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Lalitpur News: इस तिरंगे के पीछे आज सारा हिंदुस्तान चले...
Wed, 26 Jul 2023 01:09 AM IST
झांसी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, ललितपुर
Updated Wed, 26 Jul 2023 01:09 AM IST
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ललितपुर। अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद एवं लोकमान्य तिलक जन्म उत्सव के अवसर पर कौमी एकता की प्रतीक साहित्यिक संस्था हिंदी उर्दू अदबी साहित्य संस्था ने कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन किया गया। देर रात तक चले कार्यक्रम में कवियों शायरों देशभक्ति पर पूर्ण रचनाओं से एवं हास्य व्यंग श्रृंगार की रचनाएं को दिल जीत लिया।
कवि रामकिशन कुशवाहा एडवोकेट ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा सर पर कफन बांध कर देश के वीर जवान चले, तिलक लगाकर देश की मिट्टी को देने अपनी जान चले, शहीद हो जाऊं, सरहद पर तो गम मत करना, भारत माता इस तिरंगे के पीछे आज सारा हिंदुस्तान चले। डा. खेमचंद्र वर्मा ने वतन परस्ती पर रचना पेश करते हुए कहा बलिदानों की यह धरती है जिसे हम भारत कहते हैं संविधान से चलती है जिसे हम बात कहते हैं। राधे श्याम लाल ताम्रकार ने गजल पेश करते हुये कहा दुनिया है कर्म भूमि फरमाया बुजुर्गों ने इस बात को हमें समझाया बुजुर्गों ने।
सुमनलता चांदनी शर्मा ने कहा देश में जन्म लिया है उस मिर्ची के आभारी हैं हमें लाल समझाया हम भारत की नारी हैं। नामदेव अनुरागी श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा आजादी लाने में खून हमारा शामिल है। लड़ाई लडऩे आजादी की बच्चा बच्चा काबिल है। हरपाल सिंह चंदेल क्रांतिकारी शेर पढ़ा, कहां हर एक भाव तोड़ देता है। मां भारती की दुहाई रक्त रंजित तन पर बलिदान की मेहंदी रचाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे किशन सिंह बंजारा ने कहा मेरा देश भारत किसी से कम ना था ना होगा। इसे परास्त करने का किसी देश में दम ना था ना होगा। श्रोताओं में जगदीश नारायण, राजाराम खटीक, मनीष कुशवाहा, गनेश रजक, मीरा देवी, रजनी देवी, प्रेम देवी आदि मौजूद रहे। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ हास्य कवि किशन सिंह बंजारा ने की एवं मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक खेमचंद वर्मा रहे, जबकि सफल संचालन साहित्यिक संस्था के अध्यक्ष रामकिशन कुशवाहा एडवोकेट ने किया।
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कवि रामकिशन कुशवाहा एडवोकेट ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा सर पर कफन बांध कर देश के वीर जवान चले, तिलक लगाकर देश की मिट्टी को देने अपनी जान चले, शहीद हो जाऊं, सरहद पर तो गम मत करना, भारत माता इस तिरंगे के पीछे आज सारा हिंदुस्तान चले। डा. खेमचंद्र वर्मा ने वतन परस्ती पर रचना पेश करते हुए कहा बलिदानों की यह धरती है जिसे हम भारत कहते हैं संविधान से चलती है जिसे हम बात कहते हैं। राधे श्याम लाल ताम्रकार ने गजल पेश करते हुये कहा दुनिया है कर्म भूमि फरमाया बुजुर्गों ने इस बात को हमें समझाया बुजुर्गों ने।
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सुमनलता चांदनी शर्मा ने कहा देश में जन्म लिया है उस मिर्ची के आभारी हैं हमें लाल समझाया हम भारत की नारी हैं। नामदेव अनुरागी श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा आजादी लाने में खून हमारा शामिल है। लड़ाई लडऩे आजादी की बच्चा बच्चा काबिल है। हरपाल सिंह चंदेल क्रांतिकारी शेर पढ़ा, कहां हर एक भाव तोड़ देता है। मां भारती की दुहाई रक्त रंजित तन पर बलिदान की मेहंदी रचाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे किशन सिंह बंजारा ने कहा मेरा देश भारत किसी से कम ना था ना होगा। इसे परास्त करने का किसी देश में दम ना था ना होगा। श्रोताओं में जगदीश नारायण, राजाराम खटीक, मनीष कुशवाहा, गनेश रजक, मीरा देवी, रजनी देवी, प्रेम देवी आदि मौजूद रहे। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ हास्य कवि किशन सिंह बंजारा ने की एवं मुख्य अतिथि वरिष्ठ चिकित्सक खेमचंद वर्मा रहे, जबकि सफल संचालन साहित्यिक संस्था के अध्यक्ष रामकिशन कुशवाहा एडवोकेट ने किया।
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