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Lalitpur News: तत्कालीन बंदोबस्त अधिकारी ने की थी दोबारा चक बनाने की सिफारिश

Sat, 21 Sep 2024 01:29 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 21 Sep 2024 01:29 AM IST
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The then settlement officer had recommended re-building the chak.
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। बानपुर में हुई चकबंदी में चल रही जांच में एक अहम बिंदु सामने आया है। यहां चकबंदी प्रस्तावित हुए करीब 35 साल हो गए। पच्चीस साल पहले प्रक्रिया प्रारंभ की गई। 15 साल पहले चकों का निर्धारण किया गया। इतना लंबा समय बीतने के कारण लोगों ने अपनी जमीन में फलदार पेड़, बोरिंग व मकान बना लिए। तत्कालीन बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी डीके गुप्ता ने वर्ष 2016 में पुन: चक निर्धारण की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन जिलाधिकारी ने इसे न मानते हुए चकबंदी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आदेश कर दिया। अब कई समस्याएं सामने आ रही हैं।
बानपुर में चकबंदी में गड़बड़ी व वहां की समस्याओं के निस्तारण के लिए मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे को निर्देश दिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद मंडलायुक्त ने विगत दिनों जनपद स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक की थी। बानपुर में कैंप लगाकर समस्याओं को सुना था। अब जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के आदेश पर बानपुर में 15 दिनों तक कैंप लगाकर उपजिलाधिकारी व चकबंदी अधिकारी की मौजूदगी में समस्याओं को सुना जाएगा। इसके बाद उनका निस्तारण किया जाएगा।
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करीब 35 साल पहले बानपुर को चकबंदी में लिया गया था। 1999 में इस गांव में चकबंदी प्रक्रिया प्रारंभ की गई। 2009 में बानपुर में चक बनाने का कार्य प्रारंभ किया गया। करीब 6500 चक बनाए गए। 2016 में तत्कालीन चकबंदी अधिकारी डीके गुप्ता ने चक के पुन: निर्धारण की सिफारिश की थी। लेकिन, तत्कालीन जिलाधिकारी ने उनकी सिफारिश न मानते हुए चकबंदी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के आदेश जारी किए। मई 2024 में जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी के आदेश पर पैमाइश शुरू की गई। इसके बाद यहां विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। ग्रामीणों ने चकों को मनमाने तरीके से बनाने का आरोप लगाया। चकबंदी विभाग के कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
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बिना अनुमति लोगों ने अपने भूमि पर किया कार्य
शासनदेश के अनुसार एक बार जो गांव चकबंदी में आ जाता है, उसमें कोई भी काश्तकार अपनी भूमि पर बिना चकबंदी विभाग की अनुमति के बोरिंग, कुआं, आवास व फलदार पेड़ नहीं लगा सकता है। लंबी प्रक्रिया होने के कारण कई कृषकों ने अपनी भूमि पर बोरिंग, नलकूप, कुआं, आवास व फलदार पेड़ लगा लिए, जिसे विभागीय चक में नहीं दर्शाए गए हैं।

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चकबंदी प्रक्रिया लंबी होने के कारण लोगों ने बिना अनुमति के अपनी भूमि पर नलकूप, पेड़ व आवास बना लिया, जो चक में दर्ज नहीं हैं। चक संबंधी समस्याओं का निस्तारण शीघ्र कर किसानों को सौंपे जाएंगे। जिलाधिकारी के निर्देश पर बानपुर में कैंप लगाकर किसानों की समस्याओं को सुना जा रहा है।
राकेश कुमार, बंदोबस्त अधिकारी, चकबंदी।
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