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ढाई महीने में शुरू नहीं हो पाई ग्यारह प्रकरणों की जांच
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- फोटो : teacher1.
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ललितपुर। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधि मंडल ने सीडीओ को 11 सूत्रीय प्रकरणों की जांच से संबंधित ज्ञापन सौंपा। इसमें आरोप लगाया कि ढाई महीना गुजरने के बाद भी जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार पांडेय को दिए ज्ञापन में बताया कि माह जुलाई में जिलाधिकारी ने 11 प्रकरणों की जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी को जांच के लिए नामित किया था। लगभग ढाई माह गुजरने के बाद भी अभी तक कोई जांच शुरू नहीं हो सकी। सीडीओ को पुन: जांच करने के की मांग के संबंध में अवगत कराया है। इसमें पुस्तकों की ढुलाई में भी व्यापक घालमेल किया गया है।
आरोप है कि शासन द्वारा आवंटित लाखों की धनराशि का कोई हिसाब किताब नहीं है, जबकि पुस्तकों की ढुलाई विद्यालय तक स्वयं शिक्षकों द्वारा की गई है। शासन के निर्देशानुसार शिक्षक संकुल की तैनाती नहीं करते हुए मनमाने तरीके से अपने चहेते शिक्षकों की खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा तैनाती कर दी गई। एक ही परिसर में स्थापित विद्यालयों के संविलियन के संबंध में मनमानी की गई है। इसमें मसौरा खुर्द ब्लॉक जखौरा एवं नगर क्षेत्र अंतर्गत चंडी माता मंदिर का संविलियन गलत तरीके से किया गया। वहीं, पूर्व माध्यमिक विद्यालय एवं प्राथमिक विद्यालय सिवनी ब्लॉक जखौरा तथा डीसी रोड तालबेहट एक ही परिसर में स्थापित होने के उपरांत भी उनका संविलियन नहीं किया गया। एक कंप्यूटर ऑपरेटर की अनियमितताओं की जांच भी पूरी नहीं हो पाई है। इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी मड़ावरा एवं तालबेहट जांच अधिकारी होने के बाद चुप हैं। वर्तमान में 110 शिक्षक ऐसे हैं, जिनका वेतनमान अपने साथ के शिक्षकों से काफी कम हैं। एक शिक्षक कई साल से कार्यालय में संबद्ध है,जिसे हटाने के लिए जिलाधिकारी ने आदेश भी किया है। चयन वेतनमान की कई पत्रावली कार्यालय में पड़ी हैं। दिल्ली से आई सेवा प्रदाता संस्था द्वारा समस्त ब्लॉकों के कंप्यूटर ऑपरेटर एवं लेखाकार एवं ऐसे कर्मियों का संविदा पर गुपचुप तरीके से चयन कर लिया गया है। कुछ ऐसे अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया, जिन पर जांच चल रही है। एक वर्ष पूर्व छात्रों को वितरित की गई निशुल्क ड्रेस की 50 प्रतिशत धनराशि प्राथमिक विद्यालयों में आज तक अप्राप्त है। एक शिक्षक द्वारा एआरपी के चयन हेतु सामाजिक विषय से आवेदन किया गया था, पर उसका चयन अंग्रेजी विषय में कर लिया गया है। कम्पोजिट ग्रान्ट भेजने में भी मनमाने की गई है। शैक्षिक सत्र 2018- 19 व 2019 -20 में छात्र संख्या 100 से अधिक होने के बाद भी केवल 25000 रुपये भेजे गए। वहीं, उच्च प्राथमिक विद्यालय कालोथरा, पिपरिया बन्शा, पचौरा (महरौनी) एवं प्राथमिक विद्यालय मड़ावरा आदि में छात्र संख्या 100 से कम होने के बावजूद भी कंपोजिट ग्रांट की धनराशि 50,000 भेजी गई है। प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष राजेश लिटौरिया, अरुण गोस्वामी, संतोष रजक, हेमंत तिवारी आदि उपस्थित रहे।
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मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार पांडेय को दिए ज्ञापन में बताया कि माह जुलाई में जिलाधिकारी ने 11 प्रकरणों की जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी को जांच के लिए नामित किया था। लगभग ढाई माह गुजरने के बाद भी अभी तक कोई जांच शुरू नहीं हो सकी। सीडीओ को पुन: जांच करने के की मांग के संबंध में अवगत कराया है। इसमें पुस्तकों की ढुलाई में भी व्यापक घालमेल किया गया है।
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आरोप है कि शासन द्वारा आवंटित लाखों की धनराशि का कोई हिसाब किताब नहीं है, जबकि पुस्तकों की ढुलाई विद्यालय तक स्वयं शिक्षकों द्वारा की गई है। शासन के निर्देशानुसार शिक्षक संकुल की तैनाती नहीं करते हुए मनमाने तरीके से अपने चहेते शिक्षकों की खंड शिक्षा अधिकारियों द्वारा तैनाती कर दी गई। एक ही परिसर में स्थापित विद्यालयों के संविलियन के संबंध में मनमानी की गई है। इसमें मसौरा खुर्द ब्लॉक जखौरा एवं नगर क्षेत्र अंतर्गत चंडी माता मंदिर का संविलियन गलत तरीके से किया गया। वहीं, पूर्व माध्यमिक विद्यालय एवं प्राथमिक विद्यालय सिवनी ब्लॉक जखौरा तथा डीसी रोड तालबेहट एक ही परिसर में स्थापित होने के उपरांत भी उनका संविलियन नहीं किया गया। एक कंप्यूटर ऑपरेटर की अनियमितताओं की जांच भी पूरी नहीं हो पाई है। इस मामले में खंड शिक्षा अधिकारी मड़ावरा एवं तालबेहट जांच अधिकारी होने के बाद चुप हैं। वर्तमान में 110 शिक्षक ऐसे हैं, जिनका वेतनमान अपने साथ के शिक्षकों से काफी कम हैं। एक शिक्षक कई साल से कार्यालय में संबद्ध है,जिसे हटाने के लिए जिलाधिकारी ने आदेश भी किया है। चयन वेतनमान की कई पत्रावली कार्यालय में पड़ी हैं। दिल्ली से आई सेवा प्रदाता संस्था द्वारा समस्त ब्लॉकों के कंप्यूटर ऑपरेटर एवं लेखाकार एवं ऐसे कर्मियों का संविदा पर गुपचुप तरीके से चयन कर लिया गया है। कुछ ऐसे अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया, जिन पर जांच चल रही है। एक वर्ष पूर्व छात्रों को वितरित की गई निशुल्क ड्रेस की 50 प्रतिशत धनराशि प्राथमिक विद्यालयों में आज तक अप्राप्त है। एक शिक्षक द्वारा एआरपी के चयन हेतु सामाजिक विषय से आवेदन किया गया था, पर उसका चयन अंग्रेजी विषय में कर लिया गया है। कम्पोजिट ग्रान्ट भेजने में भी मनमाने की गई है। शैक्षिक सत्र 2018- 19 व 2019 -20 में छात्र संख्या 100 से अधिक होने के बाद भी केवल 25000 रुपये भेजे गए। वहीं, उच्च प्राथमिक विद्यालय कालोथरा, पिपरिया बन्शा, पचौरा (महरौनी) एवं प्राथमिक विद्यालय मड़ावरा आदि में छात्र संख्या 100 से कम होने के बावजूद भी कंपोजिट ग्रांट की धनराशि 50,000 भेजी गई है। प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष राजेश लिटौरिया, अरुण गोस्वामी, संतोष रजक, हेमंत तिवारी आदि उपस्थित रहे।
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