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15 वर्षों से लापता सुखराम गांव लौटा, परिजनों में खुशी की लहर
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बांसी (ललितपुर)। थाना बार के अंतर्गत ग्राम हीरापुर निवासी गनपत यादव का पुत्र सुखराम यादव 15 वर्ष पहले सितंबर 2005 में बांसी से लापता हो गया था। उस समय सुखराम बांसी में नवीं कक्षा में पढ़ता था। 9 दिसंबर को एकाएक उनके लौटने से परिजनों और गांव में खुशी की लहर है। सुखराम हीरापुरा गांव एवं अपने गुरु राजाराम यादव अच्छे भैया को तलाशते हुए हीरापुर गांव पहुंचा था। जहां परिवारवालों एवं गांववालों ने उसे पहचान लिया। वर्षों से लापता सुखराम को देख परिवार वाले काफी खुश हुए। लेकिन सुखराम को अभी भी पुरानी स्मृतियां पूरी तरह याद नहीं है।
परिजनों के अनुसार गायब होने से दो माह पहले ही सुखराम की शादी अपने भाई की साली के साथ तालबेहट के टैकरी गांव में हुई थी। सुखराम चार भाई हैं। भाइयों में सुखराम सबसे छोटा है। परिवार वालों के बहुत तलाशने के बाद भी सुखराम नहीं मिल सका था। सुखराम की पत्नी भी करीब 4 वर्ष तक सुखराम के लौटने का इंतजार करती रही, लेकिन सुखराम के न लौटने पर उसने दूसरी शादी कर ली।
सुखराम ने बताया कि जब वह बांसी पढ़ने गया था, तब कुछ साधु वेषधारी उसे उठा ले गए थे, जब उसे होश आया तो वह चित्रकूट कर्बी में एक माता के मंदिर में था, लेकिन उसे कुछ याद नहीं आ रहा था। शायद उन साधु वेषधारियों ने उसे कोई ऐसी चीज खिला दी थी, जिससे उसकी याददाश्त चली गई थी। मंदिर के संचालक ने सुखराम के गांव घर और परिवार वालों तक पहुंचने के बहुत प्रयास किए, लेकिन मंदिर संचालक को सफलता नहीं मिली थी। उसी ने कुछ समय पर बेटे की तरह रखा।
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पालने वाले ने दिया मनीष जायसवाल नाम, आधार कार्ड भी है
मंदिर संचालक ने सुखराम को अपने पास रखा। कुछ दिन बाद वहीं के नारायण जायसवाल नाम के व्यक्ति ने सुखराम को अपने परिवार के सदस्य की तरह रखा। लगभग 4 वर्ष बाद सुखराम कुछ मित्रों साथ के गुजरात चला गया और वहां कार्य करने लगा। सुखराम ने वहीं शादी कर ली और उसका एक पुत्र है। सुखराम के पास मनीष जायसवाल के नाम का आधार कार्ड है, जिस पर पिता का नाम नारायण जायसवाल है।
सपने में हीरापुर गांव और गुरुजी आते थे
उसने बताया कि उसे सपने में हीरापुर-हनुपुरा और अच्छे भैया आते थे। वह चित्रकूट जा रहा था, तो झांसी से अचानक उसके मन में हीरापुर आने की सूझी और वह मोबाइल की लोकेशन से बांसी आ गया। बांसी में अपने गुरु अच्छे भैया और हीरापुर-हनुपुरा गांव का पता तलाशता हुआ हीरापुर गांव पहुंच गया। गुरुजी अच्छे भैया के बारे में सुखराम को गांववालों ने बताया कि उसके गुरुजी अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं, इससे सुखराम बेहद दुखी हुआ। इसके बाद परिवारवालों एवं गांव वालों से मिलकर सुखराम गुजरात चला गया। उसने सबसे कहा जल्द ही वह पत्नी और बच्चों सहित अपने गांव वापस आएगा। सुखराम और घर वाले अब उसके संपर्क में है।
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परिजनों के अनुसार गायब होने से दो माह पहले ही सुखराम की शादी अपने भाई की साली के साथ तालबेहट के टैकरी गांव में हुई थी। सुखराम चार भाई हैं। भाइयों में सुखराम सबसे छोटा है। परिवार वालों के बहुत तलाशने के बाद भी सुखराम नहीं मिल सका था। सुखराम की पत्नी भी करीब 4 वर्ष तक सुखराम के लौटने का इंतजार करती रही, लेकिन सुखराम के न लौटने पर उसने दूसरी शादी कर ली।
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सुखराम ने बताया कि जब वह बांसी पढ़ने गया था, तब कुछ साधु वेषधारी उसे उठा ले गए थे, जब उसे होश आया तो वह चित्रकूट कर्बी में एक माता के मंदिर में था, लेकिन उसे कुछ याद नहीं आ रहा था। शायद उन साधु वेषधारियों ने उसे कोई ऐसी चीज खिला दी थी, जिससे उसकी याददाश्त चली गई थी। मंदिर के संचालक ने सुखराम के गांव घर और परिवार वालों तक पहुंचने के बहुत प्रयास किए, लेकिन मंदिर संचालक को सफलता नहीं मिली थी। उसी ने कुछ समय पर बेटे की तरह रखा।
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पालने वाले ने दिया मनीष जायसवाल नाम, आधार कार्ड भी है
मंदिर संचालक ने सुखराम को अपने पास रखा। कुछ दिन बाद वहीं के नारायण जायसवाल नाम के व्यक्ति ने सुखराम को अपने परिवार के सदस्य की तरह रखा। लगभग 4 वर्ष बाद सुखराम कुछ मित्रों साथ के गुजरात चला गया और वहां कार्य करने लगा। सुखराम ने वहीं शादी कर ली और उसका एक पुत्र है। सुखराम के पास मनीष जायसवाल के नाम का आधार कार्ड है, जिस पर पिता का नाम नारायण जायसवाल है।
सपने में हीरापुर गांव और गुरुजी आते थे
उसने बताया कि उसे सपने में हीरापुर-हनुपुरा और अच्छे भैया आते थे। वह चित्रकूट जा रहा था, तो झांसी से अचानक उसके मन में हीरापुर आने की सूझी और वह मोबाइल की लोकेशन से बांसी आ गया। बांसी में अपने गुरु अच्छे भैया और हीरापुर-हनुपुरा गांव का पता तलाशता हुआ हीरापुर गांव पहुंच गया। गुरुजी अच्छे भैया के बारे में सुखराम को गांववालों ने बताया कि उसके गुरुजी अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं, इससे सुखराम बेहद दुखी हुआ। इसके बाद परिवारवालों एवं गांव वालों से मिलकर सुखराम गुजरात चला गया। उसने सबसे कहा जल्द ही वह पत्नी और बच्चों सहित अपने गांव वापस आएगा। सुखराम और घर वाले अब उसके संपर्क में है।