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महरौनी में ये साथ पसंद नहीं है
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 07 Feb 2017 12:35 AM IST
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महरौनी में ये साथ पसंद नहीं है
- फोटो : demo
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ललितपुर।
विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी व कांग्रेस के गठबंधन का प्रमुख नारा यूपी को ये साथ पसंद है महरौनी में फिट नहीं बैठ रहा है। उत्तर प्रदेश में सपा व कांग्रेस खुलकर एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन महरौनी में दोनों ही पार्टियों ने अपने अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। इससे असमंजस की स्थिति है। हालांकि, पार्टी के नेता जल्द ही इस मामले के निराकरण की संभावना जता रहे हैं।
करीब दस महीने पहले सपा ने महरौनी सुरक्षित सीट से रमेश खटीक को प्रत्याशी घोषित किया था। इसके बाद रमेश खटीक लगातार अपने चुनाव क्षेत्र में सक्रिय थे। इसी बीच सपा व कांग्रेस का गठबंधन हो गया। कांग्रेस ने महरौनी सुरक्षित सीट पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी के लिए मांग ली। इस कारण रमेश खटीक के सपा प्रत्याशी बने रहने पर असमंजस हो गया।
इसी बीच सपा ने तकरीबन सभी प्रत्याशियों को सिंबल बांट दिए, लेकिन महरौनी के लिए सिंबल जारी नहीं किया। इससे माना गया कि गठबंधन के तहत महरौनी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी उतारेगी। रविवार शाम अचानक घटे घटनाक्रम में सपा के महासचिव रामगोपाल यादव ने रमेश खटीक को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बनाते हुए बी फार्म जारी कर दिया।
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वहीं कांग्रेस की ओर से बृजलाल खाबरी को सिंबल दे दिया गया। सोमवार को सबकी नजर महरौनी सीट के नामांकन को लेकर थी। उम्मीद की जा रही थी, कि शायद कोई बीच का रास्ता निकाला जाए लेकिन सपा से रमेश खटीक व कांग्रेस से बृजलाल खाबरी ने पर्चा भरकर महरौनी के चुनाव को रोचक बना दिया।
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सपा की मजबूरी
महरौनी विधानसभा सीट कांग्रेस को दिए जाने का स्थानीय सपाई जमकर विरोध कर रहे थे। विरोध के पीछे उनका तर्क है कि सपा सरकार ने महरौनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत दो नई तहसीलें मड़ावरा व पाली का निर्माण किया है। दो तहसीलों के निर्माण से क्षेत्र की जनता का रुख पार्टी के साथ है।
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कांग्रेस की मजबूरी
बसपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी को कांग्रेस पार्टी दलित नेता के तौर पर पेश कर दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में है। इसके साथ ही खाबरी के बुंदेलखंड क्षेत्र के बसपा नेताओं से अच्छे संबंधों का फायदा पार्टी को दिलाने की कोशिश चल रही है। पहले उरई क्षेत्र से खाबरी को टिकट देने के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन बात नहीं बनने पर उन्हें महरौनी सीट से उतारा गया। बुंदेलखंड में बृजलाल खाबरी बसपा के मजबूत नेता के तौर पहचाने जाते रहे। खाबरी की इन्हीं खूबियों का फायदा लेने के लिए कांग्रेस ने उन्हें महरौनी से प्रत्याशी बनाया है।
इनका कहना है
ललितपुर की दोनों सीटों पर सपा ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। पार्टी पूरी तैयारी से चुनाव लड़ रही है। महरौनी से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रमेश खटीक हैं और पूरी पार्टी उनके साथ है।
आल्हा प्रसाद निरंजन जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी
इनका कहना है
महरौनी विधानसभा सीट सपा कांग्रेस गठबंधन के तहत कांग्रेस पार्टी को दी गई है। यहां से पार्टी के प्रत्याशी बृजलाल खाबरी हैं। नौ फरवरी तक सारी स्थिति साफ हो जाएगी। दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व में बात चल रही है। महरौनी से कांग्रेस का प्रत्याशी ही गठबंधन की तरफ से चुनाव मैदान में रहेगा।
