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जेपीसी सौर ऊर्जा प्लांट का कार्य बढ़ा
Lalitpur
Updated Sat, 13 Jan 2018 12:37 AM IST
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- फोटो : demo
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जाखलौन पंप केनाल की नहर पर प्रस्तावित छह मेगावाट सौर ऊर्जा पावर प्लांट फाइलों से कुछ आगे बढ़ना शुरू हो गया है। विद्युत विभाग के ग्रामीण एक्सईएन ने उच्चाधिकारियों को पंप केनाल के संबंध में टैक्नीकल फिजिविलिटी रिपोर्ट भेजी है। ताकि प्लांट स्थापित होने के बाद पंप केनाल में उपयोग के बाद बची हुई बिजली विभाग द्वारा ली जा सके। हालांकि मॉडल और डिजाइन में देरी होने की वजह से यहां सौर ऊर्जा प्लांट की स्थापना अटकी हुई है।
जाखलौन पंप केनाल को सौर ऊर्जा से संचालित करने और जमीन की बचत करने के उद्देश्य से सिंचाई विभाग द्वारा नहर के ठीक ऊपर सोलर ऊर्जा प्लांट की स्थापना का कार्य जाना है। यहां दो यूनिटों से करीब छह मेगावाट बिजली उत्पादन किया जाना प्रस्तावित है। बेेतवा नदी किनारे बंदरगुढ़ा में पहाड़ी पर करीब डेढ़ सौ फीट ऊंचाई पर स्थापित जाखलौन पंप केनाल के संचालन से लगभग 34 किलोमीटर लंबी नहर के माध्यम से करीब एक सैकड़ा गांवों को खेतों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। नहर संचालन के लिए यहां छह पंप स्थापित हैं। लेकिन आए दिन बिजली वोल्टेज या फिर बिजली की कमी के कारण सभी छह पंपों का संचालन नियमित नहीं हो पाता है। इससे नहर कई बार पूरी क्षमता के साथ संचालित नहीं हो पाती है और नहर का पानी अधिकांशत: टेल वाले गांवों तक नहीं पहुंच पाता है। इसके चलते सिंचाई विभाग द्वारा शासन की योजना के तहत नहर पर एक जेपीसी चलने योग्य कम क्षमता का सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करना प्रस्तावित किया गया। ताकि जाखलौन पंप केनाल के सुचारु संचालन में बिजली की बाधा उत्पन्न न हो सके और किसानों को समय से सिंचाई के लिए केनाल का पानी उपलब्ध कराया जा सके। सिंचाई विभाग निर्माण खंड द्वितीय द्वारा जेपीसी की नहर पर सोलर ऊर्जा प्लांट की स्थापना के लिए यहां 3.42 मेगावाट और 2.50 मेगावाट क्षमता की दो यूनिटें बनाई जानी है। छह मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट बनाने में अनुमानित राशि करीब सात करोड़ रुपये बताई गई है। यह प्लांट नहर के ऊपर स्थापित किया जाएगा, इसमें नहर से पानी भी बहता रहेगा और नहर के ऊपर बने ढांचे पर सोलर प्लांट की प्लेटों से सोलर ऊर्जा का उत्पादन भी होता रहेगा। यह प्लांट नहर पर करीब आठ किलोमीटर क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। सोलर प्लांट की स्थापना के लिए यहां सिंचाई विभाग निर्माण खंड के अधिकारियों की देखरेख में पूर्व में नहर पर स्थापित मॉडल और डिजाइन में मामूली बदलाव भी किया गया है। लेकिन अभी भी यहां एक वर्ष से अधिक समय से मात्र कागजी प्रक्रिया तक ही सीमित है। इसी प्रक्रिया के तहत अब बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता ग्रामीण आकाश सचान ने अपने उच्चाधिकारियों को एक टीएफआर रिपोर्ट (टैक्नीकल फिजिविलिटी रिपोर्ट) भेजी है। इस रिपोर्ट में सौर ऊर्जा प्लांट में उत्पादित बिजली के केनाल के उपयोग के बाद बची हुई बिजली को ग्रिड में उपयोग की जानकारी दी जाती है और इसके बाद ही सिंचाई विभाग अब बिजली केनाल पर स्थापित होने वाले सौर ऊर्जा प्लांट से उत्पादित बिजली के रेट निर्धारित करेंगे। हालांकि इसके लिए सोलर कंपनी द्वारा पूर्व में नहर के दोनों ओर पैनल लगाने के लिए गड्ढे खोदनेे का कार्य शुरू कर दिया था। और एक स्विच यार्ड भी बनाया जा रहा था। लेकिन डिजाइन और मॉडल में बदलाव के कारण यह कार्य फिलहाल पूर्व की स्थिति में ही है।
60 मेगावाट सौर ऊर्जा का हो रहा उत्पादन
ललितपुर। जनपद में उक्त प्लांट के अलावा वर्तमान में महरौनी खुर्द और अमरपुर स्थित 10-10 मेगावाट के तीन सौर ऊर्जा प्लांट से 30 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। वहीं तहसील महरौनी अंतर्गत ग्राम पठा विजयपुरा में दस मेगावाट और ग्राम बारचौन में 20 मेगावाट के सोलर ऊर्जा प्लांट से भी 30 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। इस प्रकार जनपद में पांच सौर ऊर्जा प्लांट के माध्यम से वर्तमान में 60 मेेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।
