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प्रेशर हार्न की कानफोड़ू आवाज से मरीज बेचैन
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जिला अस्पताल -संवाद
- फोटो : LALITPUR
ललितपुर। शहर के साइलेंट जोन (ध्वनि मुक्त क्षेत्रों) में प्रेशर हार्न लगे वाहनों की कानफोड़ू आवाज से मरीजों के साथ आम लोग भी परेशान हैं। सहालग में डीजे ध्वनि प्रदूषण फैला रहे हैं। इसके बावजूद इस पर रोक नहीं लग पा रही है।
शहर में जिला अस्पताल परिसर, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक आवास, कलक्ट्रेट, न्यायालय, न्यायाधीश आवास, स्कूल व कॉलेज के आसपास के क्षेत्रों को साइलेंट जोन माना जाता है। इन क्षेत्रों को पूरी तरह से ध्वनि मुक्त घोषित किया गया है। यहां पर डीजे बजाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद साइलेंट जोन में न तो डीजे और न ही प्रेशर हॉर्न बजाने पर पूरी तरह रोक लग पा रही है। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल के सामने वाली सड़क से गुजरने वाले वाहन चालक खुलेआम प्रेशर हॉर्न बजा रहे हैं। ऐसे में अस्पताल में भर्ती मरीज परेशान हो रहे हैं। तेज आवाज से ब्लड प्रेशर के मरीजों को परेशानी हो जाती है। वहीं, सामान्य लोगों को भी डीजे व प्रेशन हॉर्न से बेचैनी होने लगती है। यही नहीं जिला महिला अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात को भी यहां भर्ती किया जाता है। ऐसे में इन बच्चों के कानों पर असर पड़ने का खतरा रहता है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरपीसिंह ने बताया कि प्रेशर हॉर्न से ब्लड प्रेशर, हार्ट के मरीजों को अधिक समस्या होती है। कई बार मरीजों को दिल का दौड़ा पड़ सकता है। इसके अलावा कानों के पर्दे खराब होने का भी खतरा रहता है। मरीज ही नहीं सामान्य लोगों के कानों पर भी असर पड़ता है।
सड़क के पास है हार्ट सेंटर
चिकित्सकों द्वारा डीजे व प्रेशर हॉर्न से हार्ट के मरीजों को अधिक समस्या बताई जाती है। लेकिन जिला अस्पताल में सड़क किनारे ही हार्ट सेंटर है, जहां पर हार्ट के मरीजों को भर्ती किया जाता है। ऐसे में मरीजों को दौरा पड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है।
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जिला अस्पताल के आसपास के क्षेत्र को साइलेंट जोन में रखा गया है। यहां पर डीजे व प्रेशर हॉर्न बजाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
टीटी हॉर्न का करें प्रयोग
वाहनों पर प्रेशर हॉर्न लगाने पर प्रतिबंध है। ऐसे में वाहन स्वामी व चालक टीटी हॉर्न का प्रयोग करें। प्रेशर हॉर्न न लगवाएं। प्रेशर हॉर्न लगाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- अभिनेंद्र सिंह, यातायात प्रभारी
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शहर में जिला अस्पताल परिसर, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक आवास, कलक्ट्रेट, न्यायालय, न्यायाधीश आवास, स्कूल व कॉलेज के आसपास के क्षेत्रों को साइलेंट जोन माना जाता है। इन क्षेत्रों को पूरी तरह से ध्वनि मुक्त घोषित किया गया है। यहां पर डीजे बजाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है। वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद साइलेंट जोन में न तो डीजे और न ही प्रेशर हॉर्न बजाने पर पूरी तरह रोक लग पा रही है। जिला अस्पताल व महिला अस्पताल के सामने वाली सड़क से गुजरने वाले वाहन चालक खुलेआम प्रेशर हॉर्न बजा रहे हैं। ऐसे में अस्पताल में भर्ती मरीज परेशान हो रहे हैं। तेज आवाज से ब्लड प्रेशर के मरीजों को परेशानी हो जाती है। वहीं, सामान्य लोगों को भी डीजे व प्रेशन हॉर्न से बेचैनी होने लगती है। यही नहीं जिला महिला अस्पताल में प्रसव के बाद नवजात को भी यहां भर्ती किया जाता है। ऐसे में इन बच्चों के कानों पर असर पड़ने का खतरा रहता है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरपीसिंह ने बताया कि प्रेशर हॉर्न से ब्लड प्रेशर, हार्ट के मरीजों को अधिक समस्या होती है। कई बार मरीजों को दिल का दौड़ा पड़ सकता है। इसके अलावा कानों के पर्दे खराब होने का भी खतरा रहता है। मरीज ही नहीं सामान्य लोगों के कानों पर भी असर पड़ता है।
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सड़क के पास है हार्ट सेंटर
चिकित्सकों द्वारा डीजे व प्रेशर हॉर्न से हार्ट के मरीजों को अधिक समस्या बताई जाती है। लेकिन जिला अस्पताल में सड़क किनारे ही हार्ट सेंटर है, जहां पर हार्ट के मरीजों को भर्ती किया जाता है। ऐसे में मरीजों को दौरा पड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। इसके बाद भी इस पर रोक नहीं लग पा रही है।
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जिला अस्पताल के आसपास के क्षेत्र को साइलेंट जोन में रखा गया है। यहां पर डीजे व प्रेशर हॉर्न बजाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
- डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
टीटी हॉर्न का करें प्रयोग
वाहनों पर प्रेशर हॉर्न लगाने पर प्रतिबंध है। ऐसे में वाहन स्वामी व चालक टीटी हॉर्न का प्रयोग करें। प्रेशर हॉर्न न लगवाएं। प्रेशर हॉर्न लगाने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- अभिनेंद्र सिंह, यातायात प्रभारी