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Lalitpur News: रिश्वत लेने वाले वन दरोगा को कोर्ट ने भेजा जेल
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ललितपुर। अन्य जनपदों की मंडी में महुआ ले जाने के लिए अभिवहन परमिट (टीपी) बनवाने के नाम पर साढ़े छह हजार रुपये की रिश्वत लेने वाले वन दरोगा को बुधवार को भ्रष्टाचार न्यायालय में पेश किया गया। उसे जेल भेज दिया गया।
कोतवाली अंतर्गत सिविल लाइन निवासी जितेंद्र कुमार जैन ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की थी। बताया था कि किसानों से खरीदे गए महुआ को अन्य जनपदों की मंडी तक पहुंचाने के लिए आवश्यक ट्रांजिट परमिट (अभिवहन परमिट) देने के नाम पर उप संभागीय कार्यालय वन विभाग में तैनात वन दरोगा राजकुमार तिवारी ने साढ़े छह हजार रुपये की रिश्वत मांगी है। भ्रष्टाचार निवारण इकाई झांसी की ट्रैप टीम निरीक्षक चतुर सिंह के नेतृत्व में मंगलवार शाम को जनपद पहुंची। टीम ने वन दरोगा राजकुमार को उनके कार्यालय में ही व्यापारी जितेंद्र कुमार से 6500 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया था।
ट्रैप टीम के निरीक्षक चतुर सिंह की तहरीर पर काेतवाली सदर पुलिस ने आरोपी वन दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया। मंगलवार देर रात एंटी करप्शन टीम आरोपी को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गई थी। बुधवार को वन दरोगा को भ्रष्टाचार न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों ने आरोपी दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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शुल्क जमा करने के बाद मांगी थी रिश्वत
व्यापारी जितेंद्र कुमार के अनुसार महुआ से लदे ट्रकों को गैर जनपदों में भेजने के लिए टीपी (अभिवहन परमिट) की जरूरत होती है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। इसका शुल्क ट्रक के भार के अनुसार स्वतः निर्धारित होता है। व्यापारी जितेंद्र ने टीपी (अभिवहन परमिट) के लिए आवेदन किया था और प्रभागीय वन अधिकारी कार्यालय के कर्मचारी को टीपी शुल्क के रूप में ऑनलाइन 2280 रुपये जमा भी कर दिया था। लेकिन, टीपी देने के एवज में वन दरोगा राजकुमार तिवारी 6500 रुपये की रिश्वत मांग रहा था। मांग पूरी न करने पर वन संपदा से लदे ट्रकों का चालान करने की बात कह रहा था।
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वन दरोगा के अतिरिक्त था स्टेनो का जिम्मा
रिश्वत लेते पकड़ा गया राजकुमार तिवारी वन दरोगा के अतिरिक्त कार्यालय प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग में स्टेनो का भी कार्यभार संभाले था। यहीं से वह पूरा काम कर रहा था।
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कोतवाली अंतर्गत सिविल लाइन निवासी जितेंद्र कुमार जैन ने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की थी। बताया था कि किसानों से खरीदे गए महुआ को अन्य जनपदों की मंडी तक पहुंचाने के लिए आवश्यक ट्रांजिट परमिट (अभिवहन परमिट) देने के नाम पर उप संभागीय कार्यालय वन विभाग में तैनात वन दरोगा राजकुमार तिवारी ने साढ़े छह हजार रुपये की रिश्वत मांगी है। भ्रष्टाचार निवारण इकाई झांसी की ट्रैप टीम निरीक्षक चतुर सिंह के नेतृत्व में मंगलवार शाम को जनपद पहुंची। टीम ने वन दरोगा राजकुमार को उनके कार्यालय में ही व्यापारी जितेंद्र कुमार से 6500 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया था।
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ट्रैप टीम के निरीक्षक चतुर सिंह की तहरीर पर काेतवाली सदर पुलिस ने आरोपी वन दरोगा के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया। मंगलवार देर रात एंटी करप्शन टीम आरोपी को लेकर लखनऊ के लिए रवाना हो गई थी। बुधवार को वन दरोगा को भ्रष्टाचार न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। वहीं, वन विभाग के अधिकारियों ने आरोपी दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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शुल्क जमा करने के बाद मांगी थी रिश्वत
व्यापारी जितेंद्र कुमार के अनुसार महुआ से लदे ट्रकों को गैर जनपदों में भेजने के लिए टीपी (अभिवहन परमिट) की जरूरत होती है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। इसका शुल्क ट्रक के भार के अनुसार स्वतः निर्धारित होता है। व्यापारी जितेंद्र ने टीपी (अभिवहन परमिट) के लिए आवेदन किया था और प्रभागीय वन अधिकारी कार्यालय के कर्मचारी को टीपी शुल्क के रूप में ऑनलाइन 2280 रुपये जमा भी कर दिया था। लेकिन, टीपी देने के एवज में वन दरोगा राजकुमार तिवारी 6500 रुपये की रिश्वत मांग रहा था। मांग पूरी न करने पर वन संपदा से लदे ट्रकों का चालान करने की बात कह रहा था।
वन दरोगा के अतिरिक्त था स्टेनो का जिम्मा
रिश्वत लेते पकड़ा गया राजकुमार तिवारी वन दरोगा के अतिरिक्त कार्यालय प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी प्रभाग में स्टेनो का भी कार्यभार संभाले था। यहीं से वह पूरा काम कर रहा था।