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Lalitpur News: श्रीराम-केवट संवाद की लीला ने मन मोहा, दशरथ मरण पर नम हुईं आंखें
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नाव में बैठाने से पहले भगवान राम के पैर धौते केवट
महरौनी। रामलीला महोत्सव के आठवें दिवस शृंगवेरपुर प्रवास, श्री राम-केवट संवाद, सुमंत विलाप और दशरथ मरण की लीला का मंचन हुआ। इस भावपूर्ण लीला के दर्शन करके दर्शक भावविभोर हो गए। मंचन में राम, लक्ष्मण और सीता की भेंट भीलों के राजा निषादराज से हुई।
निषादराज ने अपने जंगल क्षेत्र में प्रभु का भावपूर्वक स्वागत सत्कार किया। शृंगवेरपुर प्रवास के बाद राम, लक्ष्मण और सीता आगे वन पथ पर प्रस्थान करते हैं। अगले दृश्य में श्री राम गंगा तट पर पहुंचे। उन्होंने अपने साथ आए सुमंत को रथ सहित अयोध्या वापस लौटा दिया। गंगा पार जाने के लिए केवट ने नाव में बैठाने से पहले श्री राम, लक्ष्मण और सीता के चरण धुलाए। राम ने अपने भक्त केवट के सिर पर हाथ रखकर उन्हें आशीष दिया। केवट ने कहा कि आज आप मेरे घाट पर आए तो मैंने आपको पार उतारा है। उन्होंने आगे कहा कि जब मैं आपके घाट आऊं तो आप मुझे भवसागर से पार लगा देना। भक्त केवट के यह विचार सुनकर राम हर्षित हुए और उन्हें आशीर्वाद देकर आगे बढ़े।
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चित्रकूट प्रवास और सुमंत का विलाप
राम क्रमशः मुनि भरद्वाज और वाल्मीकि के आश्रम में गए। उन्होंने ऋषियों का आशीर्वाद पाकर चित्रकूट में प्रवास किया। वहीं दुखी मन से अयोध्या की ओर वापस लौट रहे सुमंत ने रास्ते में एक जगह रथ रोका और करुण विलाप किया। राम को पुकारते हुए दशरथ ने अपने प्राण त्याग दिए। सुमंत विलाप और दशरथ मरण की लीला देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं। लीला मंचन से पहले आरती रमेशचंद्र पांडेय और उनके नाती बबुआ पांडेय ने, मध्यक्रम की आरती रामकुमार रावत के सुपुत्र पार्थ रावत ने उतारी।
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निषादराज ने अपने जंगल क्षेत्र में प्रभु का भावपूर्वक स्वागत सत्कार किया। शृंगवेरपुर प्रवास के बाद राम, लक्ष्मण और सीता आगे वन पथ पर प्रस्थान करते हैं। अगले दृश्य में श्री राम गंगा तट पर पहुंचे। उन्होंने अपने साथ आए सुमंत को रथ सहित अयोध्या वापस लौटा दिया। गंगा पार जाने के लिए केवट ने नाव में बैठाने से पहले श्री राम, लक्ष्मण और सीता के चरण धुलाए। राम ने अपने भक्त केवट के सिर पर हाथ रखकर उन्हें आशीष दिया। केवट ने कहा कि आज आप मेरे घाट पर आए तो मैंने आपको पार उतारा है। उन्होंने आगे कहा कि जब मैं आपके घाट आऊं तो आप मुझे भवसागर से पार लगा देना। भक्त केवट के यह विचार सुनकर राम हर्षित हुए और उन्हें आशीर्वाद देकर आगे बढ़े।
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चित्रकूट प्रवास और सुमंत का विलाप
राम क्रमशः मुनि भरद्वाज और वाल्मीकि के आश्रम में गए। उन्होंने ऋषियों का आशीर्वाद पाकर चित्रकूट में प्रवास किया। वहीं दुखी मन से अयोध्या की ओर वापस लौट रहे सुमंत ने रास्ते में एक जगह रथ रोका और करुण विलाप किया। राम को पुकारते हुए दशरथ ने अपने प्राण त्याग दिए। सुमंत विलाप और दशरथ मरण की लीला देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं। लीला मंचन से पहले आरती रमेशचंद्र पांडेय और उनके नाती बबुआ पांडेय ने, मध्यक्रम की आरती रामकुमार रावत के सुपुत्र पार्थ रावत ने उतारी।
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