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जाखलौन पंप केनाल की नहर पर करीब छह मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा प्लांट की दो यूनिटों की स्थापना सिंचाई विभाग द्वारा कराया जा रहा है। फिजीविलिटी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
- आकाश सचान, अधिशासी अभियंता विद्युत ग्रामीण।
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जाखलौन पंप केनाल को सौर ऊर्जा से संचालित करने और जमीन की बचत करने के उद्देश्य से सिंचाई विभाग द्वारा नहर के ठीक ऊपर सोलर ऊर्जा प्लांट की स्थापना का कार्य जाना है। यहां दो यूनिटों से करीब छह मेगावाट बिजली उत्पादन किया जाना प्रस्तावित है। बेेतवा नदी किनारे बंदरगुढ़ा में पहाड़ी पर करीब डेढ़ सौ फीट ऊंचाई पर स्थापित जाखलौन पंप केनाल के संचालन से लगभग 34 किलोमीटर लंबी नहर के माध्यम से करीब एक सैकड़ा गांवों को खेतों में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है। नहर संचालन के लिए यहां छह पंप स्थापित हैं। लेकिन आए दिन बिजली वोल्टेज या फिर बिजली की कमी के कारण सभी छह पंपों का संचालन नियमित नहीं हो पाता है। इससे नहर कई बार पूरी क्षमता के साथ संचालित नहीं हो पाती है और नहर का पानी अधिकांशत: टेल वाले गांवों तक नहीं पहुंच पाता है। इसके चलते सिंचाई विभाग द्वारा शासन की योजना के तहत नहर पर एक जेपीसी चलने योग्य कम क्षमता का सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करना प्रस्तावित किया गया। ताकि जाखलौन पंप केनाल के सुचारु संचालन में बिजली की बाधा उत्पन्न न हो सके और किसानों को समय से सिंचाई के लिए केनाल का पानी उपलब्ध कराया जा सके। सिंचाई विभाग निर्माण खंड द्वितीय द्वारा जेपीसी की नहर पर सोलर ऊर्जा प्लांट की स्थापना के लिए यहां 3.42 मेगावाट और 2.50 मेगावाट क्षमता की दो यूनिटें बनाई जानी है। छह मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट बनाने में अनुमानित राशि करीब सात करोड़ रुपये बताई गई है। यह प्लांट नहर के ऊपर स्थापित किया जाएगा, इसमें नहर से पानी भी बहता रहेगा और नहर के ऊपर बने ढांचे पर सोलर प्लांट की प्लेटों से सोलर ऊर्जा का उत्पादन भी होता रहेगा। यह प्लांट नहर पर करीब आठ किलोमीटर क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। सोलर प्लांट की स्थापना के लिए यहां सिंचाई विभाग निर्माण खंड के अधिकारियों की देखरेख में पूर्व में नहर पर स्थापित मॉडल और डिजाइन में मामूली बदलाव भी किया गया है। लेकिन अभी भी यहां एक वर्ष से अधिक समय से मात्र कागजी प्रक्रिया तक ही सीमित है। इसी प्रक्रिया के तहत अब बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता ग्रामीण आकाश सचान ने अपने उच्चाधिकारियों को एक टीएफआर रिपोर्ट (टैक्नीकल फिजिविलिटी रिपोर्ट) भेजी है। इस रिपोर्ट में सौर ऊर्जा प्लांट में उत्पादित बिजली के केनाल के उपयोग के बाद बची हुई बिजली को ग्रिड में उपयोग की जानकारी दी जाती है और इसके बाद ही सिंचाई विभाग अब बिजली केनाल पर स्थापित होने वाले सौर ऊर्जा प्लांट से उत्पादित बिजली के रेट निर्धारित करेंगे। हालांकि इसके लिए सोलर कंपनी द्वारा पूर्व में नहर के दोनों ओर पैनल लगाने के लिए गड्ढे खोदनेे का कार्य शुरू कर दिया था। और एक स्विच यार्ड भी बनाया जा रहा था। लेकिन डिजाइन और मॉडल में बदलाव के कारण यह कार्य फिलहाल पूर्व की स्थिति में ही है।
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60 मेगावाट सौर ऊर्जा का हो रहा उत्पादन
ललितपुर। जनपद में उक्त प्लांट के अलावा वर्तमान में महरौनी खुर्द और अमरपुर स्थित 10-10 मेगावाट के तीन सौर ऊर्जा प्लांट से 30 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। वहीं तहसील महरौनी अंतर्गत ग्राम पठा विजयपुरा में दस मेगावाट और ग्राम बारचौन में 20 मेगावाट के सोलर ऊर्जा प्लांट से भी 30 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है। इस प्रकार जनपद में पांच सौर ऊर्जा प्लांट के माध्यम से वर्तमान में 60 मेेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है।
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जाखलौन पंप केनाल की नहर पर करीब छह मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा प्लांट की दो यूनिटों की स्थापना सिंचाई विभाग द्वारा कराया जा रहा है। फिजीविलिटी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
- आकाश सचान, अधिशासी अभियंता विद्युत ग्रामीण।