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Lalitpur News: देवगढ़ में गुफाओं का होगा सर्वेक्षण
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ललितपुर। देवगढ़ में पहाड़ियों पर बनी अन्य गुफाओं का भी जल्द सर्वेक्षण शुरू किया जाएगा। उनमें बौद्ध गुफाओं आदि की संभावनाओं की तलाश की जाएगी।
बुंदेलखंड के ललितपुर में देवगढ़ के पास बेतवा नदी के तट पर पहाड़ियों के बीच बौद्ध गुफाएं पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं। जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर गुप्तकालीन दशावतार मंदिर के पास ये प्राचीन बौद्ध गुफाएं हैं। प्राकृतिक सौंदर्यता और पुरातत्व संपदा से भरपूर देवगढ़ में बौद्ध गुफा की खोज के बाद उसे राज्य पुरातत्व विभाग ने वर्ष 2018 में संरक्षित किया था। यहां देशभर के बौद्ध पर्यटक आते हैं।
अब पुरातत्व विभाग यहां पहाड़ियों पर अजंता, एलोरा, कलहरी के संदर्भ में अन्य प्राचीन मूर्तियों एवं गुफाओं की खोज करेगा। सर्वेक्षण किया जाएगा कि अन्य देवी देवताओं की मूर्तियाें की यह सिरीज आगे कहां तक मिलती है। पुरातत्व विभाग इसके लिए रिसर्च स्कॉलर, स्टाफ, स्थानीय जानकारों की टीम बनाएगा। गर्मी कम होने या बारिश के पहले सर्वेक्षण शुरू किया जा सकता है।
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देवगढ़ की पहाड़ियों एवं आसपास के क्षेत्रों में अजंता, एलोरा और कलहरी की तर्ज पर मूर्तियों व गुफाओं की सीरीज की खोज की जाएगी। इसके लिए रिसर्च स्कॉलर, स्थानीय गाइड आदि की टीम बनाई जाएगी।
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-मनोज कुमार यादव, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, झांसी।
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बुंदेलखंड के ललितपुर में देवगढ़ के पास बेतवा नदी के तट पर पहाड़ियों के बीच बौद्ध गुफाएं पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण हैं। जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर गुप्तकालीन दशावतार मंदिर के पास ये प्राचीन बौद्ध गुफाएं हैं। प्राकृतिक सौंदर्यता और पुरातत्व संपदा से भरपूर देवगढ़ में बौद्ध गुफा की खोज के बाद उसे राज्य पुरातत्व विभाग ने वर्ष 2018 में संरक्षित किया था। यहां देशभर के बौद्ध पर्यटक आते हैं।
अब पुरातत्व विभाग यहां पहाड़ियों पर अजंता, एलोरा, कलहरी के संदर्भ में अन्य प्राचीन मूर्तियों एवं गुफाओं की खोज करेगा। सर्वेक्षण किया जाएगा कि अन्य देवी देवताओं की मूर्तियाें की यह सिरीज आगे कहां तक मिलती है। पुरातत्व विभाग इसके लिए रिसर्च स्कॉलर, स्टाफ, स्थानीय जानकारों की टीम बनाएगा। गर्मी कम होने या बारिश के पहले सर्वेक्षण शुरू किया जा सकता है।
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देवगढ़ की पहाड़ियों एवं आसपास के क्षेत्रों में अजंता, एलोरा और कलहरी की तर्ज पर मूर्तियों व गुफाओं की सीरीज की खोज की जाएगी। इसके लिए रिसर्च स्कॉलर, स्थानीय गाइड आदि की टीम बनाई जाएगी।
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-मनोज कुमार यादव, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, झांसी।