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Lalitpur News: धरती बनी है आज दुल्हन, जैसे गगन से हो रही सगाई
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साहित्यिक संस्था हिंदी, उर्दू, अदबी संगम की ओर से कवि सम्मेलन का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कौमी एकता के प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी, उर्दू, अदबी संगम के बैनर तले हरी-भरी वादियों, लहलहाते खेतों में खिले सरसों के फूलों के मध्य बने कृषि फार्म में वसंतोत्सव पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कवि सम्मेलन में कवि रामकृष्ण कुशवाहा ने सुनाया, तितलियां नाच रहीं फूलों पर, प्रकृति दे रही बधाई है, धरती बनी है आज दुल्हन जैसे गगन से हो रही सगाई है। सुमनलता शर्मा चांदनी ने गीत पेश करते हुए कहा कि पीली-पीली सरसों फूली लागो अमुआपे बौर, कोयल पपीहा शोर मचाए उपवन में नाचे मोर। शीलचंद्र शास्त्री शील ने सुनाया कि याद बहुत आता है अपना प्यारा प्यारा सा गांव, टेढ़ी-मेढ़ी से पगडंडी, वो पीपल बरगद की छांव।
महेश नामदेव मास्साब ने सुनाया कि कितने फीके पड़ गए, संबंधों के रंग, अपनी-अपनी ढोलकी अपने-अपने चंग। राधेश्याम ताम्रकार ने गजल पेश किया कि हर दिल में अपने प्यार की गंगा बहाइए, दाता सभी को प्यार से जीना सिखाइए। पलास कश्यप ने सुनाया कि सब भावों पर लगा के ताला खुद से लड़ना पड़ता है, अभिनय करना पड़ता है हमें अभिनय करना पड़ता है। सरवर हिंदुस्तानी ने कहा कि खत्म न हो जाए दोस्ती के रिश्ते दुआ सलाम रहने दो, दोस्तों के दरम्यां अस्सलामालेकुम, जय सियाराम रहने दो।
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पूर्व मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. खेमचंद वर्मा कवि ने कहा कि एक खुदा के बंदे हम, सुबह शाम याद करें, खुश रहें दुनिया हर-जन, ऐसी कोई फरियाद करें। यहां अधिवक्ता राजाराम खटीक, जलील बख्श, एमआर खान सोज आदि कवि शायरों ने भी अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। मौके पर राम प्रकाश शर्मा, नारायन सिंह यादव, संदीप, रोहित, मनीष कुशवाहा, रामसेवक, देवेंद्र यादव, मनोरमा, दीपिका आदि मौजूद रहीं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कौमी एकता के प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी, उर्दू, अदबी संगम के बैनर तले हरी-भरी वादियों, लहलहाते खेतों में खिले सरसों के फूलों के मध्य बने कृषि फार्म में वसंतोत्सव पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कवि सम्मेलन में कवि रामकृष्ण कुशवाहा ने सुनाया, तितलियां नाच रहीं फूलों पर, प्रकृति दे रही बधाई है, धरती बनी है आज दुल्हन जैसे गगन से हो रही सगाई है। सुमनलता शर्मा चांदनी ने गीत पेश करते हुए कहा कि पीली-पीली सरसों फूली लागो अमुआपे बौर, कोयल पपीहा शोर मचाए उपवन में नाचे मोर। शीलचंद्र शास्त्री शील ने सुनाया कि याद बहुत आता है अपना प्यारा प्यारा सा गांव, टेढ़ी-मेढ़ी से पगडंडी, वो पीपल बरगद की छांव।
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महेश नामदेव मास्साब ने सुनाया कि कितने फीके पड़ गए, संबंधों के रंग, अपनी-अपनी ढोलकी अपने-अपने चंग। राधेश्याम ताम्रकार ने गजल पेश किया कि हर दिल में अपने प्यार की गंगा बहाइए, दाता सभी को प्यार से जीना सिखाइए। पलास कश्यप ने सुनाया कि सब भावों पर लगा के ताला खुद से लड़ना पड़ता है, अभिनय करना पड़ता है हमें अभिनय करना पड़ता है। सरवर हिंदुस्तानी ने कहा कि खत्म न हो जाए दोस्ती के रिश्ते दुआ सलाम रहने दो, दोस्तों के दरम्यां अस्सलामालेकुम, जय सियाराम रहने दो।
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पूर्व मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. खेमचंद वर्मा कवि ने कहा कि एक खुदा के बंदे हम, सुबह शाम याद करें, खुश रहें दुनिया हर-जन, ऐसी कोई फरियाद करें। यहां अधिवक्ता राजाराम खटीक, जलील बख्श, एमआर खान सोज आदि कवि शायरों ने भी अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी। मौके पर राम प्रकाश शर्मा, नारायन सिंह यादव, संदीप, रोहित, मनीष कुशवाहा, रामसेवक, देवेंद्र यादव, मनोरमा, दीपिका आदि मौजूद रहीं।