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Lalitpur News: मृतक लाइसेंस धारकों के असलहा कर रहे अपने वारिसों का इंतजार

Mon, 23 Jun 2025 12:33 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 23 Jun 2025 12:33 AM IST
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The arms of the deceased license holders are waiting for their heirs
ललितपुर। एक समय बंदूक शान की चीज मानी जाती थी, लेकिन अब युवा पीढ़ी का इससे मोहभंग हो रहा है। यही कारण है कि विरासत में अपने बाप-दादा के असलहे लेना उनके बच्चों को रास नहीं आ रहा है। थानों में ऐसे 225 असलहे जमा हैं, जिन्हें लाइसेंस धारकों के मरने के बाद उनके वारिस लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
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एक दशक पहले तक असलहों का उपयोग अपनी रक्षा के लिए कम, दिखावे के लिए अधिक होता था। शादी व अन्य समारोह में असलहा ले जाना लोग समाज में अपनी शान समझते थे। जिनके पास असलहा होता था, उन्हें लोग विशेष सत्कार देते थे। साथ ही हर्ष फायरिंग भी शान समझा जाता था। हर्ष फायरिंग से हादसे होने के बाद सरकार ने इस पर रोक लगा दी। साथ ही असलहों के प्रदर्शन पर भी प्रतिबंध लगा दिया। शिक्षा के प्रचार-प्रसार के कारण भी नई पीढ़ी में असलहों के प्रति आकर्षण कम हो गया। यही कारण है कि पुराने लाइसेंस धारकों के मरने के बाद सैकड़ों शस्त्र थानों में जमा हैं। लाइसेंस धारकों के वारिस असलहा लेने के लिए लाइसेंस बनवाने में रुचि नहीं ले रहे हैं।
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थाने में जमा करने के लिए अब लगते 100 रुपये
विरासत में लाइसेंस न बनवाने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि प्रत्येक चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू होते ही असलहा धारकों को अनिवार्य रूप से थानों में शस्त्र जमा करना होता है। साथ उन्हें 100 रुपये का चालान बैंक में सरकार के खाते में जमा करना होता है। पहले फ्री में असलहे जमा होते थे। इसके साथ ही विशेष परिस्थिति में शांतिभंग की धारा के समय भी असलहा जमा करना होता है। इसके अलावा जनपद स्तर पर एक भी कारतूस की दुकान नहीं है। कारतूस लेने के लिए गैर जनपद जाना होता है।
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सीमा बंधन होने के कारण भी लोग नहीं ले रहे रुचि
जनपद की सीमाएं तीन ओर से मध्यप्रदेश से घिरी हुई हैं, जबकि अधिकांश लाइसेंस एक प्रदेश के लिए बनते हैं। यहां के लोगों की अधिकांश रिश्तेदारी व व्यापार मध्यप्रदेश में है, इसके लिए उन्हें आए दिन जाना होता है। वहीं, दूसरे प्रदेश की अनुमति शासनस्तर से मिलना टेढ़ी खीर है। घर पर असलहा छोड़ना भी खतरे से खाली नहीं रहता। इसलिए भी लोग असलहा लेने में रुचि नहीं ले रहे।
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थानों में ये है असलहा की स्थिति
थाना - जमा असलहे
सदर कोतवाली - 81
बानपुर - 105
मड़ावरा - 05
पाली - 04
तालबेहट - 14
बार - 14
पूराकलां - 02
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जो लाइसेंस धारक मर जाते हैं, उनके असलहे थानों में जमा करा दिए जाते हैं। फिर विरासत के आधार पर लाइसेंस बनाकर उनके वारिसों को दे दिए जाते हैं। वर्तमान में विरासत के लाइसेंस के आवेदन कम आ रहे हैं।
मनीष कुमार, उपजिलाधिकारी/ प्रभारी अधिकारी शस्त्र।
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