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अजब जांच : हर किसी के रक्त में हीमोग्लोबिन आ रहा शून्य
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ललितपुर। मेडिकल कॉलेज में उपचार तो दूर जांच तक सही नहीं हो पा रही है। यहां बच्चे से लेकर युवाओं तक के रक्त की जांच रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन शून्य बताया गया। रिपोर्ट देखकर मरीज-तीमारदार परेशान हो गए। वहीं, विभागीय कर्मियों में खलबली मच गई।
पैथोलाॅजी में इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब संचालित है। विभाग में प्रोफेसर से लेकर विशेषज्ञ व अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। इसके बाद भी जांच रिपोर्ट सही नहीं मिल पा रही है। इसका खुलासा जब हुआ, जब कुछ रिपोर्ट में मरीजों का हीमोग्लोबिन शून्य अंकित मिला। डॉक्टर इसके पीछे तकनीकी खामी बता रहे हैं।
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केस-एक
एक सितंबर को आठ वर्षीय बालिका प्रियंका को चिकित्सक ने रक्त की जांच कराने की सलाह दी। परिजन ने लंबी कतार में लगकर पंजीयन कराया। सैंपल दिलवाकर रिपोर्ट का इंतजार किया। दोपहर बाद रिपोर्ट मिली तो हीमोग्लोबिन शून्य अंकित था।
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केस-दो
चार सितंबर को 24 वर्षीय युवक अर्पित ने चिकित्सीय परामर्श पर जांच कराई। पैथोलॉजी में सैंपल देकर अपने घर पर चला गया। अगले दिन पांच सितंबर को रिपोर्ट लेने पहुंचा। रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन शून्य देखकर वह परेशान हो गया। इसके बाद दोबारा सैंपल दिया।
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कुछ मरीजों की जांच में हीमोग्लोबिन शून्य होने की जानकारी मिली थी। मशीन में तकनीकी खामी के चलते ऐसा हुआ है। कमी दूर कराई जा रही है।- डॉ. मयंक कुमार शुक्ला, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज
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पैथोलाॅजी में इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब संचालित है। विभाग में प्रोफेसर से लेकर विशेषज्ञ व अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। इसके बाद भी जांच रिपोर्ट सही नहीं मिल पा रही है। इसका खुलासा जब हुआ, जब कुछ रिपोर्ट में मरीजों का हीमोग्लोबिन शून्य अंकित मिला। डॉक्टर इसके पीछे तकनीकी खामी बता रहे हैं।
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केस-एक
एक सितंबर को आठ वर्षीय बालिका प्रियंका को चिकित्सक ने रक्त की जांच कराने की सलाह दी। परिजन ने लंबी कतार में लगकर पंजीयन कराया। सैंपल दिलवाकर रिपोर्ट का इंतजार किया। दोपहर बाद रिपोर्ट मिली तो हीमोग्लोबिन शून्य अंकित था।
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केस-दो
चार सितंबर को 24 वर्षीय युवक अर्पित ने चिकित्सीय परामर्श पर जांच कराई। पैथोलॉजी में सैंपल देकर अपने घर पर चला गया। अगले दिन पांच सितंबर को रिपोर्ट लेने पहुंचा। रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन शून्य देखकर वह परेशान हो गया। इसके बाद दोबारा सैंपल दिया।
कुछ मरीजों की जांच में हीमोग्लोबिन शून्य होने की जानकारी मिली थी। मशीन में तकनीकी खामी के चलते ऐसा हुआ है। कमी दूर कराई जा रही है।- डॉ. मयंक कुमार शुक्ला, प्रधानाचार्य, मेडिकल कॉलेज