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Lalitpur News: महर्षि वाल्मीकि का जीवन परिवर्तन प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा-प्रो. शास्त्री
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नेहरू महाविद्यालय में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में बोलते प्राचार्य प्रो. ओमप्रक
- फोटो : Department
ललितपुर। नेहरू महाविद्यालय के संस्कृत विभाग ने आदिकवि महर्षि वाल्मीकि की जयंती मनाई। इस अवसर पर ‘महर्षि वाल्मीकि का जीवन-दर्शन एवं रामायण की प्रासंगिकता’ विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई।
प्राचार्य ओमप्रकाश शास्त्री ने रामायण को मानव आचार-संहिता, जीवन जीने की कला और नैतिक मूल्यों का मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन परिवर्तन हर व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने भगवान श्रीराम के चरित्र के माध्यम से आदर्श पुत्र, भाई, मित्र और शासक के गुणों का चित्रण किया। रामायण में प्रकृति, पर्यावरण और शासन-व्यवस्था से संबंधित प्रसंग भी मिलते हैं। आशा साहू ने महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि के रूप में पूजनीय बताया। अनिल सूर्यवंशी ने वाल्मीकि के जीवन-परिवर्तन का उल्लेख करते हुए सत्संग से जीवन को श्रेष्ठ बनाने की बात कही।
रामायण पर गहन शोध की आवश्यकता
प्रीति सिरौठिया ने रामायण को आध्यात्मिक, राजनीतिक और सामाजिक अध्ययन का महत्वपूर्ण ग्रंथ कहा। दीपक पाठक ने रामायण में निहित ज्ञान पर गहन शोध की आवश्यकता जताई। सुधाकर उपाध्याय ने भरत के प्रसंगों में राज्य-संचालन और लोक कल्याण के संकेत बताए। उन्होंने संस्कृत विद्वानों से रामायण के विभिन्न पक्षों पर नवीन शोध का आह्वान किया। इस मौके पर हिमांशधर द्विवेदी, अरिमर्दन सिंह, शैलेंद्र सिंह चौहान, रामकुमार रिछारिया, धीरेंद्र तिवारी, इंजीनियर सौरभ श्रीवास्तव, इंजीनियर विपिन शुक्ला, उषा तिवारी, वर्षा साहू और फहीम वख्श उपस्थित रहे।
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प्राचार्य ओमप्रकाश शास्त्री ने रामायण को मानव आचार-संहिता, जीवन जीने की कला और नैतिक मूल्यों का मार्गदर्शक बताया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन परिवर्तन हर व्यक्ति के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने भगवान श्रीराम के चरित्र के माध्यम से आदर्श पुत्र, भाई, मित्र और शासक के गुणों का चित्रण किया। रामायण में प्रकृति, पर्यावरण और शासन-व्यवस्था से संबंधित प्रसंग भी मिलते हैं। आशा साहू ने महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि के रूप में पूजनीय बताया। अनिल सूर्यवंशी ने वाल्मीकि के जीवन-परिवर्तन का उल्लेख करते हुए सत्संग से जीवन को श्रेष्ठ बनाने की बात कही।
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रामायण पर गहन शोध की आवश्यकता
प्रीति सिरौठिया ने रामायण को आध्यात्मिक, राजनीतिक और सामाजिक अध्ययन का महत्वपूर्ण ग्रंथ कहा। दीपक पाठक ने रामायण में निहित ज्ञान पर गहन शोध की आवश्यकता जताई। सुधाकर उपाध्याय ने भरत के प्रसंगों में राज्य-संचालन और लोक कल्याण के संकेत बताए। उन्होंने संस्कृत विद्वानों से रामायण के विभिन्न पक्षों पर नवीन शोध का आह्वान किया। इस मौके पर हिमांशधर द्विवेदी, अरिमर्दन सिंह, शैलेंद्र सिंह चौहान, रामकुमार रिछारिया, धीरेंद्र तिवारी, इंजीनियर सौरभ श्रीवास्तव, इंजीनियर विपिन शुक्ला, उषा तिवारी, वर्षा साहू और फहीम वख्श उपस्थित रहे।
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