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सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे शिक्षा मित्र
ललितपुर ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2015 12:24 AM IST
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ललितपुर। शिक्षा मित्रों ने उच्च न्यायालय इलाहाबाद केे आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का मन बना लिया है। शिक्षा मित्र न केवल सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, बल्कि सोमवार से शिक्षण कार्य का बहिष्कार भी करेंगे। रविवार को उन्होंने विभिन्न संघों का समर्थन हासिल कर सड़कों पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्णय के बाद से वह कहीं के नहीं रहे।
गत दिवस उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने शिक्षा मित्रों को समायोजित कर उन्हें सहायक अध्यापक बनाने के फैसले को असंवैधानिक करार दिया था। इसके बाद से शिक्षा मित्रों का आक्रोश शांत नहीं हो रहा है। रविवार को उन्होंने शिक्षक संघों का समर्थन लेकर घंटाघर प्रांगण में प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षा मित्र अपने हाथों में काली पट्टे बांधे थे। शिक्षा मित्र यहां से प्रदर्शन करते हुए सीधे कंपनी बाग पहुंचे। जहां उन्होंने बैठक कर अगली रणनीति पर विचार विमर्श किया। शिक्षा मित्रों के प्रतिनिधियों ने कहा कि अब अगली लड़ाई केंद्र सरकार से लड़नी होगी। उन्होंने टीईटी की बाध्यता होने पर अपना ऐतराज व्यक्त किया। कार्य बहिष्कार के मामले में शिक्षा मित्र बंटे नजर आए। कई शिक्षा मित्रों ने अपने ही नेताओं के कामकाज पर अंगुलियां उठाई तो कई शिक्षा मित्र नेताओं ने शिक्षक संघों पर असहयोग करने का आरोप लगाया। इस दौरान एक संघ के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक हुई, जिसमें जिलाध्यक्ष भगवत बैस ने कहा कि शिक्षा मित्र सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके अतिरिक्त चौदह सितंबर से कार्य बहिष्कार करने का भी निर्णय लिया गया है। बताया गया कि बुधवार को लखनऊ में प्रदेश स्तरीय बैठक होने जा रही है, जिसमें अगली रणनीति का खुलासा होगा। बैठक में कुलदीप गोस्वामी, श्रीनारायण पांडे, राजेश नारायण तिवारी, रेखा लिटौरिया, वीरपाल सिंह, धर्मेंद्र सिंह, सुधीर शर्मा, गोविंद दुबे, मनोहर सिंह बुंदेला, योगेंद्र सिंह, संजय सिंह, हरिराम कुशवाहा, नंदराम यादव, राघवेंद्र सिंह, सुरेंद्र यादव, सूर्यप्रताप आदि उपस्थित रहे।
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इन्होंने दिया समर्थन
प्राथमिक शिक्षक संघ, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, बुंदेलखंड विकास सेना, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय किसान यूनियन ने शिक्षा मित्रों के आंदोलन को समर्थन दिया है।
......
यह रहे शामिल
शिक्षक नेताओं में राजेश लिटौरिया, विनोद निरंजन, अरुण गोस्वामी, शकुंतला कुशवाहा, नीरज चतुर्वेदी, अजमल खान, राजेश साध, चंद्रशेखर पंथ और गौरव गौतम आदि शामिल रहे।
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एक मंच पर आने को तैयार नहीं शिक्षक संघ
विभिन्न शिक्षक संघ शिक्षा मित्रों के साथ तो खड़े दिखाई दिए। लेकिन, सभी शिक्षक संघों के गुटों के नेता एक साथ नजर नहीं आए। एक गुट आया तो दूसरा गुट चला गया। दिन भर यह चलता रहा।
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गत दिवस उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने शिक्षा मित्रों को समायोजित कर उन्हें सहायक अध्यापक बनाने के फैसले को असंवैधानिक करार दिया था। इसके बाद से शिक्षा मित्रों का आक्रोश शांत नहीं हो रहा है। रविवार को उन्होंने शिक्षक संघों का समर्थन लेकर घंटाघर प्रांगण में प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षा मित्र अपने हाथों में काली पट्टे बांधे थे। शिक्षा मित्र यहां से प्रदर्शन करते हुए सीधे कंपनी बाग पहुंचे। जहां उन्होंने बैठक कर अगली रणनीति पर विचार विमर्श किया। शिक्षा मित्रों के प्रतिनिधियों ने कहा कि अब अगली लड़ाई केंद्र सरकार से लड़नी होगी। उन्होंने टीईटी की बाध्यता होने पर अपना ऐतराज व्यक्त किया। कार्य बहिष्कार के मामले में शिक्षा मित्र बंटे नजर आए। कई शिक्षा मित्रों ने अपने ही नेताओं के कामकाज पर अंगुलियां उठाई तो कई शिक्षा मित्र नेताओं ने शिक्षक संघों पर असहयोग करने का आरोप लगाया। इस दौरान एक संघ के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।
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आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक हुई, जिसमें जिलाध्यक्ष भगवत बैस ने कहा कि शिक्षा मित्र सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके अतिरिक्त चौदह सितंबर से कार्य बहिष्कार करने का भी निर्णय लिया गया है। बताया गया कि बुधवार को लखनऊ में प्रदेश स्तरीय बैठक होने जा रही है, जिसमें अगली रणनीति का खुलासा होगा। बैठक में कुलदीप गोस्वामी, श्रीनारायण पांडे, राजेश नारायण तिवारी, रेखा लिटौरिया, वीरपाल सिंह, धर्मेंद्र सिंह, सुधीर शर्मा, गोविंद दुबे, मनोहर सिंह बुंदेला, योगेंद्र सिंह, संजय सिंह, हरिराम कुशवाहा, नंदराम यादव, राघवेंद्र सिंह, सुरेंद्र यादव, सूर्यप्रताप आदि उपस्थित रहे।
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इन्होंने दिया समर्थन
प्राथमिक शिक्षक संघ, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, बुंदेलखंड विकास सेना, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय किसान यूनियन ने शिक्षा मित्रों के आंदोलन को समर्थन दिया है।
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यह रहे शामिल
शिक्षक नेताओं में राजेश लिटौरिया, विनोद निरंजन, अरुण गोस्वामी, शकुंतला कुशवाहा, नीरज चतुर्वेदी, अजमल खान, राजेश साध, चंद्रशेखर पंथ और गौरव गौतम आदि शामिल रहे।
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एक मंच पर आने को तैयार नहीं शिक्षक संघ
विभिन्न शिक्षक संघ शिक्षा मित्रों के साथ तो खड़े दिखाई दिए। लेकिन, सभी शिक्षक संघों के गुटों के नेता एक साथ नजर नहीं आए। एक गुट आया तो दूसरा गुट चला गया। दिन भर यह चलता रहा।