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अत्याचारियों का अंत बुरा होता है : आरती किशोरी
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जखौरा/ललितपुर। जखौरा क्षेत्र के ग्राम किसलवास में चौथे दिन श्रीमद्भागवत में कथा व्यास ने भक्त प्रहलाद चरित्र की कथा सुनाई। कथा व्यास ने कहा कि अत्याचारियों का अंत बुरा होता है।
वृंदावन से आईं कथा व्यास आरती ने कहा कि हिरण्यकश्यप एक शक्तिशाली असुर राजा के बेटे भक्त प्रहलाद थे और हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु का कट्टर शत्रु था। लेकिन, प्रहलाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। हिरण्यकश्यप प्रहलाद को भगवान विष्णु की पूजा करने से रोकने की कोशिश करता था। उसने प्रहलाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार भगवान विष्णु ने प्रहलाद की रक्षा की। अंत में भगवान ने नृसिंह अवतार लिया और हिरण्यकश्यप का वध किया। हिरण्यकश्यप ने ब्रह्माजी से अमर होने का वरदान मांगा था, लेकिन ब्रह्माजी ने उसे अमरता का वरदान देने से इनकार कर दिया। तब हिरण्यकश्यप ने ऐसा वरदान मांगा कि उसे कोई भी मनुष्य, देवता, असुर या जानवर न दिन में, न रात में, न घर के अंदर, न बाहर, न किसी अस्त्र से, न किसी शस्त्र से न मार सके। हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने का फैसला किया। उसने प्रहलाद को पहाड़ से नीचे फिंकवाया, विष पिलाया, और उसे आग में जलाने की कोशिश की, लेकिन हर बार भगवान विष्णु ने प्रहलाद की रक्षा की।
जब हिरण्यकश्यप के पाप का घड़ा भर गया, तब भगवान विष्णु नृसिंह के रूप में प्रकट हुए, जो आधे मनुष्य और आधे शेर थे। हिरण्यकश्यप को खंभे के पास पकड़ा, उसे अपनी जांघों पर लिटाकर अपने नाखूनों से उसका वध कर दिया। इस प्रकार भगवान विष्णु ने प्रहलाद की रक्षा की और हिरण्यकश्यप के अत्याचारों का अंत किया। इस अवसर पर कथा यजमान लीला देवी, वीरन सिंह राजपूत आदि उपस्थित रहे।
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वृंदावन से आईं कथा व्यास आरती ने कहा कि हिरण्यकश्यप एक शक्तिशाली असुर राजा के बेटे भक्त प्रहलाद थे और हिरण्यकश्यप भगवान विष्णु का कट्टर शत्रु था। लेकिन, प्रहलाद भगवान विष्णु के परम भक्त थे। हिरण्यकश्यप प्रहलाद को भगवान विष्णु की पूजा करने से रोकने की कोशिश करता था। उसने प्रहलाद को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन हर बार भगवान विष्णु ने प्रहलाद की रक्षा की। अंत में भगवान ने नृसिंह अवतार लिया और हिरण्यकश्यप का वध किया। हिरण्यकश्यप ने ब्रह्माजी से अमर होने का वरदान मांगा था, लेकिन ब्रह्माजी ने उसे अमरता का वरदान देने से इनकार कर दिया। तब हिरण्यकश्यप ने ऐसा वरदान मांगा कि उसे कोई भी मनुष्य, देवता, असुर या जानवर न दिन में, न रात में, न घर के अंदर, न बाहर, न किसी अस्त्र से, न किसी शस्त्र से न मार सके। हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मारने का फैसला किया। उसने प्रहलाद को पहाड़ से नीचे फिंकवाया, विष पिलाया, और उसे आग में जलाने की कोशिश की, लेकिन हर बार भगवान विष्णु ने प्रहलाद की रक्षा की।
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जब हिरण्यकश्यप के पाप का घड़ा भर गया, तब भगवान विष्णु नृसिंह के रूप में प्रकट हुए, जो आधे मनुष्य और आधे शेर थे। हिरण्यकश्यप को खंभे के पास पकड़ा, उसे अपनी जांघों पर लिटाकर अपने नाखूनों से उसका वध कर दिया। इस प्रकार भगवान विष्णु ने प्रहलाद की रक्षा की और हिरण्यकश्यप के अत्याचारों का अंत किया। इस अवसर पर कथा यजमान लीला देवी, वीरन सिंह राजपूत आदि उपस्थित रहे।
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