाता रहा है। यहां 25 वर्ष पहले तक दो भागों में 14 दिन तक मंचन किया जाता था। जिसमें श्रीरामजन्म से लेकर वन गमन और रावण दहन का मंचन किया जाता था। पहले जहां बैलगाड़ी और फिर मोर मोटर का इस्तेमाल राम-रावण युद्ध के लिए किया जाता था, वहीं अब वर्तमान में बग्घी रथों का इस्तेमाल होने लगा और समय के अनुसार आयोजन की भव्यता भी बढ़ गई। वहीं, जहां पहले दहन के लिए रावण के पुतले भी 51 फीट तक तैयार कराए जाते थे। लेकिन इस बार कोविड-19 के चलते शासन व प्रशासन द्वारा जारी गाइड लाइन के तहत आयोजन नहीं करने का निर्णय लिया गया है।
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वहीं, श्रीनृसिंह रामलीला समिति के तत्वावधान में शहर के मोहल्ला तालाबपुरा में कलाकार इस बार भी लीला की तैयारी तो कर रहे थे, लेकिन अब गाइड लाइन आने के बाद इस बार यहां भी आयोजन नहीं कराने का निर्णय लिया है।
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रामसेतु पूजन भी नहीं होगा। शासन की शर्तों के तहत दशहरा के दिन रावण दहन आयोजन संभव नहीं है। कार्यक्रम में कुछ लोगों को आमंत्रित कर बाकी को बाहर रहने का निर्णय नहीं लिया जा सकता है। इस बार रावण दहन व विजय महोत्सव का आयोजन नहीं किया जाएगा।

-बृजेश चतुर्वेदी, अध्यक्ष, श्रीरामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति।
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पूरा मैदान खुला हुआ है और ऐसे में रामलीला के आयोजन में किसी को भी आने से रोकना संभव नहीं है, जबकि यहां मैदान में 500 तक लोग एकत्रित होने की संभावना रहती है। ऐसे में समिति द्वारा इस बार की परिस्थितियों के अनुसार रामलीला नहीं कराने का निर्णय लिया है।
-नरेंद्र कड़ंकी, अध्यक्ष श्रीनृसिंह रामलीला समिति।
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