- दुुर्गा प्रसाद कुशवाहा जिलाध्यक्ष कांग्रेस
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विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी व कांग्रेस के गठबंधन का प्रमुख नारा यूपी को ये साथ पसंद है महरौनी में फिट नहीं बैठ रहा है। उत्तर प्रदेश में सपा व कांग्रेस खुलकर एक साथ चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन महरौनी में दोनों ही पार्टियों ने अपने अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए हैं। इससे असमंजस की स्थिति है। हालांकि, पार्टी के नेता जल्द ही इस मामले के निराकरण की संभावना जता रहे हैं।
करीब दस महीने पहले सपा ने महरौनी सुरक्षित सीट से रमेश खटीक को प्रत्याशी घोषित किया था। इसके बाद रमेश खटीक लगातार अपने चुनाव क्षेत्र में सक्रिय थे। इसी बीच सपा व कांग्रेस का गठबंधन हो गया। कांग्रेस ने महरौनी सुरक्षित सीट पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी के लिए मांग ली। इस कारण रमेश खटीक के सपा प्रत्याशी बने रहने पर असमंजस हो गया।
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इसी बीच सपा ने तकरीबन सभी प्रत्याशियों को सिंबल बांट दिए, लेकिन महरौनी के लिए सिंबल जारी नहीं किया। इससे माना गया कि गठबंधन के तहत महरौनी सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी उतारेगी। रविवार शाम अचानक घटे घटनाक्रम में सपा के महासचिव रामगोपाल यादव ने रमेश खटीक को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बनाते हुए बी फार्म जारी कर दिया।
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वहीं कांग्रेस की ओर से बृजलाल खाबरी को सिंबल दे दिया गया। सोमवार को सबकी नजर महरौनी सीट के नामांकन को लेकर थी। उम्मीद की जा रही थी, कि शायद कोई बीच का रास्ता निकाला जाए लेकिन सपा से रमेश खटीक व कांग्रेस से बृजलाल खाबरी ने पर्चा भरकर महरौनी के चुनाव को रोचक बना दिया।
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सपा की मजबूरी
महरौनी विधानसभा सीट कांग्रेस को दिए जाने का स्थानीय सपाई जमकर विरोध कर रहे थे। विरोध के पीछे उनका तर्क है कि सपा सरकार ने महरौनी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत दो नई तहसीलें मड़ावरा व पाली का निर्माण किया है। दो तहसीलों के निर्माण से क्षेत्र की जनता का रुख पार्टी के साथ है।
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कांग्रेस की मजबूरी
बसपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाले पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी को कांग्रेस पार्टी दलित नेता के तौर पर पेश कर दलित वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में है। इसके साथ ही खाबरी के बुंदेलखंड क्षेत्र के बसपा नेताओं से अच्छे संबंधों का फायदा पार्टी को दिलाने की कोशिश चल रही है। पहले उरई क्षेत्र से खाबरी को टिकट देने के प्रयास किए जा रहे थे, लेकिन बात नहीं बनने पर उन्हें महरौनी सीट से उतारा गया। बुंदेलखंड में बृजलाल खाबरी बसपा के मजबूत नेता के तौर पहचाने जाते रहे। खाबरी की इन्हीं खूबियों का फायदा लेने के लिए कांग्रेस ने उन्हें महरौनी से प्रत्याशी बनाया है।
इनका कहना है
ललितपुर की दोनों सीटों पर सपा ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं। पार्टी पूरी तैयारी से चुनाव लड़ रही है। महरौनी से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी रमेश खटीक हैं और पूरी पार्टी उनके साथ है।
आल्हा प्रसाद निरंजन जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी
इनका कहना है
महरौनी विधानसभा सीट सपा कांग्रेस गठबंधन के तहत कांग्रेस पार्टी को दी गई है। यहां से पार्टी के प्रत्याशी बृजलाल खाबरी हैं। नौ फरवरी तक सारी स्थिति साफ हो जाएगी। दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व में बात चल रही है। महरौनी से कांग्रेस का प्रत्याशी ही गठबंधन की तरफ से चुनाव मैदान में रहेगा।
- दुुर्गा प्रसाद कुशवाहा जिलाध्यक्ष कांग्रेस