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Lalitpur News: गढ़ौली में अब भी तेंदुए की दहशत, वन विभाग ने लगाया पहरा
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। तेंदुए को शिकारी के फंदे से भले ही आजाद करा दिया गया हो, लेकिन ग्रामीणों के कान में अभी भी तेंदुए की दहाड़ गूंज रही है। वन विभाग ने वन क्षेत्र में रेंज अफसर सहित आठ वन कर्मियों की गश्ती लगाई है, लेकिन ग्रामीणों में अब भी दहशत बनी हुई है।
तेंदुए को गढ़ौली गांव से दूर जंगलों में भेज दिया गया है, लेकिन ग्रामीणों को रात में नींद नहीं आ रही है, क्योंकि शुक्रवार की आधी रात तक उसके दहाड़ने की आवाजें गूंजती रही हैं। शुक्रवार दोपहर में देवगढ़ वन क्षेत्र के ग्राम गढ़ौली में तेंदुआ शिकारी के फंदे में फंसकर वहीं बैठ गया था। वह फंदे से बाहर नहीं निकल पा रहा था। उसकी दहाड़ सुनकर ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। जनपद मुख्यालय पर जब प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी को इसकी सूचना लगी, तो दलबल सहित वह मौके पर पहुंचे। उन्होंने कानपुर की टीम की मदद से रेस्क्यू कर देर रात तेंदुए को शिकारी के फंदे से मुक्त कराया। इसके बाद उसे देवगढ़ के घने जंगलाें में छोड़ दिया था।
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शुक्रवार को तेंदुए की दहाड़ें सुनाई दे रही थीं। शनिवार रात में भी नींद में वही चीखें सुनाई दीं, जिससे घबराकर ठीक से नींद तक नहीं आई।-कृपान सिंह, ग्राम प्रधान देवगढ़ गढ़ौली।
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रात के समय तेंदुए का खतरनाक चेहरा आंखों के सामने घूमता रहा। ऐसा आभास होता रहा कि वह गांव में प्रवेश कर गया है, इससे नींद टूट जाती थी और उठकर जानवरों के बाड़ों की तरफ नजर दौड़ानी पड़ी। -शिशुपाल, ग्रामीण।
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पूर्व में जब वन विभाग से जानवरों पर हमले की बात करते थे, तो वह तेंदुए की उपस्थिति को नकार देते थे। लेकिन, अब जब उन्होंने अपनी आंखों से उसे देख लिया है तब विश्वास हुआ है।-चंद्रपाल, ग्रामीण
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ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए रेंजर सहित आठ कर्मचारियों की नियमित गश्त लगाई गई है। अगर तेंदुआ वापस गांव की ओर आता है, तो उससे ग्रामीणों को सुरक्षा दी जा सके।
गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।
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ललितपुर। तेंदुए को शिकारी के फंदे से भले ही आजाद करा दिया गया हो, लेकिन ग्रामीणों के कान में अभी भी तेंदुए की दहाड़ गूंज रही है। वन विभाग ने वन क्षेत्र में रेंज अफसर सहित आठ वन कर्मियों की गश्ती लगाई है, लेकिन ग्रामीणों में अब भी दहशत बनी हुई है।
तेंदुए को गढ़ौली गांव से दूर जंगलों में भेज दिया गया है, लेकिन ग्रामीणों को रात में नींद नहीं आ रही है, क्योंकि शुक्रवार की आधी रात तक उसके दहाड़ने की आवाजें गूंजती रही हैं। शुक्रवार दोपहर में देवगढ़ वन क्षेत्र के ग्राम गढ़ौली में तेंदुआ शिकारी के फंदे में फंसकर वहीं बैठ गया था। वह फंदे से बाहर नहीं निकल पा रहा था। उसकी दहाड़ सुनकर ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी। जनपद मुख्यालय पर जब प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी को इसकी सूचना लगी, तो दलबल सहित वह मौके पर पहुंचे। उन्होंने कानपुर की टीम की मदद से रेस्क्यू कर देर रात तेंदुए को शिकारी के फंदे से मुक्त कराया। इसके बाद उसे देवगढ़ के घने जंगलाें में छोड़ दिया था।
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शुक्रवार को तेंदुए की दहाड़ें सुनाई दे रही थीं। शनिवार रात में भी नींद में वही चीखें सुनाई दीं, जिससे घबराकर ठीक से नींद तक नहीं आई।-कृपान सिंह, ग्राम प्रधान देवगढ़ गढ़ौली।
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रात के समय तेंदुए का खतरनाक चेहरा आंखों के सामने घूमता रहा। ऐसा आभास होता रहा कि वह गांव में प्रवेश कर गया है, इससे नींद टूट जाती थी और उठकर जानवरों के बाड़ों की तरफ नजर दौड़ानी पड़ी। -शिशुपाल, ग्रामीण।
पूर्व में जब वन विभाग से जानवरों पर हमले की बात करते थे, तो वह तेंदुए की उपस्थिति को नकार देते थे। लेकिन, अब जब उन्होंने अपनी आंखों से उसे देख लिया है तब विश्वास हुआ है।-चंद्रपाल, ग्रामीण
ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए रेंजर सहित आठ कर्मचारियों की नियमित गश्त लगाई गई है। अगर तेंदुआ वापस गांव की ओर आता है, तो उससे ग्रामीणों को सुरक्षा दी जा सके।
गौतम सिंह, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी।