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जीवित रहते शिक्षक को नहीं मिली बहाली
lalitpur
Updated Wed, 29 Jun 2016 01:51 AM IST
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शिक्ष्ाक
- फोटो : demo pic
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ललितपुर। विकासखंड जखौरा के अंतर्गत पूर्व माध्यमिक विद्यालय सौंरई के निलंबित प्रधानाध्यापक की 10 मई को सड़क दुर्घटना में हुई मौत के बाद भी प्रधानाध्यापक को अब तक विभाग द्वारा बहाली नहीं दी गई है। इस पर पत्नी ने एससी/ एसटी आयोग सहित शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजा है, ेिजससे बीएसए कार्यालय में खलबली मची है।
ज्ञातव्य है कि पिछले साल ड्रेस वितरण में गड़बड़ी के मामले में एक दर्जन प्रधानाध्यापक और इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को निलंबित किया गया था। इसमें एक दिव्यांग इंचार्ज प्रधानाध्यापक भी शामिल है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय सौंरई के प्रधानाध्यापक लालचंद्र अहिरवार को जांच पूरी होने के बाद भी बहाली नहीं दी गई। इसी दौरान उनकी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। बहाली का मामला एससी/ एसटी आयोग में दस्तक दे चुका है।
वहीं, कमोवेश यही स्थिति पूर्व माध्यमिक विद्यालय बुधनी सहायक अध्यापक पंचम सिंह की है। वह 22 जून 2015 से निलंबित चल रहे है। लेकिन, उन्हें अभी तक बहाली नहीं मिल सकी है, जबकि जांच अधिकारी पहले ही अपनी जांच आख्या प्रस्तुत कर चुके हैं।
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शिक्षक की पत्नी वती ने एससी/ एसटी आयोग व शिक्षा अफसरों को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उनके पति दस मई को बहाली कराने के लिए बीएसए कार्यालय गए थे। इस दौरान वहां पर अनुचित मांग की गई, जिससे वह तनाव में आ गए और घर वापस आते समय उनकी वाहन दुर्घटना में मौत हो गई। पीड़ित महिला ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस शिकायती पत्र से शिक्षा अफसरों में खलबली मच गई है। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेेशक गंगा सिंह राजपूत ने बीएसए से जवाब-तलब किया है। जिस पर बीएसए संतोष कुमार राय ने खंड शिक्षा अधिकारी बार संतोष कुमार वर्मा से स्थलीय जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।
.......
बहाली में फंसा पेच
प्रधानाध्यापक लालचंद्र अहिरवार की बहाली में पेच फंस गया है। पत्नी के शिकायती पत्र पर जांचोपरांत ही उसे बहाली दी जा सकेगी।
......
बहाली के अभाव में अटके एरियर
प्रधानाध्यापक लालचंद्र के परिवार को एरियर एवं किसी सदस्य को अनुकंपा नौकरी तब तक नहीं दी जा सकती, जब तक कि उसे बहाल नहीं किया जाता। जानकारों का कहना है कि कर्मी की मृत्यु के बाद सारे आरोप बेअसर हो जाते हैं और उसे बहाल कर दिया जाता है। लेकिन, विभाग ने जून माह गुजरने के बाद भी ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे विभागीय अफसरों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।
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ज्ञातव्य है कि पिछले साल ड्रेस वितरण में गड़बड़ी के मामले में एक दर्जन प्रधानाध्यापक और इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को निलंबित किया गया था। इसमें एक दिव्यांग इंचार्ज प्रधानाध्यापक भी शामिल है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय सौंरई के प्रधानाध्यापक लालचंद्र अहिरवार को जांच पूरी होने के बाद भी बहाली नहीं दी गई। इसी दौरान उनकी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई है। बहाली का मामला एससी/ एसटी आयोग में दस्तक दे चुका है।
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वहीं, कमोवेश यही स्थिति पूर्व माध्यमिक विद्यालय बुधनी सहायक अध्यापक पंचम सिंह की है। वह 22 जून 2015 से निलंबित चल रहे है। लेकिन, उन्हें अभी तक बहाली नहीं मिल सकी है, जबकि जांच अधिकारी पहले ही अपनी जांच आख्या प्रस्तुत कर चुके हैं।
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शिक्षक की पत्नी वती ने एससी/ एसटी आयोग व शिक्षा अफसरों को भेजे शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि उनके पति दस मई को बहाली कराने के लिए बीएसए कार्यालय गए थे। इस दौरान वहां पर अनुचित मांग की गई, जिससे वह तनाव में आ गए और घर वापस आते समय उनकी वाहन दुर्घटना में मौत हो गई। पीड़ित महिला ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इस शिकायती पत्र से शिक्षा अफसरों में खलबली मच गई है। मंडलीय सहायक शिक्षा निदेेशक गंगा सिंह राजपूत ने बीएसए से जवाब-तलब किया है। जिस पर बीएसए संतोष कुमार राय ने खंड शिक्षा अधिकारी बार संतोष कुमार वर्मा से स्थलीय जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है।
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बहाली में फंसा पेच
प्रधानाध्यापक लालचंद्र अहिरवार की बहाली में पेच फंस गया है। पत्नी के शिकायती पत्र पर जांचोपरांत ही उसे बहाली दी जा सकेगी।
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बहाली के अभाव में अटके एरियर
प्रधानाध्यापक लालचंद्र के परिवार को एरियर एवं किसी सदस्य को अनुकंपा नौकरी तब तक नहीं दी जा सकती, जब तक कि उसे बहाल नहीं किया जाता। जानकारों का कहना है कि कर्मी की मृत्यु के बाद सारे आरोप बेअसर हो जाते हैं और उसे बहाल कर दिया जाता है। लेकिन, विभाग ने जून माह गुजरने के बाद भी ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे विभागीय अफसरों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।