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Lalitpur News: नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाने में तत्कालीन प्रधान को साढ़े पांच वर्ष की सजा

Sat, 27 Sep 2025 10:10 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 27 Sep 2025 10:10 PM IST
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The then headman was sentenced to five and a half years in prison for abetting the suicide of a minor.
- छेड़छाड़ के बाद नाबालिग ने आरोपी के चबूतरे पर ही आग लगाकर कर ली थी आत्महत्या
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संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। तालबेहट क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग से छेड़छाड़ कर उसे आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में दोषी पाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पाॅक्सो) नवनीत कुमार भारती की अदालत ने तत्कालीन ग्राम प्रधान अशोक यादव को दोषी पाते हुए साढ़े पांच वर्ष के कठोर कारावास और 43 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। वहीं, तत्कालीन प्रधान की पत्नी को भी मारपीट में एक वर्ष की सजा सुनाई है।
कोतवाली तालबेहट क्षेत्र अंतर्गत एक गांव निवासी व्यक्ति ने पांच वर्ष पहले कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि चार अप्रैल 2020 को शाम लगभग सात बजे वह अपने दरवाजे पर बैठा था। उसकी पंद्रह वर्षीय बेटी प्रधान के घर पर गई थी। प्रधान ने उसकी बेटी को पकड़ लिया, जिस पर वह चिल्लाई तो प्रधान की पत्नी आ गई और उसकी बेटी को छुड़वाया। उसकी पत्नी ने उसकी बेटी से कहा कि यह बात किसी को मत बताना। तो उसकी बेटी ने कहा कि वह घर पर बता देगी। जिस पर प्रधान व उसकी पत्नी ने उसकी बेटी से कहा वे उसे व उसके बाप को मारकर फिकवा देंगे। इसके बाद उसकी बेटी ने प्रधान के घर के पीछे बने चबूतरा पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। इस पर प्रधान उसके घर आया और कहा कि उसकी बेटी को आग लग गई है। इसके बाद वे लोग मौके पर गए तो देखा उसकी बेटी पड़ी थी और उसके ऊपर कंबल पड़ा था। इस पर वे बेटी को तुरंत जिला अस्पताल ललितपुर प्रधान व उसकी पत्नी के साथ उन्हीं की गाड़ी में लेकर गए थे। वहां से झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया था। जिस पर उसे मेडिकल कॉलेज झांसी ले गए। झांसी में उसकी बेटी होश में आई तो उसने व चिकित्सक को घटना बताई थी। इस मामले में तालबेहट पुलिस ने प्रधान व उसकी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी थी। इसके बाद नाबालिग की उपचार के दौरान ग्वालियर में मौत हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने आत्महत्या को उकसाने की धारा में बढ़ोतरी की थी। उसके उपरांत पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिए थे, तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। खास बात यह है कि इस मामले में अभियुक्ता की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता सीमा कुशवाहा पैरवी कर रही थी, जिस पर यह मामला चर्चा का विषय बन गया था। अब न्यायाधीश ने इस मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए आरोपी तत्कालीन प्रधान को नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में दोषी पाते हुए साढ़े पांच वर्ष के कठोर कारावास और कुल 43 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर चार माह का अतिरिक्त का कारावास भी भुगतना होगा। वहीं, न्यायालय ने नाबालिग से मारपीट का दोषी पाते हुए तत्कालीन प्रधान की पत्नी को एक वर्ष के साधारण कारावास और दो हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर पंद्रह दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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विशेष लोक अभियोजक नरेंद्र सिंह गौर ने बताया कि तत्कालीन ग्राम प्रधान को नाबालिग को आत्महत्या के लिए उकसाने और छेड़छाड़ की धाराओं में न्यायालय ने सजा सुनाई है। यह मामला पांच वर्ष पुराना है। इसमें आरोपी तत्कालीन ग्राम प्रधान रहा है और घटना के बाद से ही जेल में था।
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