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सामाजिक कार्यकर्ता ने नेमवि के पुस्तकालय को सौपी 470 पुस्तकें
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ललितपुर। सरदार पटेल महाविद्यालय मिर्चवारा के पूर्व प्राचार्य एवं सामाजिक कार्यकर्ता डा. पूरन सिंह निरंजन ने अपने 68 वर्षीय जीवन में संग्रहीत 470 पुस्तकों का कोष स्थानीय नेहरू महाविद्यालय को दान स्वरूप भेंट की हैं। इसमें मुख्य रूप से चारों वेद, 108 उपनिषद, 20 स्मृतियां, वाल्मीकि रामायण, महाभारत, भागवत पुराण, भगवत गीता जैसे पुरातन ग्रंथ शामिल हैं।
डा. पूरन सिंह निरंजन ने बताया कि उन्होंने अपने 39 वर्षीय शिक्षक जीवन में अध्ययन, अध्यापन एवं अनुसंधान हेतु इन ग्रंथों का भरपूर संग्रह एवं उपयोग किया है। हम चाहते हैं कि उनकी सेवानिवृत्ति के बाद अब इनका प्रयोग नेहरू महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षार्थी एवं शोधार्थी करें। पुस्तकों में पीवी कोण का प्रख्यात धर्मशास्त्र का इतिहास, भारतीय दर्शन, मोनियर विलियम्स का विश्वविख्यात संस्कृत व अंग्रेजी शब्दकोष, संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी व पाली भाषा एवं साहित्यक विषयक विभिन्न आधुनिक मौलिक ग्रंथ, देशी विदेशी चिंतकों की प्रेरक आत्मकथायें, स्थानीय और राष्ट्रीय कवियों के गीत संग्रह, वर्तमान समस्याओं और चुनौतियों का गहन विश्लेषण ग्रंथ सहित अनेक शोधग्रंथ शामिल हैं।
प्राचार्य डा अवधेश अग्रवाल ने कहा कि पुस्तकों के महत्व से अंजान हो रही वर्तमान पीढ़ी को यही संदेश है कि पुस्तकों से दूर रहना अपनी असल जिंदगी से दूर रहना है। संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने डा पूरन सिंह निरंजन की सराहना करते हुए कहा कि कॉलेज के पुस्तकालय में अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं। अब इन बहुमूल्य ग्रंथों का लाभ भी छात्रों को मिलेगा।
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डा. पूरन सिंह निरंजन ने बताया कि उन्होंने अपने 39 वर्षीय शिक्षक जीवन में अध्ययन, अध्यापन एवं अनुसंधान हेतु इन ग्रंथों का भरपूर संग्रह एवं उपयोग किया है। हम चाहते हैं कि उनकी सेवानिवृत्ति के बाद अब इनका प्रयोग नेहरू महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षार्थी एवं शोधार्थी करें। पुस्तकों में पीवी कोण का प्रख्यात धर्मशास्त्र का इतिहास, भारतीय दर्शन, मोनियर विलियम्स का विश्वविख्यात संस्कृत व अंग्रेजी शब्दकोष, संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी व पाली भाषा एवं साहित्यक विषयक विभिन्न आधुनिक मौलिक ग्रंथ, देशी विदेशी चिंतकों की प्रेरक आत्मकथायें, स्थानीय और राष्ट्रीय कवियों के गीत संग्रह, वर्तमान समस्याओं और चुनौतियों का गहन विश्लेषण ग्रंथ सहित अनेक शोधग्रंथ शामिल हैं।
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प्राचार्य डा अवधेश अग्रवाल ने कहा कि पुस्तकों के महत्व से अंजान हो रही वर्तमान पीढ़ी को यही संदेश है कि पुस्तकों से दूर रहना अपनी असल जिंदगी से दूर रहना है। संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने डा पूरन सिंह निरंजन की सराहना करते हुए कहा कि कॉलेज के पुस्तकालय में अनेक पुस्तकें उपलब्ध हैं। अब इन बहुमूल्य ग्रंथों का लाभ भी छात्रों को मिलेगा।
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